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जानिए कितना सुरक्षित है शिशु को एकतरफ करके सुलाना


एक मां के मन को तभी तसल्ली मिलती है, जब उसका बच्चा खुश दिखे और बच्चे तभी खुश होते हैं, जब उन्हें अच्छी नींद मिलती हैं। इसलिए शिशुओं की अच्छी नींद के लिए मां को यह जानना बेहद जरूरी हैं कि उन्हें किस पॉजिशन में सुलाना चाहिए। नवजात शिशु को सही पॉजिशन में सुलाना और उसकी नींद में बाधा ना पड़ें ये ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, शिशु जितने अच्छे से सोएंगे, उतना उनके स्वास्थय के लिए भी बेहतर होगा। अच्छी नींद के लिए पहले ये जानना ज़रूरी है कि क्या आपका शिशु सही पोज़िशन में सो रहा है कि नहीं और क्या उसे आराम है की नहीं। तो आज इस ब्लॉग के ज़रिये हम शिशु के सही पोज़िशन में ही सोने के बारे में बात कर रहे हैं। 

 

च्चे का सही पॉजिशन में सोना क्यों जरूरी है ?

पहली बार मां – बाप अक्सर जानकारी ना होने के अभाव में ये गलती कर जाते हैं कि बच्चे को कैसे भी सुला देते हैं लेकिन ये बच्चे के लिए बहुत खतरनाक हैं। बच्चे को सही पॉजीशन में ना सुलाने से उसे सडेन इंफेंट डेथ सिंड्रोम हो सकता है। SIDS यानी सडेन इंफेंट डेथ में एक साल तक के बच्चे की बिना किसी कारण से मौत हो जाती है। ये मौत आमतौर पर तब होती है, जब वह सोए हुए होते हैं।

 

क्या बच्चे को एकतरफ सुलाना सही है ?

अगर आपके मन में भी ये सवाल है तो आपको बता दें कि बच्चे को एकतरफ बिलकुल नहीं सुलाना चाहिए। ये बच्चे की सही पॉजिशन नहीं है। इससे SIDS का खतरा बढ़ जाता है।

 

बच्चों में सडेन इंफेंट डेथ सिंड्रोम का खतरा कब तक होता है ?

 

बच्चों में सडेन इंफेंट डेथ सिंड्रोम का खतरा छह महीने तक होता है। सबसे ज्यादा खतरा एक महीने से लेकर चार महीने तक होता है। छह महीने बाद बच्चा खुद ही पलटने लगता है, जिससे यह खतरा कम हो जाता है।

 

सुलाने की सबसे सही पॉजीशन

 

बच्चे को सुलाने की सबसे सही पॉजिशन है पीठ के बल सुलाना। यूएसके नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ और ह्यूमन डेवलपमेंट के अनुसार पीठ के बल होना सबसे अच्छी पोजीशन है। इससे भले ही बच्चे का सिर पीछे से चपटा हो जाता है, लेकिन वह बाद में अपने आप ठीक हो जाता है। पीठ के बल सोने से SIDS का खतरा काफी कम होता है। इसलिए बच्चे को शुरू से ही पीठ के बल सुलाने की आदत डालनी चाहिए।

 

अगर बच्चा बार – बार एक तरफ पलट जाए

- अगर बच्चा खुद ही एक तरफ पलट कर सोता है, तो उसे बार – बार पीठ के बल पर लिटा दें। ऐसा करने से उसे पीठ के बल सोने की आदत हो जाएंगी। इसके अलावा आप सोते हुए अपना हल्का हाथ बच्चों के पैरों के पास रखें।

- बच्चे की बाहों को कभी भी साइड़ में ना रखने दें, इससे बच्चे आसानी से पलट जाएंगे। उनकी बाहों को पेट के पास रखें ताकि वह आसानी से पलट ना पाएं।

 

पीठ के बल सुलाने से बच्चे की सिर का चौड़ा होना

हां, ये बात सही है कि पीठ के बल बच्चों को सुलाने से बच्चों का सिर पीछे से चौड़ा या फ्लैट होने लगता है, जोकि एक सामान्य बात है, इससे बच्चों के पीछे से बाल भी कम उग सकते हैं। हालांकि बच्चों के फ्लैट सिर के लिए आपको किसी उपचार की जरूरत नहीं है क्योंकि जब बच्चा पलटना शुरू करता है तो वह अपने आप ठीक होने लगता है लेकिन फिर भी आप कुछ उपाय अपना कर अपने बच्चे के सिर को चौड़ा होने से बचा सकते हैं।

- जब शिशु सो रहा हो तो उसके सिर की स्थिति को आराम से बदल दें।

- कुछ देर बच्चे को अपनी गोद में सुलाएं।

- हर रात को बच्चे के सिर की पॉजिशन को बदलने की कोशिश करें।

- जब बच्चा जगा हो तो उसके बगल में कुछ आकर्षक खिलौन रख दें, ताकि उन्हें देखने के लिए बच्चा अपने सिर को दोनों तरफ घुमाता रहें।

 

अगर बच्चा पेट के बल सोने लगे

छह महीने में बच्चे पलटने लगते हैं और घुटने के बल चलने की कोशिश करते हैं, इस दौरान वह कई बार नींद में पेट के बल पलट जाते हैं। ऐसे में बच्चे को डिस्टर्ब ना करें। थोड़ी देर उसे पेट के बल सोने दें लेकिन एक मिनट के लिए भी उसे अकेला ना छोड़े और देखें कि उसे कोई तकलीफ ना हो। ज्यादा देर पेट के बल सोने पर खुद ही बच्चे की पॉजिशन बदल दें।

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