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जलेबी बेचने वाले पिता के बेटे ने किया टॉप - जानिए कैसे ज़ाहिर की पिता ने अपनी खुशी


रुदपुर के सुभाषनगर में जलेबी और समोसे का ठेला लगाने वाले रामकिशन को बिल्कुल ये अंदाजा नहीं था कि शनिवार का दिन उसकी जिंदगी का बेहद ही खुशी का दिन होगा। दिन-रात मेहनत कर अपने ठेले पर जलेबी बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले रामकिशन के बेटे ने उसकी मेहनत को सफल कर दिया। शनिवार को उत्तराखंड के 10वीं और 12वी के रिजल्ट घोषित हुये और रामकिशन के बेटे नवनीत पाल ने हाईस्कूल के परीक्षा में 18वीं रैंक हासिल की है। जब ये खुशी की बात रामकिशन को पता चली तो वह खुशी से झूम उठे और अपने ठेले की सारी जलेबियां फ्री में ही सबको बांट दी।

रुदपुर में “अतिक्रमण हटाओ“ अभियान के चलते रामकिशन की कोई एक निर्धारित जगह नहीं है अपना ठेला लगाने के लिये उन्हें जंहा कही भी खाली जगह मिल गई वही अपना ठेला लगाकर जलेबी बेचने लगते हैं। शनिवार के दिन जब वे अपने घर से निकले तो उन्हें ये बिल्कुल नहीं पता था कि आज उनकी कमाई नहीं होने वाली। बेटे नवनीत को हाईस्कूल में इतने अच्छे नंबरों से पास देख उन्होंने फ्री में ही सुभाषनगरवासियों को जलेबियां बनाकर बांट दी। एक मामूली सा ठेला लगाने वाले का बेटा होकर टाॅपर्स में जगह बनाना कोई आम बात नहीं है और इसी खुशी में रामकिशन ने सबका मुंह मिठा करवा दिया। 

वाकई ये पूरे परिवार के लिये गौरव की बात है। रामकिशन के परिवार को जब इस खुशी के बारे में पता चला तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। रामकिशन की पत्नी लीलावती के आंखों से निर्झर आंसू बहने लगे लेकिन ये खुशी के आंसू थे। लीलावती का कहना है कि गरीबी की वजह से हमारे बड़े बेटे को बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी, अब ये छोटा बेटा ही हमारा सहारा था। हम चाहते है कि ये खूब-पढ़ लिखकर आगे बढ़े । हमें उम्मीद है कि ये भविष्य में कुछ बनकर दिखायेगा और हम सब का नाम रौशन करेगा। रुदपुर के इस होशियार बालक को बड़ा होकर डाॅक्टर बनना है ताकि वह अपने पापा के पैरों की परेशानी और मां के डायबटीज़ का इलाज कर सके। यह कहना गलत नहीं होगा कि नवनीत न केवल पढ़ाई में ही होनहार है बल्कि अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को बखूबी समझता भी है। हम उम्मीद करते है कि नवनीत को सफलता जरुर मिले और वह अपने परिवार की वो सारी खुशियां दे सके जिनके वो हकदार है।

आज इस दौर में जहां बहुत से बच्चे हाथ में स्मार्टफोन लिए और मज़े की ज़िन्दगी बिता रहे हैं, वहीं नवनीत पाल ने इन सब चीज़ों से दूर रहकर एक सादगी भरा जीवन व्यतीत करते हुए अपने परिवार का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया। जहां कई बच्चे कई चीज़ों की डिमांड करते हैं, वहीं नवनीत के पास जितना था उतने में ही खुश रहकर सबको एक सीख दी है। हम आशा करते हैं कि आगे चलकर नवनीत अपने माता-पिता का और नाम रौशन करे। 

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