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शिशु में चिकनगुनिया के लक्षण और इलाज

 एक ममता से भरी माँ को शिशु सम्बंधित जानकारी होना भी उतना ही आवश्यक होता है जितना की बीमारी से बचने के लिए उपचार। क्योंकि बीमारी का ज्ञान उसे शिशु में होने वाले रोग से बचाव में मदद करेगा। यही फर्क होता है एक अच्छी और एक बेहतरीन माँ में। वह शिशु को स्नेह के साथ-साथ मुसीबतों और रोगों से भी दूर रखती हैं। हम अपने सभी पाठकों को चिकनगुनिया नामक बीमारी के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे ताकि आप समय रहते शिशु का बचाव और इलाज कर सकें।

चिकनगुनिया क्या होता है?

चिकनगुनिया एक वायरल बुखार है। एडीज एजिप्टी(aedes aegypti) नामक मच्छर के काटने से ये वायरस शरीर में घुस जाता है। एडीज एजिप्टी को पीले बुखार का मच्छर भी कहते हैं। चिकनगुनिया बीमारी सीधे एक मनुष्य से दुसरे मनुष्य में नहीं फैलती लेकिन एक बीमार व्यक्ति को एडीज मच्छर के काटने के बाद फिर स्वस्थ व्यक्ति को काटने से फैलती है।

सामान्यतः ये मच्छर दिन में ही काटता है इसलिए दिन में काटने वाले मच्छर से बचकर रहना चाहिए क्योंकि इसके काटने से गंभीर और खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं। चिकनगुनिया बुखार से जान जाने का खतरा नहीं होता।

चिकनगुनिया के लक्षण:

चिकनगुनिया वायरस शिशु के शरीर में प्रवेश करने पर उसी प्रकार के लक्षण पैदा करता है, जिस प्रकार डेंगू रोग करता है। मच्छर के काटने के 2 से 5 दिन के बाद चिकनगुनिया के लक्षण उभरने लगते है। निम्नलिखित लक्षणों पर गौर फरमायें:

1. एक से तीन दिन तक बुखार रहना, जोड़ों में दर्द और सूजन पड़ जाना

2. ठंड और कंपकपी के साथ तेज़ बुखार और खांसी आना

3. त्वचा का खुश्क पड़ना

4. सिर और बदन में दर्द होना

5. उल्‍टी होना

6. आँखों मे दर्द होना

7. नींद ना आना

8. भूख कम लगना

9. जी मिचलाना

10. हाथों एवं पैरों पे चकते पड़ना

11. कुछ लोगों के मसूड़ों और नाक से खून का निकलना

आमतौर पर ये लक्षण 5 से 7 दिन तक रहते हैं। लेकिन रोगी को जोड़ों में दर्द लंबे समय तक रहता है। इस रोग में नवजात शिशु, बूढ़े लोग जिनकी उम्र 65 साल या अधिक है और ऐसे लोग जिनको डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी हो ज़्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

 चिकनगुनिया के बचाव एवं उपचार

चिकनगुनिया होने पर डॉक्टर से जाँच करवायें। वैसे इस बीमारी से बचाव के कुछ घरेलू उपचार भी हैं क्योंकि इस बीमारी को ठीक करने की ज़्यादा दवाईयाँ उपलब्ध नहीं है। कोई टीका यानि वैक्सीन नहीं बना है, जो बीमारी होने के पहले ही लगा दिया जाए और यह बीमारी हो ही ना।

इलाज में चिकित्सक लक्षणों को कम करने का प्रयास करते हैं। शिशु को जल्दी स्वस्थ्य बनाने के लिए आप यह उपचारे आज़मायें:

1. भरपूर गुनगुना पानी पीएं, जिससे शिशु की रोग-प्रतिरोधक शक्ति मजबूत बने।

2. दूध- दही या अन्य चीजों का सेवन करें।

3. नीम के पत्तों का रस निकालकर शिशु को दें।

 

4. रोगी शिशु के कपड़ों एवं बिस्तर की साफ-सफाई पर ध्यान दें।

5. पपीता व करेला अधिक से अधिक बनायें और परोसें।

6. अपने घर के अंदर और आस-पास हमेशा सफाई रखें।

7. घरों या अपने आसपास की जगह में पानी जमा न होने दें।

8. घरों में कूलर को समय – समय पर साफ करें। अगर ऐसा न हो पाए, तो आप सप्‍ताह में एक बार पेट्रोल डाल सकते हैं।

9. सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।

10. पूरे कपड़े पहने और हमेशा खुद को और शिशु को ढ़ककर घर से निकलें।

11. बाहर का खुला खाना या पानी पीने से बचें।

12. शाम होते ही खिड़की-दरवाजों को बंद रखें, ताकि मच्छर घर में प्रवेश ना कर पायें।

किसी को ये रोग हो जाने पर उसके साथ रहने वाले लोगों को ये रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए अगर आप के आस पास या घर में कोई चिकनगुनिया का रोगी हो तो मच्छर से बचाव का ख़ास ध्यान रखें, खासकर दिन के समय। बारिश के मौसम में अपने घरवालों का ध्यान रखें।

वैसे भी इस महीने देश के कई हिस्सों में बारिश हो रही है तो इस पोस्ट को शेयर करके आप किसी की जान भी बचा सकती हैं।

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