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शिशु को सुलाते वक़्त कहीं आप भी तो नहीं करती ये गलतियां ?


एक माँ के लिए अपने शिशु को चैन से सोते हुए देखना मानों बहुत ही खुशी की बात होती है क्योंकि भले ही शिशु हमारे और आपके तरह भागादौड़ी नहीं कर सकते, लेकिन पुरे दिन बेड पर पैर फेकना और खेलना ही उनके लिए बहुत मेहनत का काम होता है। ऐसे में अगर रात को शिशु की नींद नहीं पूरी हुई तो वो पूरा दिन चिड़चिड़ाया हुआ रहता है। हर शिशु की नींद की आदतें अलग-अलग होती है, कोई ज़्यादा सोता है तो कोई कम। हालांकि, कई बार बड़ों के वजह से भी शिशु की नींद की आदत खराब होती है, क्योंकि शिशु को शुरुआत से जैसे हम ढालते है वो उसी सांचे में ढल जाते हैं इसलिए ये हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उनको कैसी आदत लगा रहे हैं। बात करें अगर नींद की आदत की तो क्या आपको पता है कि आप शिशु को सुलाते वक़्त अनजाने में ही सही कुछ गलतियां कर बैठती हैं, जिस वजह से उनकी सोने की आदत ख़राब हो जाती है। अगर आपको नहीं पता तो इस ब्लॉग के ज़रिए हम ऐसी ही कुछ बातें आपको बता रहे हैं।

1. हर कमरा आपके शिशु के सोने का कमरा है

जब आपके घर में एक शिशु आता है तो आप क्या देखती हैं कि हर कमरा उसके सोने का कमरा बना हुआ होता है। दरअसल शिशु खेलते रहते हैं और खेलते-खेलते वो जहां कहीं भी सो जाते हैं तो वो कमरा उनके सोने का कमरा बन जाता है, लेकिन यह अच्छी बात नहीं है। माता-पिता को अपने शिशु के सोने का ध्यान रखना चाहिए और शिशु के लिए सोने का एक स्पेशल कमरा रखना चाहिए। जब भी आप देखें कि आपका शिशु सो रहा है या सो गया है तो आप उन्हें उठाकर उनके कमरे में सुला दें ताकि आपके शिशु को शोरगुल से दूर आराम की नींद हो सके। अगर शिशु की नींद नहीं पूरी होती है तो वो चिड़चिड़ाया हुआ महसूस करता है इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि उनकी नींद पूरी हो सके ताकि उनके विकास में कोई बाधा ना आए ।

2. नींद के वक़्त में बदलाव

हर शिशु का सोने का एक सही वक़्त होता है, आप भी अपने शिशु के सोने का वक़्त निर्धारित कर लें और हर रोज़ उस वक़्त ही उसे सुलाए। चाहे कुछ भी हो जाए आप हर रोज़ इस रूटीन को फॉलो करें। कई बार ऐसा होता है कि घर के रूटीन में बदलाव होने के कारण लोग शिशु के सोने के रूटीन में भी बदलाव करने लगते हैं जो कि गलत है, इसलिए अपने शिशु के सोने का निर्धारित वक़्त जो आपने तय कर रखा है उसी के हिसाब से आप अपने और अपने घरवालों को एडजस्ट करने बोलें।

3. शिशु के बेड का रखें ध्यान

हमेशा शिशु के बेड का ध्यान रखें, कई बार देखा जाता है कि माता-पिता दिन के वक़्त शिशु को अपने बेड पर ही सुला देते हैं जो कि गलत है। पहली बात आप उतने बड़े बेड पर शिशु को ना सुलाएं और दूसरी बात अगर आप अपने शिशु को बड़े लोगों वाले बेड पर सुला भी रहे हैं तो ध्यान रहे की बेड साफ़ हो और आप शिशु का छोटा सा बिस्तर तैयार कर दें फिर अपने शिशु को सुलाएं।

4. हर वक़्त शिशु को सुलाने के लिए स्तनपान न कराएं

कई माओं का मानना होता है कि शिशु को स्तनपान कराने से ही उन्हें नींद आती है, लेकिन यह गलत है क्योंकि ये आदत आप खुद लगाती हैं। ज़रूरी नहीं कि हर वक़्त आपका शिशु सोते वक़्त भूखा ही हो इसलिए आप सोते वक़्त शिशु को स्तनपान की आदत ना लगाएं, हाँ जब उन्हें सच में भूख हो तभी उन्हें स्तनपान कराएं। आप सोते वक़्त अपने शिशु को लोरी सुना सकती हैं या सहला भी सकती हैं जिससे उन्हें जल्दी नींद आ जाए।

5. देर से सोना जल्दी उठना

अगर आपका शिशु देर से सोता है और सुबह जल्दी उठता है तो इस आदत को एक-दो दिन के अंदर ही ठीक करें नहीं तो यह आदत आगे जाकर भी आपके शिशु में बनी रहेगी। ऐसे में आप शिशु के शाम के सोने का वक़्त थोड़ा बदलकर देखें और हो सके तो रात में शिशु को जल्दी सुलाने की कोशिश करें और यह तब तक करें जब तक आपके शिशु को इसकी आदत ना लग जाए।

यह सब कुछ आम लेकिन महत्वपूर्ण चीज़ें हैं जिनका ध्यान आपको रखना चाहिए। इसके अलावा कुछ और आदतें हैं जैसे - आप शिशु के साथ सोने की आदत ना लगाएं, कि आप उनके साथ सोने जाएंगी तभी वो सोएंगे, उन्हें घुमा-घुमाकर सोने की आदत ना डलवाएं या झूले में सोने की आदत ना लगवाएं नहीं तो ना सिर्फ आपके शिशु को बल्कि आपको भी परेशानी होगी। 

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