Link copied!
Sign in / Sign up
9
Shares

एक शिशु कुछ इस तरह मज़बूत बनाता है पति-पत्नी के रिश्ते को


शिशु के जन्म के बाद आपकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। इसके लिए पहले से तैयार रहने वाले दंपत्ति भी अपने आप को अलग ही तरह की चुनौतियों में फंसा पाते है। इसलिए यह आवश्यक है कि वह पहले से तय करें और सौ प्रतिशत सुनिश्चित हो जाएं कि वह शिशु के लिए पूरी तरह तैयार है। यहां हमने सौ प्रतिशत इसलिए कहा क्योंकि जब आप माता-पिता बनने का फैसला लेते हैं तो कुछ दोस्त और रिश्तेदारों की इसपर मिली-जुली प्रतिक्रिया होती है। कुछ आपको बताते हैं कि इससे कितनी दिक्कतें खड़ी हो सकती है और कुछ बताते हैं कि आप पर बहुत जिम्मेदारियां आ जाती है और कुछ इसे जिंदगी का सबसे ख़ास एहसास कहते हैं। और यह बात याद रखें कि यह सभी बातें पूरी तरह सच है। हालांकि तैयारी और चेतावनी जो भी हो, हर शिशु भिन्न होता है और उनकी प्रतिक्रिया भी जाहिर तौर पर अलग-अलग होती है।

सवाल यह उठता है कि शिशु का जन्म आपके रिश्तों को मजबूत करता है या कमजोर करता है? इसका जवाब हां भी है और न भी। शिशु के जन्म के बाद अलग-अलग स्थितियों में आप दोनों की परीक्षा होती है। लेकिन कुछ तरीके हैं जिनके माध्यम से आप सुनिश्चित कर सकते हैं कि शिशु के आने से आप दोनों के रिश्ते में खटास न आए। लेकिन यह कैसे संभव है?

यह हैं कुछ सुझाव जिनके माध्यम से आप और आपका साथी डायपर बदलते हुए, थकान, हार्मोनल बदलाव और मूड स्विंग के बीच भी अपने रिश्ते को मजबूत कर सकते हैं।

सही फैसला

शिशु को जन्म देने का निर्णय आपको आपसी समझ से लेना चाहिए। अगर आप दोनों ज़िम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं तो यह काम आपके लिए मुश्किल नहीं होगा। अगर आप में से कोई एक तैयार नहीं है, तो इंतजार करें। अपने फैसले अपने साथी पर न थोपें और न ही बहस में पड़े क्योंकि अगर आपको लगता है कि शिशु के जन्म से सबकुछ ठीक हो जाएगा, तो हो सकता है कि यह फैसला ग़लत हो।

उम्मीद

यह सच है कि परवरिश का सफर सभी के लिए अलग-अलग होता है। लेकिन कुछ आम चीजें हैं जिनसे सभी माता-पिता को गुजरना पड़ता है। रूटिन में बदलाव, सोने के समय में बदलाव और अधिक सामाजिक न हो पाना। इन कुछ बदलावों को स्वीकार करने के लिए यह आवश्यक है कि आप अपने आप को दिमागी रूप से तैयार करें। यह सफर इतना आसान नहीं होगा, आनंद के साथ-साथ तनाव का भी समय आता है। आपको दोनों को संभालना आना चाहिए।

टीम वर्क

यह सबसे बेहतर होगा अगर आप और आपका साथी यह पहले ही समझ जाए। शिशु को जन्म देने और उसका पालन-पोषण करने की ज़िम्मेदारी सिर्फ मां की नहीं है। आप दोनों को एक-दूसरे की मदद करनी होगी। आप दोनों को योजना बनाकर सारा काम बाँटना होगा ताकि आपको अपने लिए भी पर्याप्त समय मिले और किसी एक पर सारा बोझ न पड़े। पहली बार माता-पिता बनने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थकान होती है। जब महिला का शरीर सामान्य होने लगता है तो उन्हें अधिक आराम, पौष्टिक आहार और शांत माहौल की जरूरत होती है। यह भी एक बेहतर विचार होगा अगर आप हाथ बंटाने के लिए एक नैनी को नियुक्त करें।

एक-दूसरे को समय दें

यह सच है कि पहली बार माता-पिता बनने वाले लोग इतने अभिभूत होते हैं कि उन्हें अपने शिशु के अलावा और कोई नज़र नहीं आता है। जैसे कि और किसी चीज़ से उन्हें कोई फर्क न पड़ता हो। लेकिन यह अच्छा संकेत नहीं है। यह भी उतना ही आवश्यक है कि आप दोनों एक-दूसरे के लिए समय निकालें और डिनर या फिल्म देखने बाहर जाएं। ज्यादा कुछ संभव न हो तो कुछ समय बाहर जाएं और अपने शिशु के बारे में न सोचें। इसके लिए आपको शर्मिन्दा होने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह आपके रिश्ते के लिए जरूरी है। अधिकतर पुरूषों को यह अच्छा नहीं लगता है जब उनकी पत्नी सारा ध्यान शिशु पर देती है और उनको किनारे कर देती है। दूसरी ओर महिलाएं इतनी थकी हुई होती है और उनमें ऐस्ट्रोजन का स्तर इतना कम होता है कि इंटरकोर्स पर उनका ध्यान ही नहीं जाता है। उन्हें जब भी समय मिलता है, तो वह सोना पसंद करती है।

नया दृष्टिकोण

शिशु के शुरुआती महीने शिशु और माता-पिता दोनों के लिए कठिन होते हैं। थोड़ा समय निकालें और ध्यान दें कि आपके साथी बिल्कुल नए कामों में लगे हैं जैसे कि डायपर बदलना और शिशु को स्तनपान कराना। एक-दूसरे के कामों की सराहना करें। ऐसी भी कुछ दंपत्ति हैं जिनका कहना है कि अपने साथी को अच्छी तरह ज़िम्मेदारी संभालते हुए देखने से उनके मन में उनके लिए और प्यार बढ़ गया है।

बात करें

यह आवश्यक है कि आप और आपका साथी नयी ज़िम्मेदारी और डर के बारे में एक-दूसरे से खुलकर बात करें। यह न सोचें कि कोई आपके बिना कुछ कहे ही सब समझ जाएगा। पहली बार माता-पिता बनने वाले लोगों की जिंदगी में अनेकों बदलाव आते हैं और इसलिए आवश्यक है कि आप दोनों बातचीत करें और एक-दूसरे को समझें कि आप किन बदलावों से गुज़र रहे है। इस तरह आप दोनों के लिए यह संभालना आसान होगा।

शिशु तनाव दूर करते हैं

यह सच है कि आपका दिन कितना भी मुश्किल भरा क्यों न हो, आखिर में अपने शिशु का हंसता हुआ चेहरा देखकर, आप सब भूल जाते हैं। साथ ही शिशु बहुत ही आसानी से आपकी आवाज़ और तौर तरीकों को सीख जाते हैं और इसलिए आपके उनके सामने बेहतर ढंग से पेश आने की कोशिश करते हैं। ऐसे भी कुछ माता-पिता हैं जो किताबें पढ़ते हैं और वर्क-शॉप लेते हैं ताकि वह अच्छे व्यवहार के साथ शिशु की परवरिश कर सकें। साथ ही आवश्यक है कि आप उदास या परेशान ही क्यों न हो, अपने शिशु को सामने सकारात्मकता बनाए रखें।

अहम भूमिका

पहली बार माता-पिता बनने वाले लोगों के लिए यह एक नया सफर है। एक-दूसरे में होते बदलावों की सराहना करें। क्योंकि आपके पति अब पिता के किरदार में हैं और आप अब एक पत्नी से मां भी हैं। यह आप दोनों के लिए मुश्किल हैं। इसलिए एक-दूसरे का हाथ पकड़कर इस दौर से गुज़रे। तनावपूर्ण होने के बावजूद यह पल आप दोनों की जिंदगी को और मजबूत करेगा।

अगर आप एक-साथ योजना बनाएँगे और मिलकर काम करेंगे, तो शिशु को अपनी जिंदगी में लाना आप दोनों के लिए सुखद होगा। जब-तक आप समय को सही तरह से संयोजित करेंगे तब तक आपको कोई दिक्कत नहीं होगी। अगर आप दोनों साथ मिलकर मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार हैं तो आप दोनों को कोई अलग नहीं कर सकता है बल्कि आपका रिश्ता और मजबूत होगा।

Click here for the best in baby advice
What do you think?
0%
Wow!
0%
Like
0%
Not bad
0%
What?
scroll up icon