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(video)नवजात शिशु को दुनिया कैसी दिखती है - आइये उनकी नज़र से देखें -

 

हर माँ के लिए उसका बच्चा एक जीनियस होता है और उन्हें अपने बच्चे पर गर्व होता है और सच कहें तो हम इस बात को मना भी नहीं करेंगे क्योंकि बिना किसी शक के बच्चे हर चीज़ काफी जल्दी सीखते हैं| जब आपका बच्चा पैदा होता है तो उसकी बुद्धि बनने के कगार पे रहती है और उसकी प्रगति होती रहती है| नवजात शीशु अपने से 8 से 15 इंच दूर की चीज़ ही देख पाते हैं- उनकी नज़र उन्हें केवल उनको गोद में लिए इंसान की ही शकल दिखाती है|   

हर गुज़रते हफ़्तों के साथ बच्चे रंगों में अंतर करना शुरू कर देते हैं और अब उन्हें दूर की चीज़ें साफ़ दिखने लगती हैं| नवजात शिशु के जन्म के पहले हफ्तों में उन्हें दुनिया ब्लैक और वाईट दिखती है| नीचे हमनें आपके लिए एक वीडियो डाला है जिससे आप देख पाएंगी की आपके बच्चे के जन्म होने के बाद उसे दुनिया कैसी दिखती है| देखिये किस तरह गुज़रते हफ़्तों के साथ आपके बच्चे की दृष्टि सुधरती रहती है|

शिशु की दिमागी शक्ति बढ़ने का तरीका -

 

जो माँ बाप अपने बच्चे से उसके बचपन में कम बात करते हैं अक्सर वो बच्चे पढाई में कमज़ोर होते हैं हालांकि वो बच्चे जिनसे बचपन में अधिक बात की गयी हो या कहानियाँ सुनाई गयी हों वो पढाई में अच्छे रहते हैं| बच्चों से उनके बचपने में बात करने से उन्हें अन्य लैंग्वेज और रिदम में अंतर समझ आते हैं और बड़े होते ही वो सारी बातों को जल्द समझने और सीखने में सफल होते हैं|

बच्चों से अगर कोई बात अधिक बार दोहराई जाए तो उन्हें वो बात ज़ादा समय तक याद रहती है| उनसे अगर कोई सेंटेंस कहा जाए जैसे "घोड़े ने कार्ट को खींचा" तो इससे वो अपने दिमाग में घोड़े की एक तस्वीर बना लेते हैं, ये तरकीब उन्हें बड़ा होकर स्कूल में सोचने की शक्ति को और बढ़ावा देता है| अपने बच्चे को कोई बात सिखाते समय ध्यान रखें की आप एक ऐसे नागरिक को तैयार कर रही हैं जो अपना भविष्य सोच सके, समझ सके और दूसरों को समझा सके|

अपने बच्चे को चीज़ों के बीच अंतर सिखाएं, जैसे कुत्ते और बिल्ली में अंतर, चूहे और हाथी में अंतर ताकि अगली बार जब आप अपने बच्चे को ऐसी कोई तस्वीर दिखाएं तो उसे चूहे और बिल्ली में अंतर करना आता हो| बच्चों को टीवी के सामने बैठाना या उन्हें आयी पैड पकड़ा देने से उनका दिमागी विकास नहीं होगा बल्कि उन्हें चीज़ें सीखने में और दिक्कतें आएँगी|

माँ-बाप जब बच्चे को स्कूल के लिए तैयार करते हों या खाना खिलाते हों या नहलाते हों उस समय उन्हें अपने बच्चों से बातें करनी चाहिए, ऐसी बातें जिससे वो कुछ सीखें या ऐसी कहानियां जो उन्हें कुछ सीखा पाए| और माँ बाप को अपने बच्चे से बात सिर्फ बच्चों जैसी बातों तक सिमित नहीं रखनी चाहिए बल्कि कुछ ऐसे शब्द भी इस्तेमाल करने चाहिए जो उन्हें शब्दों का खेल सीखा पाए|

तो किसका इंतज़ार है, अपने बच्चे से बात करना शुरू करें और इस पोस्ट को शेयर कर के दूसरी माओं को भी अपने बच्चे से बात करने के महत्व बताएं|

यदि आप इसका महत्तव समझते हैं तो इसे ज़रूर शेयर करें -

 

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