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तो इस वजह से नॉर्मल डिलिवरी से ज्यादा होती हैं सिज़ेरियन डिलिवरी !

चूंकि आजकल सिज़ेरियन डिलिवरी का चलन बहुत ज्यादा बढ़ गया है तो ऐसे में गर्भावस्था में हर महिला के दिमाग में एक सवाल सबसे ज्यादा घूमता है कि आखिर उनकी नॉर्मल डिलिवरी होगी या सिज़ेरियन डिलिवरी।

 हालांकि सिज़ेरियन डिलिवरी का फैसला लेना कोई आसान बात नहीं होती। कुछ महिलाओं को कॉम्पलिकेशन के चलते सिज़ेरियन डिलिवरी करवानी पड़ती है। लेकिन वहीं कुछ महिलाएं डिलिवरी के दौरान होने वाले दर्द से बचने के लिए सिज़ेरियन डिलिवरी का सहारा लेती हैं। मेट्रो सिटीज़ में तो सिज़ेरियन डिलिवरी का चलन तेज़ी से बढ़ता जा रहा है।

आज हम इसी मुद्दे पर बात करेंगे कि आखिर क्यों दिन-ब-दिन सिज़ेरियन डिलिवरी का चलन बढ़ता जा रहा है...

 नहीं करतीं वर्कआउट

 

 बहुत सी ऐसी महिलाएं होती हैं जो गर्भावस्था के दौरान फिज़िकल एक्टिविटी नहीं करतीं। इस वजह से उनका वज़न और बढ़ जाता है। उनके फिजिकल वर्क ना करने के कारण से भी बेबी के आगे का भाग का ठीक से विकास नहीं हो पाता जिस कारण डिलिवरी में परेशानी आती है और सिज़ेरियन का सहारा लेना पड़ जाता है।

 नहीं कर पातीं दर्द बर्दाश्त

 वहीं कुछ महिलाएं इसलिए सी-सेक्शन का सहारा लेती हैं क्योंकि वो नॉर्मल डिलिवरी के दौरान हुए दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पाती हैं। इसके अलावा कुछ लोगों को एक खास दिन पर ही बच्चा चाहिए होता है जिस कारण वो डिलिवरी डेट से पहले सिज़ेरियन का सहारा लेकर डिलिवरी करा लेते हैं।

नेशनल फैमिली हेल्थ के सर्वे

 

 नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के सर्वे में भी ये बात सामने आई है कि एक ओर जहां सरकारी अस्पतालों में 10 प्रतिशत सिजेरियन डिलीवरी होती है, वहीं प्राइवेट अस्पतालों में 31.1 प्रतिशत सिजेरियन डिलिवरी होती है।

क्या है इसके पीछे कारण?

NFHS-4 के अनुसार, हेल्थ सर्विस में निजीकरण के बढ़ते दबदबे और ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में भी सिज़ेरियन के मामले बढ़ रहे हैं। यही नहीं, सर्वे में यह भी पाया गया कि जिन राज्यों में साक्षरता दर ज्यादा है वहां पर सिज़ेरियन के ज़रिये ज्यादा डिलिवरी होती हैं।

वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के भी आंकड़ें चौंकाने वाले साबित हुए। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, 2010 तक देश में सिर्फ 8.5 प्रतिशत सिज़ेरियन डिलिवरी हुई थीं जिनमें सरकारी और प्राइवेट अस्पताल शामिल हैं और यह आंकड़े 2015-16 में बढ़कर 17.2 प्रतिशत हो गए। 

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