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क्या है सिजेरियन डिलीवरी ? सिजेरियन डिलीवरी के बारे में सारी बातें जानें यहां

फोटो सोर्स : DusBus.Com

बच्चे को जन्म देना एक मां के लिए सबसे पीड़ादायक लेकिन सुखद अहसास है। बच्चे को जन्म देने के दो तरीके हैं, एक प्राकृतिक... जिसे आम भाषा में नॉर्मल डिलीवरी कहते हैं और दूसरी सिजेरियन डिलीवरी।

नॉर्मल डिलीवरी में बच्चा प्राकृतिक रुप से महिला की योनी के रास्ते बाहर आता है जबकि सिजेरियन डिलीवरी में पेट काटकर बच्चे को बाहर निकाला जाता है।

1. सी-सेक्शन सिजेरियन डिलिवरी क्या है What is a Cesarean delivery

2. सिजेरियन डिलीवरी की जरुरत कब पड़ती है ? when will women need Caesarean delivery ?

3. बिना योजना के सिजेरियन डिलीवरी की जरुरत कब पड़ती है ? when will unplanned c-section needed ?

4. सिजेरियन डिलीवरी से पहले क्या होता है ? What happens right before a c-section?

5.सिजेरियन कैसें करते है ? How is a c-section done?

6. सिजेरियन डिलीवरी के बाद कैसे ख्याल रखना चाहिये ?

सी सेक्शन (सिजेरियन डिलीवरी) क्या है ?What is a Cesarean delivery ?

गर्भवती महिला के पेट और गर्भाशाय में चीरा काटकर बच्चे को बाहर निकलाने को सी सेक्शन या सिजेरियन डिलीवरी कहते है। कुछ मामलों में पहले से ही सिजेरियन डिलीवरी की योजना तय होती है लेकिन कुछ मामलों में लेबर पेन के बाद जब महिलाओं को प्राकृतिक रुप से बच्चे को जन्म देने में दिक्कत होती है तो सिजेरियन डिलीवरी की जाती है। यू.एस. सेंटर फॉर डिज़ीज कंट्रोल के अनुसार 2015 में 32 प्रतिशत महिलाओं ने सिजेरियन डिलीवरी से बच्चे को जन्म दिया है।

सिजेरियन डिलीवरी की जरुरत कब पड़ती है ? (when will women need Caesarean delivery) 

कई मामलों में डॉक्टर पहले से ही गर्भवती महिला को सिजेरियन डिलीवरी करने की सलाह देते हैं। आमतौर पर इन कारणों से सिजेरियन डिलीवरी पहले से ही प्लान की जाती हैं।

1. जब बच्चे का सिर जन्म नली से बड़ा हो

2.  जब गर्भवती महिला को कोई स्वास्थय संबंधी परेशानी हो, जैसे दिल की बीमारी या हाई बल्ड प्रेशर की समस्या हो।

3.  गर्भनाल में कोई समस्या हो।

4. यदि भ्रुण गर्भाशय के अलावा कहीं और स्थित हो।

5.  गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे हों।

6. अगर गर्भवती महिला को डायबिटीज है और नॉर्मल डिलीवरी से बच्चे को इससे खतरा होने की संभावना है तो डॉक्टर सी – सेक्शन की ही सलाह देंगे।

7.  अगर महिला एचआईवी पॉजिटिव हो।

8.  अन्य कोई प्रेग्नेंसी संबंधी समस्या हो।बिना योजना के सिजेरियन डिलीवरी की जरुरत कब पड़ती है ? (when unplanned c-section needed ?)

कई बार सिजेरियन डिलीवरी बिना योजना के करने पड़ती है। महिला पहले से तो स्वस्थ होती है लेकिन लेबर पेन के बाद नॉर्मल डिलीवरी करने में दिक्कत आने लगती है। उस वक्त डॉक्टरों को तुरंत सिजेरियन करना पड़ता है। इन परिस्थियों में बिना योजना के सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ती है।

- शिशु को ऑक्सीजन ना मिल पा रही हो।

- जब महिला सक्रिय लेबर में हो और लेबर पेन धीमा या बंद हो जाए।

- जब बच्चे के पैर या कंधा पहले बाहर आ जाए।

- मां को सक्रिय जननांग दाद हो, जिससे बच्चे को संक्रमण होने का खतरा होता है। इसलिए बच्चे को संक्रमण से बचाने के लिए सिजरेयन डिलीवरी करनी पड़ती है।

- गर्भाशय का फैलना और बच्चे को गलत दिशा में चले जाना।

सिजेरियन डिलीवरी से पहले क्या होता है ? (What happens right before a c-section?)

अगर सिजेरियन डिलीवरी प्री प्लान होती है तो डॉक्टर आपको बताते हैं कि आपको सी – सेक्शन की जरूरत क्यों है। वह आपको एक निर्धारित तारीख दे देते हैं। जिस पर आप अपने परिवार से सलान- मुशवरा करके उसे तारीख के लिए सहमति बनाते हैं। इसके लिए एक फार्म भरना होता है और अपनी सहमति देनी होती है। कई अस्पतालों में इस सिजेरियन डिलीवरी के दौरान पति को अपनी पत्नी के साथ रहने की अनुमति दी जाती है।

कुछ इस तरह बहादुर होती हैं सी-सेक्शन कराने वाली महिलाएं 

कैसी होती है सिजेरियन डिलीवरी ? (How is a c-section done?)

 

सिजेरियन डिलीवरी में महिला को आधा सुन्न किया जाता है। इस प्रक्रिया में गर्भवती महिला को दर्द का अहसास बहुत कम होता है। सारी तैयारियां करने के जननांग के ऊपर पेट के निचले हिस्से पर चीरा लगाया जाता है। जिसे बिकनी कट भी कहा जाता है। पेट पर चीरा काटने के बाद जब गर्भाशय दिखने लगता है तो डॉक्टर गर्भाशय पर भी एक चीरा काटते हैं। इस चीरे के माध्यम से शिशु को गर्भाशय से बाहर निकाला जाता है। इस दौरान सर्जरी वाली जगह को ढक कर रखा जाता है ताकि महिला ये प्रक्रिया ना देख सकें। बच्चे को बाहर निकालने के बाद डॉक्टर पहले शिशु के नाक और मुंह पोछते है और उसके बाद नर्स को सौंप देते हैं ताकि वह मां की गोद में जाने से पहले साफ कर दिया जाए।

सिजेरियन डिलीवरी के नुकसान  (side effect of Cesarean Delivery)

सिजेरियन डिलीवरी के दौरान महिलाएं भले ही प्रसव की असहनीय पीड़ा से नहीं गुजरती हैं लेकिन बाद में महिलाओं को कई महीने या साल तक दर्द सहन होता है। सिजेरियन डिलीवरी से मां और शिशु दोनों को ये नुकसान होते हैं।

गर्भावस्था के दौरान अगर नहीं चाहती सी-सेक्शन तो रखें इन बातों का ध्यान

1. नॉर्मल डिलीवरी के बाद महिला 12 से 20 घंटे के बाद घर जा सकती है लेकिन सिजेरियन डिलीवरी में महिला को कुछ दिन अस्पताल में ही रहना पड़ता है।

2. ऑपरेशन वाली जगह पर महिला को कुछ महिने या साल तक दर्द रहता है।

3. सिजेरियन डिलीवरी वाली मां अपने बच्चे को तुरंत स्तनपान कराने में सक्षम नहीं होती है।

4. नॉर्मल डिलीवरी के बाद महिला जल्दी से रिकवरी कर लेती हैं लेकिन सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को रिकवरी करने में ज्यादा समय लगता है।

5. सिजेरियन डिलीवरी में मां को खून की कमी और संक्रमण होने का खतरा होता है।

जानिये सी-सेक्शन के बाद अपने पेट की हालत

6. ऑपरेशन के दौरान आंत और मूत्राशय घायल होने की संभावना रहती है।

7. बच्चे और मां दोनों को मोटापा होने की संभावना बढ़ जाती है।

8. अगर महिला पहले शिशु को सिजेरियन से जन्म देती है तो भविष्य में बाकी बच्चों की जन्म भी सिजेरियन से होने की संभावना होती है।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद ऐसे रखें अपना ख्याल (precaution after cesarean delivery)

अगर आपके बच्चे का जन्म सिजेरियन डिलीवरी से हुआ है तो आपको इन खास बातों का ख्याल रखना होगा, जिससे आपके घाव भी जल्दी भरेंगे और संक्रमण भी नहीं होगा।

1.  भारी – भरकम एक्सरसाइज ना करें।

2. सफाई का विशेष ख्याल रखें, योनी और ऑपरेशन वाली जगह को साफ रखें ताकि संक्रमण ना हो।

3. जब तक आपके घाव पूरी तरह से ना भर जाएं तब तक डॉक्टर के संपर्क में रहें।

4. ऊंची जगह चढ़ने से बचें, जैसे सीढिया चढ़ना।

सी-सेक्शन(c-section) के बाद आपका आहार प्लैन(diet chart) 

5. ऑपरेशन के बाद कम से कम चार से छह महीने तक सेक्स ना करें।

6. अपने शरीर को पानी की कमी ना होने दें। पानी की कमी होने से आपको डिहाइड्रेशन या कब्ज की शिकायत हो सकती है।

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