Link copied!
Sign in / Sign up
1
Shares

यौवन के दौरान लड़के और लड़कियों में आ सकते हैं ये सामजिक बदलाव

किशोरावस्था एक समय है जब आपका बेटा या बेटी कई सामाजिक और शारीरिक बदलाव से गुजरते हैं। यह एक नाजुक समय है जब आपका बच्चा बाल्यकाल से यौवनारंभ की ओर बढ़ता है लेकिन उनमें अब भी बच्चे या‌ युवा की समान विशेषताएं नहीं होती है। यौवनारंभ का समय आपके बच्चे के लिए भ्रमित करने वाला हो सकता है और परिणामस्वरूप कभी-कभार अनेपक्षित,अलग और परेशान करने वाला व्यवहार करते हैं।

एक माता-पिता होने के नाते आप समझने की कोशिश करते हैं आपका बच्चा किस हालात से गुजर रहा है और कैसे उनकी मदद करनी है। यह जानने से की इस दौरान आपका बच्चा किस हालात से गुजर रहा है, आप अपने बच्चे की सही तरह से मदद कर सकते हैं।

यह है यौवन के दौरान लड़के और लड़कियों में होने वाले आम और महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन जिससे वह अवश्य गुजरते हैं:

पहचान की खोज

 

किशोरावस्था के वर्ष आपके बच्चे के लिए भ्रमित करने वाले होते हैं वह ना तो पूरी तरह से बाल भावना से जोड़कर खुद को देख पाते हैं और ना ही युवा को पूरी तरह समझ पाते हैं। परिणामस्वरूप आपका बच्चा जटिल स्थिती में होता है। आपका बच्चा अपने आप को स्थिति के अनुसार ढालने की कोशिश करता है और सोचता है की कैसे व्यवहार करना चाहिए। इस स्तर पर अगर आप अपने बच्चे के साथ छोटे बच्चे की तरह पेश आएंगे तो उन्हें यह अपमानजनक लगेगा। साथ ही अगर आप उन्हें व्यस्कों की तरह व्यवहार करने के लिए कहेंगे तो उन्हें यह बहुत पाबंदी लगने लगेगा। अपने पहचान खोजने के लिए आपका बच्चा बहुत सी जिम्मेदारी लेगा,जो वह पूर्ण करने में सक्षम नहीं होगा। अपने बच्चे के साथ दोनों स्तरों के अनुरूप व्यवहार करें, एक बालक और बढ़ते हुए युवा के अनुरूप। इस बात का ध्यान रखें की एक बालक होने के नाते आप उन्हें प्यार दें और उन्हें थोड़ी आजादी दें और जिम्मेदारी देकर उनपर भरोसा करें।

आत्मसम्मान के साथ समस्या

किशोरावस्था के दौरान आपका बच्चा कई नए लोगों और दोस्तों के सम्पर्क में आता है। इसका परिणाम यह होता है की उन्हें विभिन्न व्यक्तित्वों को देखने का अवसर मिलता है और वह अक्सर उसकी तुलना अपने व्यक्तित्व और व्यवहार से करते हैं। बहुत सारी आने वाली जिम्मेदारी हो रहे बदलाव के कारण आपका बहुत भ्रमित होता है। यह बच्चों के लिए फायदेमंद होता है चाहे वह सही फैसले लेने में सक्षम हो या उनके व्यक्तित्व में कमी हो। अपने दोस्तों व सहपाठियों के बीच सकारात्मक और मजबूत व्यक्तित्व लगने के लिए किशोरावस्था का दौर आपके बच्चे के लिए बहुत संवेदनशील है। वह अपने शारीरिक बदलाव को समझने की कोशिश करते हैं और अक्सर उनके दिमाग में अपने व्यक्तित्व की नकारात्मक छवि बनती है।

इस बात को सुनिश्चित करें की आपका बच्चा जो भी करने का प्रयास करे,आप उसे प्रोत्साहित करें। अपने सहारे को शब्दों तक सीमित ना रहने दें और अपने काम द्वारा उन्हें जताएं की आप उनकी मदद के लिए हमेशा तैयार हैं। अपने बच्चे को बताएं की इन सब बदलावों के साथ ही आप उन्हें और अधिक प्यार करते हैं और हमेशा उनके साथ है।

खतरनाक व्यवहार में फंसने का खतरा

क्योंकि आपका बच्चा कई बदलावों से गुजर रहा है इसलिए कोई ना कोई संघर्ष चलता ही रहता है। आपका बच्चा अपनी आजादी के लिए नियमों को तोड़ने की कोशिश करेगा। इस उम्र में लगातार नियमों को तोड़ना और दुनिया को यह जाहिर करने की होड़ की अब वह बड़े हो गए हैं इससे आपके बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।इस दौरान आपके बच्चे को लगातार रोचक अनुभव करने की चाहत होती है। इससे आपका बच्चा गलत संगत में भी पड़ सकता है। आपके बच्चे को इस उम्र में शराब, धूम्रपान,नशा आदि और शारीरिक संबंध का अनुभव करने की उत्सुकता भी हो सकती है। बेशक आपने अपने बच्चे से क्या ग़लत है और क्या सही इस बारे में बात की हो, फिर भी उनके किसी दोस्त या युवा से प्रभावित होने की संभावना अधिक होती है। 

अपने बच्चे को उसके दोस्तों के सामने नीचा ना दिखाएं, इससे उनमें गुस्सा और बढ़ेगा और वह नियमों को तोड़ेंगे। अगर आप अपने बच्चे की संगति से खुश नहीं हैं तो शांत स्वभाव से उनसे बात करे। अगर आपके बच्चे को बुरी लत लग गई है,तो काउंसलर से परामर्श लें।

डिप्रेशन और सुसाइड व ख़ुद को नुक्सान पहुंचाने का ख्याल

यह गंभीर समय है जब आपका बच्चा भावनात्मक बदलावों से गुजरता है, जिसमें डिप्रेशन शामिल हैं। कुछ बच्चे तनाव से खुद या परिवार के सहारे और प्यार‌ द्वारा लड़ लेते हैं लेकिन कुछ को विशेषज्ञों की जरूरत होती है। इस दौरान बच्चे का उदास होना सामान्य बात है। साथ ही उनके लिए समझना मुश्किल होता हैं की वह उदास क्यों है। पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगी दबाव के कारण बच्चे तनाव भी महसूस करते हैं।

अगर आप इनमें से कोई भी लक्षण अपने बच्चे में देखें,तो सुनिश्चित करें की आप उनसे इस बारे में खुलकर बात करें। उन्हें जताएं की आप उनकी भावनाओं को महत्वपूर्ण मानते हैं। अगर आप सभी प्रयास करने के बाद भी उनकी मदद नहीं कर पा रहे हैं तो अपने डॉक्टर या काउंसलर से मदद लें।

 

 

 

Click here for the best in baby advice
What do you think?
0%
Wow!
0%
Like
0%
Not bad
0%
What?
scroll up icon