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शिशु को कपड़े से लपेटते वक़्त ध्यान रखें इन बातों का

  एक नवजात शिशु बहुत ही कोमल होता है और उसे बहुत ज़्यादा देखभाल की भी ज़रूरत होती है, एक माता-पिता हर वक़्त अपने शिशु का ख्याल रखने के लिए तत्पर रहते हैं। वो अपने शिशु के सेहत के लिए बहुत से चीज़ों का ध्यान रखते हैं। शिशु जब जन्म लेता है तो उसे बाहर के मौसम के साथ खुद को ढालने में थोड़ा वक़्त लगता है और इसलिए उन्हें गर्माहट देने के लिए कई बार लोग उन्हें कपड़े में लपेटकर रखते हैं जो की शिशु के लिए भी काफ़ी फायदेमंद होता है लेकिन कभी-कभी सही तरीक़े से ना लपटने के कारण शिशु को परेशानी भी होने लगती है। इसलिए आज इस ब्लॉग के ज़रिये हम आपको शिशु को लपेटते वक़्त कुछ बातों के बारे में बता रहे हैं जिनका आपको ध्यान रखना ज़रूरी है।

 1. सही कपड़े का रखें ध्यान

शिशु को लपेटने के लिए कपड़े का चुनाव सही ढंग से करें, जो कपड़ा आप अपने शिशु के लिए ले रही हैं उसको आप पहले अपनी त्वचा पर सटाकर देखें की कहीं वो आपको चुभ तो नहीं रहा। इसके अलावा अपने शिशु को लपेटने के लिए हमेशा मुलायम या सूती कपड़े का ही इस्तेमाल करें ताकि उनको आराम महसूस हो।

2. शिशु के कपड़े को करें चेक

शिशु को कपड़े में लपेटने से पहले आप अपने शिशु के पहने हुए कपड़ों को और डाइपर को ज़रूर चेक कर लें की कहीं उनके कपड़े या डाइपर गीले तो नहीं है क्यूंकि बिना देखे अगर आप उन्हें कपड़े से लपेट देंगी तो हो सकता है गीले डाइपर के वजह से उन्हें ठंड या रैसेज़ हो जाए।

 

3. हर वक़्त सर ना ढके

हमेशा याद रखें की सर्दियों में ही आप शिशु के सर को कपड़े से ढके, गर्मियों में ऐसा बिल्कुल ना करें नहीं तो आपका शिशु बीमार भी हो सकता है ।

4. तापमान का रखें ध्यान

शिशु को कपड़े से लपेटने से पहले आसपास का और कमरे के तापमान का भी पूरा ध्यान रखें अगर कपड़े में लपेटने के बाद आपका शिशु रोता है तो इसका मतलब की उसे किसी चीज़ की परेशानी है या उसे गर्मी लग रही है। ऐसे में बिना देर करते हुए आप शिशु को बाहर निकाल लें।

 

5. शिशु को समझें 

शिशु को कपड़े से लपेटते वक़्त हमेशा याद रखें की उनका चेहरा कपड़े से बाहर रहे ताकि उनको सांस लेने में तकलीफ़ ना हो। इसके अलावा अगर शिशु बार-बार पैर -हाथ फेककर कपड़ा हटा रहा है या रो रहा है तो इसका मतलब उसे लपेटा जाना पसंद नहीं और उसे कुछ असुविधा हो रही है। ऐसे में शिशु को बिलकुल ना लपेटें।

6. विकास है ज़रूरी

शिशु का विकास बहुत ज़रूरी है इसलिए एक महीने के बाद शिशु को कपड़े से ज़्यादा लपेटें क्यूंकि यह वक़्त उनके शीरीरिक विकास का होता है और ऐसे में वो जितना हाथ-पैर हिलाकर खेलेंगे उतना उनके लिए अच्छा है और उनके अंगो का विकास होगा इसलिए जितना हो सके शिशु को कपड़े से ना लपेटें।

शिशु बहुत ही कोमल और नाज़ुक होते हैं इसलिए उनका अधिक से अधिक ध्यान रखना ज़रूरी है लेकिन याद रहे की ध्यान रखने के चक्कर में कहीं उन्हें असुविधा ना हो जाए। इसलिए ध्यान रखें लेकिन प्यार और सूझबूझ से। 

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