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स्तनपान से पीरियड में बदलाव

कई नई मायें शंका में डूबी होती है की बच्चे के जन्म के बाद कब उनमें माहवारी शुरू हो जाएगी? पिछले नौ महीने में उनको पीरियड के बिना जीने की आदत हो गई थी की वे अपने शरीर के पुनःनिर्माण से थोड़ी चकित रह जाती हैं। इसलिए इस पोस्ट के माध्यम से आप अपने शारीरिक बदलाव को और बेहतर रूप से समझ पाएंगी।

डिलीवरी के बाद उनकी मासिक धर्म कब से शुरू होगी?

गर्भावस्था के बारे में अच्छी बात यह होती है की महिला को नौ महीने बार बार पैड बदलने की दिक्कत नही होती है। इस झंझट से बचने में जो राहत मिलती है, महिला उसको भूल नही सकती। परन्तु इस बात का ध्यान रखना होगा के आपके पीरियड आपके शिशु को जन्म देने के बाद कभी भी शुरू हो सकते हैं। इसके लिए कोई पक्की निर्धारित तारीक नहीं होती। हर महिला का शरीर उसके अनुसार से सुचारु होता है।

स्तनपान से पीरियड अधिकतम 7 से 8 महीने के लिए टल सकता है। कुछ महिलाओं में पीरियड शिशु के जन्म के दो महीने बाद से भी शुरू हो सकता है। कुछ भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं। बस समय दीजिये खुद को और अपने शरीर को ताकि वह पुनः काम करे।

1. अगर आपका शिशु आपके स्तनपान ग्रहण करके लम्बे समय तक के लिए सो जाता है तो इसका मतलब है कि आपके पीरियड निकट हैं।

2. जब आपका शिशु ठोस भोजन ग्रहण करने लगे तो इसे भी संकेत मान लें आपके पीरियड निकट होने का।

कभी-कभी स्तनपान के दौरान आपको खून के दाग-धब्बे नज़र आ सकते हैं। यह सामान्य है। दाग धब्बे कभी भी आ सकते हैं और इसकी कोई दिनाक निश्चित नहीं होती है।

स्तनपान के बाद का पहला पीरियड कैसा होता है?

वैसे तो पीरियड का अनुभव हर महिला में भिन्न होता है,परन्तु इसकी स्थूलता सबमें समान होती है।

जन्म के फौरन बाद जो खून आता है उसे postpartum bleeding कहते हैं। यह महिला के बदन का अनचाहा रक्त होता है। यह सबमें होता है। यह गाढ़े लाल रंग का होता है और आपके मासिक स्त्राव से अधिक होता है।

सामान्य तौर पर एक सैनिटरी पैड आपको 4 घंटे तक मदद दे सकता है परन्तु अधिक रक्त स्त्राव होने पर आप फिर से पैड बदल सकती हैं।

मासिक स्त्राव में होने वाले बदलाव

शिशु के जन्म के बाद आपकी योनि से जो रक्त बहेगा उसका रंग भी बदलता है। पहला उसका रंग गहरा लाल होता है, बाद में हल्का पड़ता जाता है और अंत में हल्का भूरा भी हो सकता है। इसके बाद स्त्राव का रंग हल्का पीले से सफ़ेद हो जायेगा। अंतिम चरण में स्त्राव खून नहीं बल्कि एक अन्य चीज़ में बदल जायेगा जिसे लोचिया (lochia) कहते हैं। धीरे धीरे यह स्त्राव रुक जायेगा और आपके बदन से कोई भी स्त्राव नही होगा। ज़्यादातर महिलाओं में स्त्राव से तेज़ गंध आती है।

वैसे तो जन्म के बाद का स्त्राव एक हफ्ते में ख़त्म हो जाना चाहिए परन्तु घबराइये नहीं अगर यह थोड़ा लम्बा चले क्योंकि हर महिला का बदन भिन्न होता है।

डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत तब पड़ती है जब आपको स्त्राव के दौरान दर्द या दिक्कत हो, खून के थक्के गिरें, या चक्कर आता है।

स्तनपान का आपके शरीर पर असर:

स्तनपान आपके शरीर की ग्रंथियों को संकेत देता है। जब शिशु आपका निपल चूसता है तो आपके शरीर में प्रोलैक्टिन पैदा होकर रक्त में प्रवाहित होता है। प्रोलैक्टिन तब तक निकलता रहेगा जब तक आप शिशु को स्तनपान करायेंगी। प्रोलैक्टिन आपकी बॉडी को ovulate करने से रोकता है। मतलब आपके डिंबग्रंथि से अंडा नहीं निकलेगा और अंततः आपको पीरियड नही होगा।

पीरियड्स आने के बाद भी आप शिशु को स्तनपान करा सकती हैं तथा माँ के दूध का स्वाद बिगड़ता नही है। माँ का दूध माहवारी के बावजूद पूर्ण रूप से सुरक्षित होता है।

पीरियड्स चालू होने के साथ माँ का दूध पैदा होना कम हो जाता है। यह अस्थायी है और कुछ दिनों में सामान्य हो जाता है। कहने का मतलब है की जैसे आपकी माहवारी निश्चिन्त हो जाएगी उसी प्रकार स्तन का दूध भी निश्चित हो जायेगा। यह सब सिर्फ बदन के बदलते हॉर्मोन लेवल का कारण होता है।

आपके मन में कोई प्रश्न हो तो उसे कमेंट में लिखना न भूलें। इस पोस्ट को शेयर करने से कई महिलाओं का लाभ होगा तो इसे ज़रूर शेयर करें।

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