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तो इन वजहों से डिलिवरी के बाद भी रोती है महिलाएं


 माँ बनना हर महिला के लिए एक बहुत अच्छा और खुशनुमा एहसास है लेकिन इसी एहसास के साथ महिलाओं के लिए कई कठिनाईयां भी आती है। बहुत बार ऐसा होता है की महिलाएं कुछ ऐसी चीज़ें फील करती हैं जिसे वो सबको बताने में शर्मिंदगी महसूस करती है। इन्हीं कारणों से उन्हें बेचैनी होती है और वो चुपचाप बिना किसी से ये बातें शेयर किये हुए रोती रहती है। आज इस ब्लॉग के ज़रिये हम ऐसी ही कुछ बातें शेयर कर रहे हैं जो गर्भावस्था और प्रसव के बाद भी महिलाओं को रुलाती है।

1. डिलीवरी का डर

 

 गर्भावस्था के दौरान हर महिला को एक डर जो सताता है वो है उनकी डिलीवरी का। वो हमेशा इस उलझन में रहती हैं की उनकी नॉर्मल डिलीवरी होगी या सी-सेक्शन क्यूंकि ज़्यादातर महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी के ही फेवर में रहती हैं हालांकि इससे होने वाला दर्द भी असहनीय होता है लेकिन वक़्त के साथ नॉर्मल डिलीवरी में महिला जल्दी रिकवर कर जाती है। लेकिन वही बात जब सी-सेक्शन की आती है तो भले ही महिला उस वक़्त नॉर्मल डिलीवरी जितना दर्द ना महसूस करे लेकिन सी-सेक्शन का बहुत ज़्यादा प्रभाव डिलीवरी के बाद तक रहता है और इससे उभरने में भी महिला को बहुत ज़्यादा वक़्त लग जाता है। कई बार यही चिंता ना सिर्फ गर्भवती महिला को डराती है बल्कि रुलाती भी है।

2. डॉक्टर और नर्स की बातों पर गुस्सा

  डिलीवरी के दौरान कई महिलाएं दर्द के वजह से बहुत ज़्यादा चिल्लाती है और इसी वजह से बहुत बार डॉक्टर भी उनपर थोड़ा सख्त हो जाते है जिस कारण भी कभी-कभी महिलाएं डर जाती है। इसके अलावा डिलीवरी के बाद जब महिला पहली बार अपने शिशु को स्तनपान कराती है तो शिशु ठीक से स्तनपान नहीं कर पाते और ऐसे में नर्स आगे आकर नयी-नयी माँ बनी महिला की स्तनपान वाली जगहों को दबाकर दूध निकालने की कोशिश करती है जो की नयी माँ के लिए ना सिर्फ कष्टदायी होता है बल्कि उन्हें काफ़ी शर्मिंदगी भी महसूस होती है जिसे वो सबके साथ शेयर नहीं कर सकती। यह कहीं ना कहीं महिला के दर्द और असहजता को बयां करता है।

3. घरवालों की प्रतिक्रिया

  नयी माँ जब हॉस्पिटल से घर आती है तो उन्हें कई तरह की बातें बताई जाती है, इसके अलावा ससुराल वाले बार-बार शिशु की तुलना पिता से करते हैं जो की बहुत बार नयी माँ को बुरी लगती है। इसके अलावा कई बार शिशु का पूरा ध्यान माँ को रखने के लिए कहा जाता है जबकि यह माता-पिता दोनों की बराबर ज़िम्मेदारी है लेकिन ऐसा ना होते हुए महिला को ही कहा जाता  है उनके शिशु का ध्यान रखने के लिए जो की नयी माँ के लिए ना सिर्फ मुश्किल है बल्कि उन्हें थोड़ा बुरा भी लगता है। नयी-नयी माँ बनी महिला के लिए सबकुछ संभालने में थोड़ा वक़्त ज़रूर लगता है क्यूंकि उनके लिए यह सब एक नया एहसास होता है और साथ ही साथ उन्हें आराम की भी उतनी ही ज़रूरत होती है। ऐसे में किसी रिश्तेदार का टोकना या कुछ बोलना महिला को काफ़ी दुःख पहुंचाता है।

4. शारीरिक समस्या भी बढ़ जाती है

  गर्भावस्था के वक़्त से ही महिला के अंदर काफ़ी बदलाव आने लगते हैं जैसे उनका वज़न का बढ़ना, शरीर में दर्द की शिकायत होना और यही चीज़ें माँ बनने के बाद तक रह जाती है। सबसे ज़्यादा जो चिंता महिलाओं को सताती है वो है वज़न का बढ़ना और स्ट्रैच मार्क्स होना। यह चिंताएं और परेशानियां उन्हें चारो तरफ़ से घेर लेती है और बहुत बार महिला पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसे समस्या का शिकार हो जाती हैं जिससे वो तनाव में घिर जाती हैं।

5. अचानक से आयी ज़िम्मेदारी

एक बच्चे की ज़िम्मेदारी बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। बहुत बार नयी माँ बनी महिलाओं को इस ज़िम्मेदारी को अकेले उठाना पड़ता है क्यूंकि पति ऑफिस के कामों में व्यस्त होते हैं इसलिए घर को ज़्यादा वक़्त नहीं दे पाते और ऐसे में महिला को खुद जब सबकुछ संभालना पड़ता है तो वो घर को और अपनी माँ को बहुत मिस करने लगती है जिस कारण कई बार उनके आँखों से आंसू छलक जाते है।

किसी भी महिला के लिए माँ बनना एक खुशनुमा पल होता है लेकिन इसके साथ ही साथ उनपर अचानक आयी ज़िम्मेदारियों को निभाना भी एक मुश्किल काम होता है इसलिए यह बहुत ज़रूरी है की उनके साथ जो हैं वो उन्हें समझें, उनका साथ दें और उनके साथ ज़िम्मेदारियों को बांटे। 

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