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शिशु को जन्म देने की विभिन्न अवस्थाएं(posture)

चलने-फिरने और धक्का देने से प्रसव में बड़ी मदद मिलती है। हिलने-डुलने से मस्तिष्ट को संकेत मिलते हैं और वह दर्द को कम करता है। इसका नतीजा यह होता है की आप अधिक सहनशील और शिशु की डिलीवरी का दर्द झेल पाती हैं। साथ ही साथ आप शिशु के जन्म के दौरान होने वाले संकुचन भी सहन कर पाती है।

जब संकुचन बढ़ते हैं तब बदन में से एंडोर्फिन (endorphins) नामक रासायनिक तत्व निकलते हैं जिनमें जादुई गुण होते हैं। इस प्रकार आप तीव्र संकुचन को झेल पाती हैं। अंत में आप ऐसे पड़ाव पर आ जाती हैं जहाँ आप शिशु को सफलतापूर्वक जन्म दे पाती हैं।

कुछ स्थितियों में आपको शिशु को जन्म देने के लिए आरामदायक व सुविधाजनक पोज़िशन का पता लगाना होगा जिसमें आपका शरीर आपका साथ दे सके।

निम्नलिखित पोज़िशन्स से आपको शिशु को जन्म देने में मदद मिलेगी। अपने शरीर की आवाज़ सुनें और उसके अनुसार जो आपको ठीक लगे उस अवस्था में शिशु को जन्म दें।

1. खड़े होते हुए

इससे आपका निचला हिस्सा 15 प्रतिशत खुलता है। आप चाहें तो अपने पति/सहायक की मदद ले सकती हैं। पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण से शिशु का जन्म हो पायेगा और आपको कृतिम माध्यमों की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। इससे आपको कम दर्द होता है।

2. आधा-बैठे

यह आरामदायक होती है। गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से शिशु बाहर आता है। हॉस्पिटल के बिस्तर पर मदद मिलती है। आपको देखने वाले डॉक्टरों को इसमें मदद मिलती है। शिशु की हृदयगति समझने में मदद मिलती है।

3. पूरा बैठना

आराम करने में मदद करती है। अगर शिशु लगातार इलेक्ट्रिक जाँच (मॉनिटरिंग) में है तो इस अवस्था से उसमें कोई बाधा नहीं आती।

4. भारतीय मलत्याग के रूप में बैठना

इस प्रकार शरीर के निचले हिस्से में दबाव बढ़ने के कारण शिशु जल्दी बाहर आता है। इसके साथ ही उसका सर आसानी से घुमाया जा सकता है। लम्बी देर तक इस अवस्था में आपको इस अवस्था में थकान आ सकती है।

5. आधा लेटना

इस अवस्था में आप पीठ और पेट के बल नहीं बल्कि इनके बीच में लेटती हैं। इससे आपके शिशु तक अधिक ऑक्सीजन जा पाता है। यह हाई बी.पी वाली महिलाओं के लिए लाभदायी होती है। epidural लेने वाली महिलाओं के लिए भी यह सुरक्षित अवस्था होती है। इसके साथ ही यह शिशु की तीव्र जन्म गति को धीमा बना सकती है। आप संकुचन के बीच में आराम कर सकती हैं। आप लेबर के दूसरे पड़ाव में आराम कर सकती हैं। इसके साथ ही आपको योनि के आस पास चीरा लगवाने की ज़रूरत भी नहीं पड़ेगी। आपके पति/डॉक्टर भी आपको बच्चे को बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं।

6. चलते हुए

 कई बार महिलाओं को अधिक दर्द होने के कारण चलने के लिए बोला जाता है। हलचल और गुरुत्वाकर्षण होने के कारण शिशु आसानी से बाहर आ जाता है। संकुचन में कम दर्द होता है। इससे पीठ दर्द कम होता है।

7. दीवाल की तरफ झुके हुए

इस अवस्था से शिशु को खिसका के निकाला जा सकता है।

8. घुटनों के बल बैठना

इस अवस्था में आप बर्थ बॉल का इस्तेमाल कर सकती हैं।

9. घुटनों-छाती के बल बैठना

इससे पीठ के बल आप शिशु को जन्म दे सकती हैं। शिशु को घुमाया जा सकता है। पाइल्स/बवासीर की दिक्कत वाली महिलाएं भी इस अवस्था में शिशु को जन्म दे सकती हैं।

10. पीठ के बल, पैर उठे हुए

यह अवस्था में आप गुरुत्वाकर्षण(gravity) के विपरीत भी शिशु को जन्म दे सकती हैं। हालाँकि आपको इसमें योनि/मलमार्ग में छोटे चीरे की ज़रूरत पड़ सकती है।

आपको जिस अवस्था में आराम मिलें उसमें शिशु को जन्म दें और इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें। बाकी माँओं को भी निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

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