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शिशु में दस्त का इलाज कैसे करें

इलाज़ से पहले हमें बीमारी के बारे में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। तो चलिए आगे पढ़ते हैं।

दस्त क्या होता है?

दस्त जिसे अंग्रेजी में डायरिया कहते हैं, का मतलब है, बच्चे को बार-बार पानी जैसे पतले मल होना। यह रोग ज्यादातर 6 महीने से लेकर 2 साल तक के बच्चों को होता है। नवजात शिशु अक्सर मल त्याग करते हैं। यह उनके तरल भोजन के कारण होता है। परन्तु सामान्य से ज़्यादा मल त्याग करना दस्त का संकेत हो सकता होता है।

अगर दस्त का इलाज समय रहते न करें तो यह बढ़ जाता है और अन्य गंभीर समस्याओं को न्यौता देता है। दस्त लगने पर बच्चे के शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स तथा पानी की कमी हो जाती है। उनका रोज़मर्रा की गतिविधियों में मन नहीं लगता साथ ही शिशु चिड़चिड़े हो जाते हैं।

बच्चों में दस्त होने के कारण

बच्चों में दस्त निम्न कारणों से हो सकता है जैसे कि उनके दाँत निकलते समय, बच्चा यदि भोजन करने लगा है तो भोजन न पचने पर या मिर्च-मसाले से भी दस्त लग सकते हैं। बच्चों को वायरस से संक्रमित होने पर भी दस्त लग सकता है। आम तौर पर रोटावायरस और साल्मोनेला नामक बैक्टीरिया बच्चो में संक्रमण फैलाते हैं।

रोटावायरस अंतड़ियों को संक्रमित करता है, जिससे गैस्ट्रोएंटेराइटिस होता है। यह आंत की अंदरुनी परत को क्षति पहुंचाता है। इस क्षतिग्रस्त परत से तरल पदार्थ का रिसाव होता है और पोषक तत्वों का समाहन किए बिना भोजन इसमें से निकल जाता है।

शिशुओं में हरे पीले दस्त कब और क्यों होते हैं?

दाँत निकलते समय बच्चे को हरे-पीले दस्त कभी भी लग सकते हैं। इसका कारण है कि जब बच्चे के दाँत निकलने लगते हैं तो उसे अटपटा लगता है। उसे मसूढ़ों में खुजली होती है इसलिए जो चीज उसके हाथ में आती है वो उसे मुँह में ले लेता है। हर चीज मुँह में लेने से उस चीज की गंदगी शिशु के पेट में पहुँचती है जिसके साथ उससे जुड़े कीटाणु भी पेट तक पहुँच जाते हैं। कीटाणु पेट के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देते हैं जिस कारण पाचन प्रभावित होता है और आँतों द्वारा पतला मल पैदा होने लगता है। इस प्रकार पेट की गड़बड़ी से हरे-पीले दस्त होने लगते हैं।

कुछ लोगों को गलत फहमी होती है कि हरे-पीले दस्त दाँत निकलने की वजह से होते हैं तो वे इसका इलाज ही नहीं कराते और बच्चे की हालत बिगड़ती जाती है। दस्त का कारण पाचन क्रिया खराब होना होता है न कि किसी पोषक तत्व की कमी।

दस्त लगने पर सामान्य उपचार :

1. जब ज्यादा दस्त से बच्चे को उल्टी होती है,तब उसके शरीर में पानी, नमक और सोडियम की कमी हो जाती है। इस कमी से बचने के लिए बच्चे को नमक और चीनी का घोल बनाकर दिन में 2-4 बार पिलाते रहना चाहिए।

2. जब तक शिशु 6-7 माह का न हो जाए तब तक कोई अच्छा ग्राइप वाटर सुबह शाम तक पिलाना चाहिए। इससे बच्चे के पेट में मरोड़ नहीं उठता और पाचन क्रिया अच्छी रहती है।

3. बच्चे को पतले दस्त होने पर दूध बंद करने की जरूरत नही है। दूध हमेशा उबाल कर ठंडा करके पिलाना चाहिए और दूध या पानी हमेशा कटोरी-चम्मच से पिलाना चाहिए।

4. दस्त के समय बच्चे को भोजन देना जारी रखें, शिशु हो तो स्तनपान जारी रखें। बच्चे के भोजन में बदलाव कर देना चाहिए जैसे कि पतली खिचड़ी में दही मिलाकर देना और केले को अच्छी तरह से पीसकर देना।

5. बच्चे को नीबू का पानी, छाछ, नारियल का पानी, चावल का मांड, लाइट चाय देते रहें। ओ.आर.एस(ORS) का घोल भी देते रहें।

उपरोक्त वर्णित जानकारी घरेलू चिकित्सा के अंतर्गत आती है। बच्चे के दस्त के समय जरा भी लापरवाही न बरतते हुए तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

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