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शिशु के गले में कुछ फंसे तो लक्षणों को जानकर ऐसे करें उपाय


कोई भी चीज़ गले में फंसा लेना शिशुओं में परेशानी का सबसे आम कारण है। शिशुओं के अपने आस-पास के वातावरण को रेंगते हुए देखने और जाँचने ,परखने की जिज्ञासा के कारण ही उन्हें कोई भी चीज़ गले में फंसा लेने का ख़तरा बना रहता है। घर या बगीचे में वह छोटी-छोटी चीजों को उठाते हैं, उन्हें छूते हैं, और आखिर में उसे मुंह में डाल लेते हैं। इससे बहुत ही खतरनाक स्थिति उत्पन्न होती है क्योंकि वह इसे निगल सकते हैं और अगर यह गले में फँस जाए तो इससे सांस लेने में दिक्कत होती है और ऑक्सीजन के प्रवाह में अवरोध होता है। तो आइए जानते हैं कि वास्तव में गले में कुछ फँसाने का क्या मतलब है, इसे कैसे पहचाने और इससे शिशु का बचाव कैसे करें?

नवजात शिशुओं में चोकिंग का क्या मतलब है?

चोकिंग का तकनीकी मतलब है कि श्वासनलिका का बंद हो जाना और इससे सांस लेने में दिक्कत होना। आपके गले में दो नलिका होती है:

भोजन नलिका

श्वासनलिका

जो भी खाने पीने की चीजें हम खाते हैं वह भोजन नलिका द्वारा पेट में जाती है। जब हम सांस लेते हैं तो वह श्वासनलिका द्वारा फेफड़ों तक पहुँचती है। चोकिंग का मतलब है कि कोई भी वस्तु या खाद्य पदार्थ को श्वासनलिका में फंसा लेना जिससे हवा की आवाजाही बंद हो जाती है और सांस लेना मुश्किल होता है। बच्चे इसके प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनकी नलिका छोटी होती है और यह आसानी से प्रभावित हो जाता है। अक्सर जो भी भोजन या वस्तु श्वासनलिका में फंसती है, वह खांसी द्वारा बाहर निकल जाता है। हमारे शरीर की कुशल प्रणाली इस बात का ध्यान रखती है कि खाद्य पदार्थ भोजन नलिका के माध्यम से जाए। अगर किसी खाद्य पदार्थ के कण या पानी की कुछ बूंदें श्वासनलिका में चली जाएं, तो इससे सिर्फ खांसी होती है। शरीर के खांसने की प्रतिक्रिया का अर्थ है कि अवांछनीय तत्वों को ग़लत नलिका से बाहर फेंका जाए। अगर खांसना भी काम नहीं करता है तो फेफड़ों तक ऑक्सीजन नहीं जाता है या ऑक्सीजन की अपर्याप्त मात्रा पहुँचती है जिससे सांस लेने में तकलीफ़ होती है। कभी-कभार धीमा विकास, निगलने में तकलीफ़ या न्यूरोमस्कूलर डिस्ओडर या चोट से भी चोकिंग हो सकती है।

नवजात शिशुओं में चोकिंग के आम कारण क्या है?

खाद्य पदार्थ, सामान्य सी बात है कि यह सबसे आम कारण है। भोजन के अलावा, छोटी वस्तु जैसी कि बटन, खिलौनों के हिस्से, कपड़ा और स्तनपान के दौरान ध्यान भटकने से नवजात शिशुओं में चोकिंग हो सकती है। माता-पिता होने के नाते, आपको अपने शिशु को चोकिंग से बचाने के लिए उनपर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है:

खाने की चीजें - शिशु के दाँत पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं इसलिए यह स्वाभाविक है कि वह हर चीज़ चबाने के बजाए निगलने की कोशिश करेंगे। अच्छी तरह से न चबाए गया भोजन श्वासनलिका में फंसता है और इससे चोकिंग होती है। पीनट बटर, कैरेमल, नगेट्स से भी चोकिंग का ख़तरा होता है। मेवे, कैंडी, गम, पोपकार्न, बीज और भोजन के टुकड़ों के साथ विशेष सावधानी बरतें।

अन्य वस्तु - छोटे गोलाकार, बेलनाकार या छोटी वस्तु आसानी से गले में जा सकती है और फंस सकती है। सेफ्टी पीन, गहने, बोतल के ढक्कन आदि से शिशुओं में चोकिंग का जोख़िम होता है।

प्लास्टिक और रबर की चीजें- शिशु प्लास्टिक के कागज़, और बैग को अपने आस-पास लिपटा सकते हैं या‌ रबर के टुकड़े जैसे गुब्बारे को मुंह में डाल सकते हैं जिसे निगलना मुश्किल होता है। रबर और खिलौने के टूटे हुए हिस्से भी बच्चों को बहुत आकर्षक लगते हैं।

कवर - शिशु को सांस लेने में दिक्कत होती है जब उनका मुंह ढका हुआ होता है या फिर उन्हें खिड़की बंद गाड़ी में छोड़ दिया जाता है। स्टफ्ड खिलौने भी शिशुओं के लिए ख़तरनाक हो सकते हैं।

शिशुओं में चोकिंग के लक्षण क्या है ?

शिशु ने कोई चीज़ निगल ली है और उन्हें उससे चोकिंग हो गई है तो उसके लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं:

उन्हें सांस लेने या कोई भी आवाज़ निकालने में दिक्कत होती है

वह सांस लेने की कोशिश करते हैं

वह नीले पड़ने लगते हैं और डरे हुए लगते हैं

वह अजीब आवाजें निकालते हैं

 लगातार रोने लगते हैं

अपने हाथ-पाँव मारते हैं या गले पकड़ने की कोशिश करते हैं

बेहोश होने लगते हैं

अगर मस्तिष्क और हृदय तक ऑक्सीजन की पूर्ति में चार मिनट के लिए भी अवरोध उत्पन्न होता है तो इससे गंभीर समस्या और यहां तक की मृत्यु भी हो सकती है। नवजात शिशुओं में इससे गंभीर श्वशसन समस्या और दिल का दौरा पड़ सकता है। इसलिए इसका ध्यान रखना चाहिए और फौरन उपाय करना चाहिए।

शिशुओं में चोकिंग के आम जोख़िम:

आप कुछ भी कर लें आप अपने घर को पूरी तरह चाइल्डप्रूफ नहीं बना सकते हैं। हालांकि आपको शिशु के दृष्टिकोण से घर को देखने की जरूरत है। बच्चों को उस जगह जाना बहुत पसंद आता है जहां वयस्क जाना पसंद नहीं करते हैं। अपनी विशेष नजर इन कुछ महत्वपूर्ण सामानों पर रखें।

खिलौनों के छोटे टुकड़े

बटन

पत्थर, ओरनामेन्टल जैल बोल

कैंडी, मेवे, बिस्कुट, चोकलेट, जैम्स

पेपर, क्लिप, ड्रोइंग पीन, रबर, स्टेपलर पीन आदि।

नवजात शिशुओं का चोकिंग से बचाव किस प्रकार किया जाए?

शिशु अगर थोड़ा बड़ा भी हो तो उसे अपने हाथों से ही खिलाएं खुद से खाए भी तो उसपर नज़र रखें 

शिशु जो भी खाता-पीता है उसका ध्यान रखें। कभी-कभार हंसने के दौरान पानी श्वासनलिका में फंस सकता है। बेहतर होगा कि खाते समय बात न करें।

शिशु को मुलायम और आसानी से निगला जा सकने वाला भोजन दें।

फल व सब्जियों को छोटे आकार में काटे या उसे पिस दें। बीज न छोड़ें।

बच्चों को पोपकार्न, कैंडी, चैरी न दें।

तार, केबल, इयरफोन बच्चों से दूर रखें।

सिक्के, ओरनामेन्टल, पेब्लस, पीन आदि को बच्चों से दूर रखें।

टूटे खिलौने, ढक्कन आदि को बच्चों को न दें।

रेफिरीजरेटर के चुम्बक को बच्चों से दूर रखें

बच्चों को अकेला न छोड़ें।

नवजात शिशुओं के चोकिंग के दौरान प्राथमिक चिकित्सा:

हम आशा करेंगे कि ऐसा कभी न हो लेकिन अगर ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है तो इन बातों का ध्यान रखें:

अगर फंसी हुई वस्तु गले में दिखाई देती है तो उसे बाहर निकालें

अगर आपके शिशु को खांसी होती है तो होने दें लेकिन अगर यह 2-3 मिनट से ज्यादा होता है तो पीठ पर थपकी दे

कुर्सी पर बैठे और शिशु का मुंह नीचे की ओर करें। पीठ के हिस्से पर 4-5 बार थपकी मारें।

अपनी उंगलियां उनके गले में न डालें क्योंकि इससे वस्तु अंदर जा सकती है

अगर शिशु बेहोश हो या सांस कम ले तो फौरन डॉक्टर को संपर्क करें

रेस्क्यू ब्रेथ दें

जब-तक मदद न आए तब तक चेस्ट कम्प्रेशन करते रहें।

घर में चीजों को सही तरह से रखकर चोकिंग से बचा जा सकता है। सभी सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखें। बच्चों के खेल कूद और खान-पान पर विशेष ध्यान रखें। अगर शिशु को ज़्यादा तकलीफ हो रही है तो एक पल का भी इंतज़ार ना करते हुए तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।

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