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स्तनपान और डायबिटीज़: क्या आपको इनके संबंध के बारे में पता है?


नई मां के लिए स्तनपान कराना आनंददायक अनुभव होता है। आपके नन्हे मुन्ने को आवश्यक पोषण प्रदान करने के साथ ही ,यह आपको व्यक्तिगत फ़ायदे जैसे हर बार पांच सौ कैलोरी घटाकर आपको स्वस्थ रखना, अच्छे हार्मोन छोड़ना, कैंसर के जोख़िम और साथ ही टाइट-2 डायबिटीज को कम करना। आगे पढ़े यह जानने के लिए की कैसे।

गेस्टेशनल डाइबिटीज तेजी से आम हो रहा है, यहां तक की जिन महिलाओं का जीवन में कभी भी उच्च ब्लड शुगर लेवल नहीं रहा है, उनमें गर्भावस्था के दौरान गेस्टेशनल डाइबिटीज का ख़तरा विकसित हो रहा है। अप्रबंधित गेस्टेशनल डाइबिटीज गर्भावस्था के बाद टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकता है। टाइप-2‌ डायबिटीज में,आपका शरीर पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है या यह इंसुलिन का विरोध करता है, जिसका अर्थ है की शुगर लेवल बढ़ता है और यह कई समस्याओं का कारण बन सकता है जैसे हृदय रोग, किडनी संबंधी बीमारियाँ और गंभीर स्थिति में अंगच्छेदन भी हो सकता है।

 

 

स्तनपान कराने वाली माताओं पर किए गए अध्ययन ने दर्शाया है की स्तनपान इंसुलिन के प्रति उनके शरीर की प्रतिक्रिया को बदलता है, यह इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाता है, जिसका मतलब है की तेजी से ग्लूकोज को मेटाबोलाइज करना।

इस अध्ययन में विभिन्न जाति की पृष्ठभूमि वाली 1000 माताओं पर ध्यान दिया गया है और गर्भावस्था के दो साल बाद तक उनका शुगर लेवल जांचा गया है और यह निर्धारित किया गया है की जो महिलाएं विशेष रूप से स्तनपान कराती है उनमें बल्ड शुगर लेवल बढ़ने की आधी संभावना थी और आखिरकार उनमें टाइप-2 डायबिटीज विकसित हो गया।

स्तनपान कराने वाली कई माताओं जिन्हें पहले से ही डायबिटीज था( हालांकि, अगर आपको डायबिटीज है,तो भी स्तनपान कराना सुरक्षित है) उन्होंने पाया की उन्हें अपने ब्लड शुगर लेवल को ठीक रखने के लिए इंसुलिन की कम मात्रा की जरूरत है। तो यह एक अन्य उदाहरण था की स्तनपान और मधुमेह कितने बारीकी से संबंधित है।

डायबिटीज़ का खतरा इस बात पर भी निर्भर करता है की मां कितने लम्बे समय तक स्तनपान कराती है। दो महीने के अंतराल तक स्तनपान कराने वाली माताओं को डायबिटीज होने की संभावना 50% कम होती है और पांच महीने तक स्तनपान कराने वाली माताएं डायबिटीज से बचकर आगे निकल सकती है। यह स्तनपान के दौरान घटने वाले वज़न की मात्रा से भी जोड़कर देखा जा सकता हैं, क्योंकि मोटापा डायबिटीज होने का मुख्य कारण है।

 

लेकिन हर महिला अनोखी है और हो सकता है कुछ अन्य स्थितियाँ हो जिससे डायबिटीज़ हो सकता है,बेशक वह उचित प्रकार से स्तनपान कराती हों। अगर आप उनमें से है, जिनमें गर्भावस्था के दौरान गेस्टेशनल डाइबिटीज का विकास हुआ है,तो यह समझना आवश्यक है की संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ आप इसे आसानी से संभाव सकते हैं और आप खुशहाल और स्वस्थ गर्भावस्था पा सकते हैं और शिशु को जन्म देने के बाद भी स्वस्थ रह सकते हैं। अपने डॉक्टर से परामर्श लें और अपनी गर्भावस्था को आसानी से पार करने के लिए अपने प्रियजनों से आवश्यक मदद लेने से ना हिचकिचाएं।

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