Link copied!
Sign in / Sign up
48
Shares

शिशु को ग्राइप वाटर देने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

 अक्सर शिशुओं में पेट की तकलीफ़ या दस्त के वक़्त ग्राइप वाटर दिया जाता है लेकिन शिशु के लिए यह कितना सुरक्षित है इसपर कई सवाल उठते चले आ रहे हैं। आज इस ब्लॉग के ज़रिये हम आपको इसी विषय पर कुछ बातें बता रहे हैं।

 ग्राइप वाटर कब और कितनी मात्रा में देनी चाहिए ?

आप अगर ग्राइप वाटर की बोतल देखेंगे तो उसमें दो हफ्ते या उससे बड़े बच्चे को ग्राइप वाटर देने की सलाह लिखी होती है और अगर बात करें शिशु को कितनी बार यह देना चाहिए तो उसके लिए आप अपने डॉक्टर से से ज़रूर पूछें। डॉक्टर आपकी शिशु की तकलीफ़ को समझकर उसी हिसाब से आपको बताएंगे की आपको शिशु को ग्राइप वाटर देनी चाहिए या नहीं और अगर हां तो कितनी मात्रा में देनी चाहिए.

 

ग्राइप वाटर के फायदे -

गैस की परेशानी से छुटकारा 

नवजात शिशु को दूध पीने से काफी गैस की समस्या होती है जिससे उन्हें बहुत परेशानी भी होती है और ऐसे में ग्राइप वाटर शिशु को इस समस्या से आराम दिलाता है।

डीहाइड्रेशन की समस्या से बचाव

शिशु जसनं के शुरूआती महीनों में खासकर छह महीनों तक सिर्फ माँ के दूध पर निर्भर रहता है लेकिन इस दौरान बहुत अधिक गर्मी होने के कारण उनका गला सूखने लगता है जिस कारण उन्हें ग्राइप वाटर दिया जाता है ताकि उन्हें पानी की कमी ना हो ।

दांत निकलते वक़्त फायदेमंद

जब शिशु को नया- नया दांत निकलता है तो उन्हें काफ़ी परेशानियां जैसे - दस्त, मसूड़ों में दर्द तो ऐसे में ग्राइप वाटर देने से शिशु को आराम मिलता है और उन्हें मसूड़ों के दर्द से भी छुटकारा मिलता है।

होगी हिचकी की परेशानी दूर

शिशुओं में अक्सर हिचकी की परशानी देखी जाती है और बहुत से लोगों का यह मानना है की जब शिशु के पेट के आकार बढ़ता है तो शिशु को हिचकी की परेशानी होती है और ऐसे में ग्राइप वाटर पिलाने से उनकी यह परेशानी दूर होती है।

 

कभी-कभी क्यों डॉक्टर्स मना करते हैं ग्राइप वाटर के लिए ?

कुछ कंपनियां ग्राइप वॉटर में चीनी का भरपूर मात्रा में इस्तेमाल करती है, जो कि शिशु के शरीर पर और आने वाले दाँतों पर बुरा असर डालता है। इसके अलावा कहा जाता है की पहले के ग्राइप वॉटर में ऐल्कोहल का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन बाद में इसमें बदलाव किया गया और अब के ग्राइप वॉटर मिलते हैं, उनमें से ज्यादातर में सोडियम बाइकार्बोनेट और जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है जो की शिशु के पेट में गैस निकलने में मदद करता है।

इसके अलावा अगर बात करें वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन की तो उन्होंने शिशुओं को ग्राइप वाटर ना देने की बात कही है क्यूंकि नवजात शिशु को शुरुआत के छह महीने माँ का दूध दिया जाना चाहिए ताकि शिशु पर इसका पूरा असर हो और साथ ही साथ उनके अंदर की इम्यून पावर भी बढ़े।

ग्राइप वाटर देते वक़्त रखें कुछ बातों का ध्यान-

हमेशा ग्राइप वाटर लेने वक़्त उसके इंग्रिडिअंट के बारे में अच्छे से पढ़ें, और इसके बारे में अच्छे से डॉक्टर से जान लें। साथ ही साथ आप अपने डॉक्टर से भी किसी अच्छे ग्राइप वाटर का सुझाव ले सकती हैं। आप अपने डॉक्टर से यह भी पूछ लें की क्या आप अपने शिशु को ग्राइप वाटर दे सकती हैं और अगर हां तो उनसे यह सुझाव ज़रूर लें की आप उन्हें दिन में कितनी बार और कितना खुराक़ ग्राइप वाटर का दे सकती हैं।

डॉक्टर से जानकारी लेकर और उनसे अच्छे तरीक़े से परामर्श करने के बाद अगर आप अपने शिशु को ग्राइप वाटर देती हैं तो इसमें कोई नुकसान नहीं है। 

Tinystep Baby-Safe Natural Toxin-Free Floor Cleaner

Dear Mommy,

We hope you enjoyed reading our article. Thank you for your continued love, support and trust in Tinystep. If you are new here, welcome to Tinystep!

We have a great opportunity for you. You can EARN up to Rs 10,000/- every month right in the comfort of your own HOME. Sounds interesting? Fill in this form and we will call you.

Click here for the best in baby advice
What do you think?
0%
Wow!
0%
Like
0%
Not bad
0%
What?
scroll up icon