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इस 4 मिनट की वीडियो में देखिए शिशु के 9 महीनों का सफ़र

 

 

जैसे-जैसे शिशु गर्भ में बड़ा होता है, वो गर्भ में हिलने लगता है। और आप यह महसूस भी कर पाती होंगी, उनकी लात,या उनके हलचल से। हो सकता है पिछले महीने आपके शिशु के पास, पेट में उतनी जगह नहीं होगी। पर जैसे जैसे आपकी डिलीवरी पास आती है, आपका यह जानना की शिशु किस अवस्था में है, और भी ज़रूरी हो जाता है ताकि आप यह निश्चित कर पाएं की शिशु की सही अवस्था में बहार आये।

हालाँकि आपके डॉक्टर इसे देखते रहेंगे की गर्भ में शिशु किस अवस्था में है, खासकर आखरी महीने में। तो आइये जानते हैं गर्भ में शिशु की अवस्था -

1. एंटीरियर (anterior)

यहाँ शिशु का सर झुका होता है, और उनका चेहरा आपकी पीठ की ओर होता है। उनकी ठुड्डी उनके सीने की तरफ होती है और उनका सर पेल्विस में जाने के लिए तैयार होता है। शिशु अपना सर और गर्दन हिला पता है।

सर का सबसे सकरा पार्ट यौनि को खोलने में मदद करता है। ज़्यादातर बच्चे इस अवस्था में 33-36 हफ्ते आते हैं। यह डिलीवरी के लिए एक सुरक्षित अवस्था मानी जाती है।

 

2. पोस्टीरियर (posterior)

इस अवस्था में भी शिशु का सर झुका होता है, लेकिन यहाँ उनका चेहरा आपके पेट की तरफ होता है। लेबर के पहले चरण में, लगभग 1/3 और 2/3 बच्चे इसी पोजीशन में होते हैं। डेलिवेरी से पहले अधिकतर बच्चे खुद को घुमा लेते हैं। लेकिन इसमें भी 10 से 28 प्रतिशत बच्चे ऐसा नहीं कर पाते।

शिशु के ऐसे पोजीशन में होने पर ज़्यादातर मायों को कमर दर्द(back pain) की तकलीफ होती है। इस स्तिथि में हो सकता है कि डिलीवरी में अनुमानित से ज़्यादा समय लगे।

3. ब्रीच(Breech)

इस अवस्था में शिशु के पैर पहले होते हैं। इस पोजीशन को तीन तरह से पाया गया है।

फ्रैंक ब्रीच - शिशु के पंजे शिशु के सर के पास होते हैं। उनके पैर उनके शरीर की तरफ होता है।

कम्पलीट ब्रीच - शिशु के पैर मुड़े होते हैं।

फुटिंग ब्रीच - शिशु के पंजे नीचे की तरफ होते हैं।

ब्रीच पोजीशन, डिलीवरी के लिए सही नहीं मानी जाती है। हर 25 में 1 बच्चे का जन्म ऐसे होता है। हालाँकि, ज़्यादातर बच्चे इस पोजीशन में स्वस्थ ही पैदा हुए हैं, लेकिन ऐसे में शिशु के शरीर में कमी आने के बहुत चान्सेस होते हैं। ब्रीच पोजीशन की डिलीवरी में शिशु का सर आखरी में निकला जाता है। इस कारन उसको निकालने में दिक्कतें आती है। ऐसे में कभी कभी अम्बिलिकल कॉर्ड गले में लपट जाती है।

वैसे तो आपके डॉक्टर आपको ज़रूर बताएँगे कि अपने शिशु की अवस्था कैसे बदलेंऔर उससे जुड़े व्ययायाम भी, पर बिना उनकी निगरानी में आप यह न करें। यह तरकीब 50 % काम करती है।

ऐसी डिलीवरी अक्सर सी सेक्शन से होती है। इस तकनीक को इ.सी.वि भी बोलते हैं।

4. ट्रांस्वर्स पोजीशन (Transverse lie)

यह एक बहुत ही अद्भुत पोजीशन होती है। इस पोजीशन में शिशु सीधा होता है। यह बहुत कम लोगों में पायी जाती है। वैसे तो अक्सर डिलीवरी तक शिशु अपने आप को घुमा लेते हैं, लेकिन ऐसा न होने पर इन्हें सी सेक्शन से निकला जाता है।

ऐसी अवस्था में कभी कभी अम्बिलिकल कॉर्ड पहले बहार आ जाती है। यह तत्कालीन स्थिति होती है। ऐसे में तुरंत सी सेक्शन से शिशु को निकला जाता है।

 

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