Link copied!
Sign in / Sign up
9
Shares

(video)देखें गर्भ में भ्रूण(embryo) का विकास (4th to 9th week of pregnancy)

 

कहते हैं कुछ चीज़ों का अनुभव और उन्हें बेहतर समझने के लिए आपको उनसे गुज़रना पड़ता है। इसलिए पिता होने के बाद ही आप कुछ बातों को बेहतर समझ पाएंगे। पिता बनने का मर्दों को मज़ा भी आता है परन्तु एक खौफ या डर भी होता है की उस नन्ही सी जान की देखभाल और सुरक्षा वे कैसे करेंगे? जी हाँ पितृभाव एक रोमांचक सफर तो है ही साथ ही उसके साथ ज़िम्मेदारी भी आती है। इस पोस्ट में हम आपके लिए कुछ ऐसे मज़ेदार और गुदगुदाने वाली बातें पेश करेंगे जो हमें बताये गए हैं एक पिता की ज़ुबानी।

1. माँ का खाना बच्चा सूंघ सकता है

अगर माँ कुछ मसालेदार कहती है तो शिशु की जुबान थोड़ा जल सी जाती है। मीठे खाने से शिशु को मज़ा आता है। सामान्य भोजन जिसमें अधिक मिर्च मसाले न हों वैसा खाना रोज़मर्रा के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है।

2. गर्भ धारण के लिए लगभग सौ मिलियन sperms के बीच प्रतिस्पर्धा होती है

यकीनन Fertilization( नर स्पर्म और मादा एग का मिलन) एक अद्भुत प्रक्रिया है जिसमें सिर्फ एक अंडे (फीमेल egg) से जुड़ने के लिए सैकड़ों नर sperms आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं। इन सबमें सिर्फ एक स्पर्म ही स्त्री के अंडे से जुड़ कर शिशु का निर्माण करता है।

 

3. नवजात शिशु गर्भावस्था के समय से 15 दिन छोटे होते हैं

सन 1836 में वैज्ञानिकों ने इस बात की खोज की थी शिशु जन्म के समय 15 दिन छोटा होता है। कहने का मतलब अगर शिशु का जन्म 39 हफ़्तों के बाद हुआ है तो वह उससे 15 दिन छोटा ही है।

4. कई महिलायें 9 महीने से पहले शिशु को जन्म दे देती हैं

यह ज़रूरी नहीं की प्रत्येक महिला शिशु को गर्भ में 9 महीने तक पाले। स्वस्थ्य शिशु इस अवधी से पहले भी जन्म ले सकता है। दरअसल 4 प्रतिशत महिलायें ही 40 हफ्ते के बाद जन्म देती हैं। कई उससे पहले ही शिशु को जन्म दे देती हैं।

5. शिशु माँ के गर्भ में तैरते हैं

शिशु जन्म से पहले माँ के गर्भ में एमनीओटिक फ्लूइड में तैरते रहते हैं। इसके बाद वह अपनी पीठ के बल लेटते हैं।

6. भ्रूण यानी अपरिपक्व शिशु का ह्रदय छठे (6th) हफ्ते से रक्त प्रवाह करने लगता है

आठवे हफ्ते तक भ्रूण का ह्रदय लगभग 160 बीट्स प्रति मिनट की रफ़्तार से काम करता है। यह ध्वनि(शिशु की दिल की धड़कन) स्टेथोस्कोप या ultrasound device की मदद से साफ़ सुनीजा सकती है।

इसे सुनने में माँ को बड़ा आनंद आता है।

7. शिशु को गर्भ में बहुत शोर सुनाई देता है

सोल्हवे हफ्ते के बाद से शिशु के कान विक्सित हो जाते हैं और वह गर्भ के बाहर की आवाज़ें सुन सकते हैं। वह माँ की धड़कन, खाना, श्वास लेना, चलना, बात करना, पाद मारना, पाचन क्रिया सभी महसूस कर सकते हैं और आवाज़ों के बीच भेद कर लेते हैं।

8. शोर बच्चों के कानों को नुक्सान पहुँचाता है

माता-पिता को लगता है की जगराता/मूवी देखने से वे आनंद ले रहे हैं, लेकिन क्या वे जानते हैं की इससे शिशु को हानि पहुँचती है? इसलिए अधिक शोर शराबे से दूर रहें। 115 डेसीबल से ज़्यादा आवाज़ आपके शिशु के कान के नाज़ुक अंगों को दर्द पहुंचाती है। ऐसे में शिशु बहरा पैदा हो सकता है।

9. महिलाओं में मॉर्निंग सिकनेस शिशु को कीटाणुओं से बचाती है

जो चीज़ें शिशु को अच्छी नहीं लगती हैं उनसे माँ को भी अनचाहे असर होते हैं। इसलिए जब भी शिशु को कुछ असहजता होती है तो उस दौरान माँ को मॉर्निंग सिकनेस हो जाता है जिसमें उलटी, चक्कर के रूप में माँ के बदन से हानिकारक तत्व निकल कर शिशु को सुरक्षित रखते हैं।

10. शिशु 25 हफ़्तों तक अपने मूत्र को पीते हैं और उसमें तैरते भी हैं

ऐसा होता है क्योंकि शिशु का यूरिनरी सिस्टम पूरी तरह से विक्सित नहीं हुआ है। परन्तु मूत्र के साथ माँ का एमनीओटिक फ्लूइड भी मिश्रित होता है। ये शिशु के बदन में 13वे से16वे हफ्ते के बीच में शुरू हो जाता है।

11. जन्म होने से पहले शिशु अपने मल को बदन में ही दबा कर रखता है

शिशु गर्भ में पहली बार जो मल पैदा करता है वह बालों, त्वचा, पसीने, प्रोटीन, अनपचे खाने, पुराने मृत रक्त कोशिकाओं का मिश्रण होता है। शिशु 20 से 25 हफ़्तों तक अपने मल को बदन में हो सोक लेता है। जन्म के बाद शिशु का मल ढंग से बाहर निकलता है।

इसे शेयर करना न भूलें।

 

Click here for the best in baby advice
What do you think?
0%
Wow!
0%
Like
0%
Not bad
0%
What?
scroll up icon