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(video) जानिए शिशु माँ के गर्भ में क्या महसूस करता है?

अभिभावक अक्सर शिशु से बात करने के प्रयास में महिला का पेट के पास कान रख शिशु की धड़कन और लात का आनंद लेते हैं। वह शिशु से पूछना चाहते हैं, अंदर कैसा लग रहा है? अँधेरा ज़्यादा है? क्या तुम हमें सुन पा रहे हो? इत्यादि।

आपको यह जान कर अच्छा लगेगा की शिशु का विकास सामान्य गति से हो रहा है। वह आपकी बातें समझने की कोशिश भी करता है। यह सही चीज़ें उसे जन्म के बाद उसके पर्यावरण से संपर्क करने में मदद करेंगी।

प्रत्येक महीने शिशु के अंगों में परिवर्तन आता रहता है। यह परिवर्तन उसे सम्पूर्ण इंसान बनने में मदद करते हैं। शिशु का ह्रदय का डेवलपमेंट सबसे पहले होता है। इसी की सही क्रियाशैली से बदन के अन्य अंगों तक रक्त जा पाता है।

हम सब इस दुनिया में कैसे आये? दुनिया में कदम रखने से पहले हमने अपनी माँ के गर्भ में कितने मज़े किये, यह सब आपको इस वीडियो ब्लॉग में देखकर समझ आने लगेगा।

शिशु विकसित होते होते वह सभी हरकतें करता है जो की एक परिपक्व मनुष्य करता है। शिशु छींकता है, उबासी लेता है, वह मल और मूत्र त्याग करता है, हाथ-पैर हिलाता है, माँ की बातें सुन कर उसे पहचानने की कोशिश करता है, रौशनी और अंधेरे में भेद करने लगता है।

शिशु गर्भ में रहते वक्त अपनी माँ से संपर्क में रहता है। उसका रक्त ही उसे जीवन प्रदान करता है और माँ के शरीर का तापमान शिशु में भी प्रवाहित होता है।

शिशु माँ की गर्भ में रहता है और माँ के विचारों का उसपर असर अवश्य पड़ता है। आपकी उदासी बच्चे की शारीरिक गतिविधियों को धीमा कर देती हैं। उसी जगह माँ की ख़ुशी शिशु को हैँसाती हैं। शिशु गर्भ में मुस्कुराता है। इसलिए आप अधिक से अधिक अच्छे विचारों में लीन रहें।

शिशु पर माँ के स्वास्थ्य का असर भी पड़ता है। जब माँ बीमार होती है तो शिशु को कम पोषण मिल पाता है और शिशु का ब्लड प्रेशर भी कम हो सकता है।

जच्चा और बच्चा का स्वास्थ्य एक दूसरे से जुड़ा है। अपने होने वाले शिशु के लिए आदर्श माता-पिता बनें जो आपस में प्यार से रहते हैं ताकि आपके आने वाले शिशु को अच्छा माहौल मिले।

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