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आपके अच्छे खास रिश्ते को बिगाड़ सकती है सोशल मीडिया की लत

क्या आपको यह महसूस नहीं होता कि अब आप आमने-सामने कम और हैलो, कैसे है आप? इस तरह की बातचीत ज्यादा करते हैं। सोशल मीडिया ने हमारी जिंदगी को कुछ इस तरह प्रभावित किया है कि हम एक सेकेंड में अनजान के मैसेज का रिप्लाई करते हैं, ‌लेकिन हमारे अंदर किसी से आमने-सामने बैठकर बात करने की हिम्मत नहीं होती।

कुछ ऐसा ही रिश्तों के साथ हो रहा है, यह सोशल मीडिया की दुनिया में दिन-प्रतिदिन बदल रहें हैं। हम सोशल मीडिया पर इतना निर्भर हो गए है कि अगर सोशल मीडिया बंद हुआ, तो हो सकता है दुनियाभर में कई रिश्ते टूट जाएं। यह है कुछ तरीके जिनके द्वारा सोशल मीडिया आपके रिश्तों को प्रभावित करता है।

वास्तविकता की कमी - हम सोशल मीडिया के महासागर में इतनी गहराई में डूब गए हैं कि बाहर निकलने के लिए हमें शायद सभ्यता को ही समाप्त करना होगा। ऐसी स्थिति में रिश्ते प्रभावित होते हैं। दो लोगों के बीच रिश्ता वास्तविक होता है लेकिन जब सोशल मीडिया पर स्टेटस की बात आती है,‌तो आपका क्या स्टेटस है? सिंगल, कमिटिड, ओपन रिलेशनशिप, डिलीवरी, मैरेड, कोम्पलीकेटिड आदि। यह भावनाओं के प्रति असुरक्षा पैदा करता है और अपना स्टेटस बनाने के लिए हम पूछे गए एक विकल्प को अपना लेते हैं। सोशल मीडिया पर जिंदगी की असलियत को खोने ना दें। रिश्ते बहुत निजी होते हैं और उनका आनंद ऐसे ही लिया जा सकता है। सोशल मीडिया को अपने रिश्ते पर भारी ना पड़ने दें।

आपको उपलब्ध बनाना - सोशल मीडिया दुनिया के लिए आपको उपलब्ध कराता है और अभियोक्ता आपके साथ मिलने वाले एक मौके की ताक में रहते हैं। जैसे पुरानी पीढ़ी की उपलब्धता बहुत कम लोगों तक होती थी लेकिन आज ऐसा नहीं है। हमारी पहुंच ज्यादा है और हम हमेशा किसी बेहतर से जुड़ने की खोज में रहते हैं।

हर कोई आपके जीवन पर टिप्पणी कर सकता है - सोशल मीडिया ने लोगों को हर चीज़ और हर बात पर शेयर, टैग, लाइक और कमेंट करने का अवसर दिया हैं। और इससे समस्या होती है। कई लोग भ्रमित हो जाते हैं। और कभी-कभार कोई इसका शिकार बन जाता है। सोशल मीडिया पर जब आप अपने साथी के साथ तस्वीर पोस्ट करते हैं तो लोग उसे लाइक, शेयर और कमेंट करते हैं और जब आप वो तस्वीर हटाते हैं, तो वह आपसे सवाल करने लगते हैं की क्या आप लोग अलग हो गए हैं? इस तरह आप पर और अतिरिक्त तनाव आता है।

जलन और चिंता - इस पर कई सारे अध्ययन किए गए हैं और अधिकांश परिणाम, लगभग सभी मामलों में एक से होते हैं। जो लोग सोशल मीडिया का अधिक उपयोग नहीं करते हैं उनकी तुलना में सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले लोगों में यह अधिक देखा जाता है। इसलिए कहा जाता है कि सोशल मीडिया पर ऐसे मुद्दों को साझा ना करें, जो आपके बहुत ही निजी हैं। लोग बहुत जलन और बेचैनी का अनुभव करते हैं और इससे स्वास्थ्य समस्या भी हो सकती है।

 रिश्तों के आधार पर आपराधिक मामले - ऐसी भी कुछ मामले हैं, जहां रिश्ते कुछ लोगों के लिए आतंक बन गए है। कई बार लोग आपराधिक गतिविधियों के शिकार बन जाते हैं। उन्हें धमकाया, डराया है ब्लैकमेल किया जाता है और कभी कभी इससे भी अधिक किया जाता है। कोई भी सोशल मीडिया की शक्ति को नहीं समझ पाया है यहां पल में रिश्ते बनते हैं और पल में टूटते हैं। इससे जुड़े अन्य कई मामले हैं। अगर आप सोशल मीडिया पर हैं, तो जितना हो सके उतना अपने रिश्तों को निजी रखने की कोशिश करें।

हम सोशल मीडिया और इंटरनेट को धन्यवाद करते हैं लेकिन इसके दुष्प्रभावों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। सुखमय जीवन जीने के लिए सोशल मीडिया लाइफ और असल जिंदगी में सीमा बनाएँ रखें। 

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