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अल्ट्रासाउंड (ultrasound) कैसे पढ़ें? बच्चे की पहली परछाई - आखरी तक देखें -

 

 

अल्ट्रासॉउन्ड स्कैन क्या होता है?

 

अल्ट्रासॉउन्ड स्कैन द्वारा ध्वनि तरंगें आपके गर्भ तक पहुँचती हैं। गर्भ में पल रहे शिशु से टकराने के बाद यह तरंगें गूँज उठती हैं। यह गूँजें एक चित्र के रूप में तब्दील हो जाती हैं जो की एक चित्रपट (स्क्रीन) पर दिखाई देता है। शरीर के कठोर अंग जैसे कि हड्डियां ज़्यादातर ध्वनि तरंगों को प्रतिबिंबित (रिफ्लेक्ट) कर देते हैं। ध्वनि तरंगें इनसे टकराने के बाद सर्वाधिक गूँज पैदा करती हैं। कठोर अंग सफ़ेद दिखते हैं और नाज़ुक अंग ग्रे रंग के दिखते हैं। एमनीओटिक फ्लूइड जो की गर्भाशय में आपके बच्चे के बदन को सुरक्षित रखता है, काले रंग का दिखता है। यह इसलिए क्योंकि ध्वनि तरंगें बिना किसी टकराव के इसके पार निकल जाती हैं।

 अल्ट्रासाउंड स्कैन कौन करता है ?

 

 

सोनोग्राफर नामक विशेषज्ञ आपका अल्ट्रासाउंड स्कैन करेंगें। वह ध्वनि तरंगों की गूँज से पैदा होने वाले चित्र को देख-समझ कर आपको नतीजे देंगे। सोनोग्राफर के पास मेडिकल अल्ट्रासॉउन्ड की पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री होती है जिससे इन्हें जांच विधि व प्रक्रिया की पूर्ण जानकारी होती है।

पहले अल्ट्रासाउंड स्कैन से जुड़ा अनुभव ?

 

 

पहली बार आपको अल्ट्रासाउंड स्कैन में बड़ा मज़ा आएगा क्योंकि आपको आपके शिशु की पहली छवि देखने को मिलेगी। आपके सोनोग्राफर आपको शिशु के कुछ चित्र का प्रिंट निकालकर भी दे सकते हैं ताकि आप उसको याद के तौर पर संभाल कर रखें। लेकिन कुछ हॉस्पिटल्स में इसके लिए अलग से पैसे पड़ते हैं सो आप को चित्र के लिए पहले बोलना होगा।

अल्ट्रासाउंड स्कैन करने का कारण ?

 

 

अल्ट्रासाउंड स्कैन आपके शिशु के

1. शारीरिक विकास को समझने में मदद करता है।

2. आप गर्भ में कितने बच्चे हैं यह भी पता चलता है।

3. पहले स्कैन में बच्चे का लिंग पाटा नहीं चलता।

4. आपके शिशु की हृदय गति है या नही।

5. एक्टोपिक प्रेगनेंसी जिसमे शिशु गर्भ के बाहर डिंबवाही नलिका(फैलोपियन ट्यूब) में विकसित होता है।

6. आपके रक्त स्त्राव का कारण जान सकें।

7. आपकी प्रसूति की दिनांक बताई जा सके।

8. शिशु की पोज़िशन जांचने के लिए।

9. आपके शिशु के शरीर के अन्य अंग का सामान्य विकास है यह जानने के लिए।

10. आपके गर्भ में पर्याप्त एमनियोटिक फ्लूइड है की नही।

अल्ट्रासाउंड स्कैन किन तिमाही में करवाना चाहिए ?

 

पहली तिमाही में स्कैन से आपके बच्चे की ह्रदय गति और सर,पेट के आस-पास के अंदरूनी हिस्से व हाथ पेर्रों का विकास सामान्य है या नहीं यह पता चलेगा। इसके बाद दूसरी व तीसरी तिमाही में भी एक स्कैन करवा लेना चाहिए। आपके स्त्री-रोग विशेषज्ञ आपको जिस दिन बुलाएं आपको उनके बताये शेडूल को फॉलो करना चाहिए।

आपका पहला स्कैन गर्भधारण के बाद 10 से 13 हफ़्तों व 6 दिन के बीच होना चाहिए। इससे आपकी प्रसूति दिनांक तय करने में मदद मिलेगी। ये स्कैन तभी किया जाता है अगर आपको दर्द या योनि से रक्त स्त्राव हो रहा होता है।

दूसरी तिमाही में 18 से 20 हफ्ते व 6 दिन के बीच परीक्षण होना चाहिए। इससे आपके बच्चे के विकास का पता चल जायेगा। अगर आपका प्लासेंटा आपके गर्भाशय में काफी निचले भाग में स्थित है तो आपको 32वे हफ्ते में जाँच करवानी होगी। ज़्यादातर मामलों में देखा गया है कि 32वे हफ्ते तक प्लेसेंटा सही जगह पर आ जाता है।

आपको तीसरी तिमाही में 28वे से 40वे हफ्ते के बीच परीक्षण करवाना होगा। ऐसा आपको तब करवाना होगा अगर:

पहले आपने छोटे बच्चे को जन्म दिया हो।

आपके जुड़वा बच्चे हैं

आपको मधुमेह या हाई बी.पी है

अगर आपका शिशु सामान्य से कई गुना बड़ा है

क्या अल्ट्रासाउंड स्कैन सुरक्षित है ?

जी हाँ। वर्षोँ से स्कैन किया जा रहा है और उनसे कोई हानि नहीं हुई है। ध्यान रहे उसे करने वाला एक अनुभवी सोनोग्राफर हो । साथ ही साथ आप ठोस कारण पर ही प्रेगनेंसी स्कैन कराएं। जैसे की अगर शिशु को कोई गंभीर रोग होने का खतरा है तब या फिर अगर माँ को बच्चे के जन्म से कोई तकलीफ होगी, ऐसे हालातों में ही अल्ट्रासाउंड स्कैन कराएं।

अल्ट्रासाउंड स्कैन कैसे किया जाता है ?

सोनोग्राफर आपके पेट पर एक जेल लगाएगा। उसे वो एक मेटल डिवाइस यानि ट्रान्सडूसर से आपके शरीर पर समान रूप से फैलाएगा। इससे आपकी त्वचा ध्वनि तरंगो को आसानी से पार होने देंगी।

अल्ट्रासाउंड स्कैन से पहले आप खूब सारा पानी पिएं जिससे आपका मुत्राशय बड़े आकर का हो जायेगा और उससे पार होने वाली तरंगें आपके सोनोग्राफर को साफ़ चित्र पाने में मदद करेंगी। अगर आप गर्भावती होने के कुछ समय में स्कैन करवा रही हैं तो शायद आपका बच्चा पेडू में हो सकता है। ऐसे में आपको योनि स्कैन कराना पड़ेगा। इस से आपके बच्चे की साफ़ छवि मिलेगी।

योनि स्कैन से जुडी बातें

योनि के लिए विशेष ट्रान्सडूसर आता है जो योनि के अंदर डाल दिया जाता है। सोनोग्राफर उसपर कंडोम जैसा कवच डालेंगे जिसपर ढेर सारा जेल लगाया जायेगा। इससे वह योनि में आसानी से जा सकेगा। इसे योनि में बहुत अंदर नहीं डालना होता और शीशु को क्षति नहीं होती।

क्या अल्ट्रासॉउन्ड स्कैन से दर्द होता है ?

नहीं। ट्रान्सडूसर के आपको छूने पर आपको हल्का दबाव महसूस होगा। अगर ज़्यादा दर्द हो तो सनोग्राफर को बोल दें।

अगर अल्ट्रासॉउन्ड स्कैन में कुछ नकारात्मक दिखे तब क्या करें ?

अगर आपकी रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ी दिखाई देती है तो चिकित्सक से परामर्श करवायें। वे आपको इसका सही हल ढून्ढ कर देंगे।

 

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