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गर्भाशय(uterus) - शिशु का पहला घर - बनावट, महत्तव और रचना के बारे में सब कुछ जानें -


गर्भाशय महिलाओं में बच्चा पैदा करने की थैली का काम करता है। यह शरीर के निचले हिस्से में स्थित होता है और महिला के शरीर के कुछ हॉर्मोन्स भी निर्मित करता है। जब बालिका का जन्म होता है तब उसके गर्भाशय का आकार वयस्क के अंगूठे जितना होता है।

महिला के गर्भाशय के बारे में अन्य महत्वपूर्ण बातें:

जो महिला कभी माँ नहीं बनी हैं उनके गर्भाशय का आकार माँ बन चुकी महिलाओं से छोटा होता है।

सामान्य गर्भाशय का वज़न कम से कम 30 ग्राम होता है और अधिक्तर 100 ग्राम होता है।

गर्भाशय किस चीज़ का बना होता है?

गर्भाशय मुलायम मांसपेशियों का बना होता है। उसमें रक्त संचार रक्त नलियों द्वारा होता रहता है। मुलायम मांशपेशियां एक विशेष प्रकार की मांसपेशियां होती हैं जो प्रसूति के दौरान, यौन चरमसुख और माहवारी के समय संकुचित होती हैं।

मुलायम मांसपेशियां किस तरह काम करती हैं?

इनकी रक्त परत महीने भर में मोटी हो जाती है और माहवारी के दौरान छंट जाती है। अगर गर्भ धारण हो जाता है तो यह रक्त परत शरीर में रह जाती है।

गर्भाशय की भूमिका

गर्भाशय रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में हॉर्मोन्स पैदा करता है। यह काम-क्रियाओं में महिलाओं में उत्तेजना जागृत करता है, यह ओवरी में रक्त संचार पहुंचाता है।

गर्भाशय के अभाव में महिला बच्चे को खुद के शरीर में पाल नहीं सकती।

जब महिला गर्भवती हो जाती है तो उसके गर्भाशय तक अधिक रक्त जाता है और उसका साइज़ भी बढ़ता जाता है ताकि वह शिशु को खुद में समा सके।

शिशु के जन्म के बाद गर्भाशय की मासपेशियां सिकुड़ने लगती हैं और 10 हफ़्तों के अंदर वह अपने पुराने आकार में आ जाता है।

गर्भाशय से जुड़ी दिक्कतें:

माहवारी प्रकृति की दी हुई ऐसी देन है जिसके कारण महिलाओं को कई दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है। इसी का उदाहरण है रक्तस्त्राव जिस कारण महिलाओं में खून की कमी होती है।

इसके अतिरिक्त इसमें कैंसर या अप्राकृतिक कोशिकाओं का पैदा हो जाना, सिस्ट/ गाँठ हो जाने से भी महिलाओं को ऑपेरशन की ज़रूरत पड़ जाती है। ऐसा सबके साथ नहीं होता। शरीर में कुछ अनचाहे प्राकृतिक कभी कभार आ जाते हैं।

मेडिकल न्यूज़ पढ़ती रहा करें, अख़बार, मॅग्ज़िन इत्यादि में भी आपको सम्बंधित मिल जाएगी। स्वस्थ्य गर्भाशय के लिए अपने पति के ही साथ सेक्स करें, असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने से परहेज़ करें, व्यायाम करें और पैरों/झांघों के आस पास की मांसपेशियों को भी प्रयोग में लाएं।

इस ब्लॉग को अन्य महिलाओं के साथ शेयर करें। इससे उन्हें अपने शरीर को बेहतर समझने में मदद मिलेगी।

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