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(video)उसने फिर से साबित किया की 9 महीने बहुत हैं अपनी माँ को पहचानने के लिए - खुद से दूर जाने ही नहीं दिया


 जन्म के दौरान माँ के दर्द पर हावी खुशी, 11 तस्वीरीं बयां करती अद्भुत जन्म कहानियां

 

कहते हैं कि एक माँ को, जन्म देने के दौरान होने वाला दर्द भूलना पड़ता है, ताकि वह यह दर्द दोबारा सहने के लिए कतराए ना। यदि ये बात है, तो इन फोटोज ने वह सारे दर्द और उससे ज़्यादा ख़ुशी को कैद कर लिया है। शिशु का नाज़ुक शरीर हाथ में आते ही जैसे माँ अपना सारा दर्द भूल जाती है। उन नन्हे हाथों ने जब माँ का हाथ छुआ, मानो ऐसा लगा जैसे कुछ दर्द हुआ ही न हो। तो हम आपके लिए लाये हैं, ऐसे लम्हें जहा दर्द तो है, पर ज़रा देखिये उसमें ख़ुशी कैसे हावी होती है। यह चित्र अनमोल हैं। ज़रा इनके पीछे का मतलब ढूंढे।

डिलीवरी चाहे घर में हो या अस्पताल में, यहाँ वह लम्हा कैद है। चाहे जुड़वाँ हो या एकलौता, लम्हा यहाँ भी वही है। यदि आप माँ बनाने वाली हैं तो आप ज़रूर इसे देखें और आप माँ बन चुकी हैं तो आपको अपना वो पल याद आ जायेगा।

इस माँ की 7 साल की बेटी अपनी माँ की डिलीवरी का हिस्सा बनाना चाहती थी। वह अपनी माँ को दर्द अकेले नहीं झेलने देना चाहती थी। वह धीरे से उस कमरे में आ गयी और मदद करने लगी।


कहते हैं कि एक माँ को, जन्म देने के दौरान होने वाला दर्द भूलना पड़ता है, ताकि वह यह दर्द दोबारा सहने के लिए कतराए ना। यदि ये बात है, तो इन फोटोज ने वह सारे दर्द और उससे ज़्यादा ख़ुशी को कैद कर लिया है। शिशु का नाज़ुक शरीर हाथ में आते ही जैसे माँ अपना सारा दर्द भूल जाती है। उन नन्हे हाथों ने जब माँ का हाथ छुआ, मानो ऐसा लगा जैसे कुछ दर्द हुआ ही न हो। तो हम आपके लिए लाये हैं, ऐसे लम्हें जहा दर्द तो है, पर ज़रा देखिये उसमें ख़ुशी कैसे हावी होती है। यह चित्र अनमोल हैं। ज़रा इनके पीछे का मतलब ढूंढे।

डिलीवरी चाहे घर में हो या अस्पताल में, यहाँ वह लम्हा कैद है। चाहे जुड़वाँ हो या एकलौता, लम्हा यहाँ भी वही है। यदि आप माँ बनाने वाली हैं तो आप ज़रूर इसे देखें और आप माँ बन चुकी हैं तो आपको अपना वो पल याद आ जायेगा।

इस माँ की 7 साल की बेटी अपनी माँ की डिलीवरी का हिस्सा बनाना चाहती थी। वह अपनी माँ को दर्द अकेले नहीं झेलने देना चाहती थी। वह धीरे से उस कमरे में आ गयी और मदद करने लगी।

यहाँ शिशु 6 उंगलयों के साथ पैदा हुआ था। सिर्फ यही नहीं, इसके हाथों में हड्डियां नहीं बनी थी। यह एक कुदरत का करिश्मा ही समझें। इस शिशु के हाथ में नाख़ून भी थे।

यह एक अत्यंत खूबसूरत लम्हा है। शिशु के होते ही माँ ने उसे ऐसे सीने से लगा लिया। जब वह घर जाके फोटो देखीं, तो उन्हें यह एहसास हुआ कि शिशु भी उतनी ही शान्ति महसूस कर रहा था। अब क्या करे - माँ और शिशु का रिश्ता ही ऐसा होता है।

यह अनोखा चित्र दर्शाता है कि माँ किस गंभीरता से शिशु को इस दुनिया में लाना चाहती है। पिता भी उतने ही गंभीर थे। बस तुम्हारा ही इंतज़ार है।

यह वह माँ की तस्वीर है, जिनके शिशु को एक दूसरी माँ ने जन्म दिया है। गौर कीजिये, माँ की ख़ुशी ऐसी है मानो जैसे उन्होंने ही यह किया है।

क्या आप इस लम्हे की गहराई में जाना चाहते हैं? यह वो लम्हा है जहाँ शिशु बस अपने सुन्दर आँखें खोलकर अपने माँ को पहली बार देखने वाला है। इस अहसास के लिए हमारे पास शब्द नहीं।

कहते हैं माँ और शिशु, दो शरीर एक जान होते है। जी हां, इन्हे दो शरीर को जोड़ता यह अम्बिलिकल कॉर्ड, एक डोर है माँ और शिशु के बीच। यह वह लम्हा है जब माँ और शिशु अभी भी जुड़े हुए हैं।

 जन्म देने से पहले, यह माँ को पहले ही एहसास हो गया था कि उन्हें एक बात टब चाहिए। ज़रा देखें उन्होंने इस नन्ही से जान को इस दुनिया में स्वागत करना का क्या माध्यम चुना है।

यह चित्र साफ़ साफ़ बयां करता है कि दर्द में ख़ुशी कितनी हावी हैं। यहाँ शिशु, माँ और माँ के गर्भ के बीच है। इस समय भी वह अपने शिशु को अपनी बाहों में लेना चाहती हैं। माँ, आप कैसे यह कर पाती हैं?

 इस शिशु ने पानी में, अपनी माँ की बाहों में जन्म लिया। माँ की ख़ुशी छुप नहीं पा रही है। उनके आंसू गालों को भीगा दिए।

 दुनिया की सारी ख़ुशी एक तरफ, और माँ बनाने का सुख एक तरफ। यह वो लम्हा हैं जहाँ माँ ने 9 महीने गर्भ में रहे शिशु को पहली बार अपने हाथ में लिया। तस्वीर सब बयां कर रही है।

यदि आप एक माँ हैं या होने वाली माँ हैं, तो आप इस दर्द पे आयी ख़ुशी को बखूबी जानती हैं। इस अद्भुत लम्हें को दूसरों के साथ शेयर करें।

यहाँ शिशु 6 उंगलयों के साथ पैदा हुआ था। सिर्फ यही नहीं, इसके हाथों में हड्डियां नहीं बनी थी। यह एक कुदरत का करिश्मा ही समझें। इस शिशु के हाथ में नाख़ून भी थे।

यह एक अत्यंत खूबसूरत लम्हा है। शिशु के होते ही माँ ने उसे ऐसे सीने से लगा लिया। जब वह घर जाके फोटो देखीं, तो उन्हें यह एहसास हुआ कि शिशु भी उतनी ही शान्ति महसूस कर रहा था। अब क्या करे - माँ और शिशु का रिश्ता ही ऐसा होता है।

यह अनोखा चित्र दर्शाता है कि माँ किस गंभीरता से शिशु को इस दुनिया में लाना चाहती है। पिता भी उतने ही गंभीर थे। बस तुम्हारा ही इंतज़ार है।

यह वह माँ की तस्वीर है, जिनके शिशु को एक दूसरी माँ ने जन्म दिया है। गौर कीजिये, माँ की ख़ुशी ऐसी है मानो जैसे उन्होंने ही यह किया है।

क्या आप इस लम्हे की गहराई में जाना चाहते हैं? यह वो लम्हा है जहाँ शिशु बस अपने सुन्दर आँखें खोलकर अपने माँ को पहली बार देखने वाला है। इस अहसास के लिए हमारे पास शब्द नहीं।

कहते हैं माँ और शिशु, दो शरीर एक जान होते है। जी हां, इन्हे दो शरीर को जोड़ता यह अम्बिलिकल कॉर्ड, एक डोर है माँ और शिशु के बीच। यह वह लम्हा है जब माँ और शिशु अभी भी जुड़े हुए हैं।

 जन्म देने से पहले, यह माँ को पहले ही एहसास हो गया था कि उन्हें एक बात टब चाहिए। ज़रा देखें उन्होंने इस नन्ही से जान को इस दुनिया में स्वागत करना का क्या माध्यम चुना है।

यह चित्र साफ़ साफ़ बयां करता है कि दर्द में ख़ुशी कितनी हावी हैं। यहाँ शिशु, माँ और माँ के गर्भ के बीच है। इस समय भी वह अपने शिशु को अपनी बाहों में लेना चाहती हैं। माँ, आप कैसे यह कर पाती हैं?

 इस शिशु ने पानी में, अपनी माँ की बाहों में जन्म लिया। माँ की ख़ुशी छुप नहीं पा रही है। उनके आंसू गालों को भीगा दिए।

 दुनिया की सारी ख़ुशी एक तरफ, और माँ बनाने का सुख एक तरफ। यह वो लम्हा हैं जहाँ माँ ने 9 महीने गर्भ में रहे शिशु को पहली बार अपने हाथ में लिया। तस्वीर सब बयां कर रही है।

यदि आप एक माँ हैं या होने वाली माँ हैं, तो आप इस दर्द पे आयी ख़ुशी को बखूबी जानती हैं। इस अद्भुत लम्हें को दूसरों के साथ शेयर करें।
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