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शिशुओं को ज्यादा नींद की जरूरत क्यों होती है? - कब और कितनी?


हम अक्सर सुनते है की शिशु नींद में वृद्धि करते हैं और अधिकतर उनका विकास गहरी नींद में होता है।यह जानने के बाद हम हमने नन्हे मुन्नों को ज्यादातर घंटे सोने देते हैं लेकिन कभी-कभार उनके साथ खेलने के लिए हम उन्हें उठाने की अपनी उत्सुकता को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं।

हर अन्य इंसान की तरह हमारे शिशु को भी नींद की आवश्यकता होती है ताकि उनका मस्तिष्क ठीक प्रकार से कार्य करें। नवजात शिशु नींद के पैटर्न के आदी नaहीं होते हैं उन्हें एक निश्चित पैटर्न विकसित करने में छह हफ्तों का समय लगता है। दो वर्ष की उम्र तक अधिकतर शिशु जागने की अपेक्षा सोने में समय व्यतीत करते हैं। नींद से उन्हें मानसिक और शारीरिक पहलुओं को विकसित करने में मदद मिलती है।

 

हमें बहुत सी बातें पता होती है लेकिन हम उसके पीछे के वास्तविक कारण को जानने की कोशिश नहीं करते हैं। इसी प्रकार, हमारे शिशुओं को ज्यादा नींद की जरूरत क्यों होती है?यह भी हमारे लिए एक रहस्य ही बना हुआ है। सही पोषण और नींद हमारे शिशु के लिए सबसे ज्यादा ज़रुरी चीजें हैं। कुछ नवजात शिशु 18 घंटे की लम्बी नींद लेते हैं।

वह शायद नींद में हो सकते हैं लेकिन उनका दिमाग सचेत होता है। आप उन्हें अक्सर नींद में खेलते, हंसते और चूसते देख सकते हैं। जब शिशुओं को नींद आती है तो वह चिड़चिड़े हो जाते हैं, रोते हैं व आँखें रगड़ते है और परेशानी और तकलीफ के संकेत देते हैं, ऐसी स्थिति में बेहतर होगा की आप बिना देर किए बिस्तर पर सुला देंगे।

नवजात शिशु 16-20 घंटे सोने में व्यतीत करते हैं, इसमें 70% रैपिड आइ मूवमेंट और शेष नान- रैपिड आइ मूवमेंट होता है। इसका अर्थ है की रैपिड आइ मूवमेंट में हमारे शिशु सचेत होते हैं और प्रमुखता सपने में होते हैं वहीं नान-रैपिड आइ मूवमेंट वह वास्तव में गहरी नींद में होते हैं। यह नान-रैपिड आइ मूवमेंट ही उनके मस्तिष्क के उचित विकास को बढ़ाता है।

व्यवहार के संदर्भ में नींद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर आपका शिशु सही प्रकार से सोता है, तो वह पूरी ऊर्जा के साथ उठता है। वह हर समस्या का सामना करने में अधिक तत्परता दिखाते हैं, सावधानी, उत्सुकता और सीखने की क्षमता रखते हैं।

जो शिशु सही प्रकार से सोते हैं, वह अपने माता-पिता को कम परेशान करते हैं और अधिक खुश-हाल रहते हैं। साथ ही इन शिशुओं में मस्तिष्क का विकास सही प्रकार से होता है इसलिए भविष्य में इन्हें कोई समस्या होने की संभावना कम होती है। माता-पिता के लिए एक सुझाव है की तरीके खोजने के लिए कार्ययोजना तैयार करें, इससे उन्हें स्वयं सोने की आदत पड़ती है।

अपने शिशु को सोने के लिए उनके अपने तरीके खोजने दे और उन्हें अपने नींद के पैटर्न के हिसाब से चलने को कहें। उन्हें जल्दी बिस्तर पर जाने के लिए कहें और सही नींद की नियमितता बनाएँ। साथ ही कुछ माता-पिता शिशु के सोने के दौरान उसे भोजन कराने को सुविधाजनक समझते हैं। हालांकि यह करना बहुत खतरनाक है क्योंकि भोजन उनकी श्वास नली में जा सकता है।

जब हम सही नींद के महत्व के बारे में बात कर रहे हैं तो हमें यह भी पता होना चाहिए की हमे अपने बच्चों को ज़बरदस्ती सोने के लिए नहीं भेजना चाहिए,जब वह नहीं बनना चाहते हैं। समय के साथ शिशु के नींद लेने के घंटे विभिन्न कारको से कम हो जाते हैं।

 

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