Link copied!
Sign in / Sign up
16
Shares

शिशु को आसानी से बाहर निकालने के लिए लगाया जाने वाला चीरा - कैसे और कब?


अगर आप मां बनने वाली हैं, तो शायद आपको एपिसियोटमी की जरूरत पड़े। यह एक छोटा सा चीरा होता है, जो प्रसव के दौरान योनि को खुलने में मदद करता है। लेकिन यह डरावना होता है,जब आपको स्पष्ट जानकारी नहीं होती है। यह है नौ बातें, जो हर गर्भवती महिला को पता होनी चाहिए।

1. यह प्रक्रिया सभी के लिए नहीं है

एक जमाना था,जब ऐपिसियोटमी जन्म देने का एक नियमित हिस्सा था। लेकिन अब इस प्रक्रिया का सुझाव सभी को नहीं दिया जाता है। यह आपका डॉक्टर तय करता है कि आपको यह कराना है या नहीं। यह आपके शरीर और शिशु पर निर्भर करता है।

2. कुछ मामलों में इसकी जरूरत होती है

अगर आपका शिशु आपकी योनि द्वार के लिए बढ़ा है, तो ऐपिसियोटमी, आपको दर्दनाक चीरा होने से बचाती है। यह तब भी आवश्यक होता है जब आपके शिशु का पांव या निचला हिस्सा पहले निकलता है। यह एक असामान्य स्थिति है, लेकिन ऐपिसियोटमी प्रक्रिया को सरल बना देता है। यह प्रक्रिया ऐसे प्रसवों में सहायता करती है, जहां शीर्घ ही उपकरणों की आवश्यकता हो।

3. यह दो प्रकार की होती है

मीडलाइन और मीडियन यह दो सामान्य प्रकार की ऐपिसियोटमी होती है। यह एक सीधी रेखा का चीरा होता है,जो योनि से गुद्दे तक लगाया जाता है। यह आसानी से ठीक भी हो जाता है। इसमें एक मध्यवर्ती चीरा भी होता है, जिसमें तिरछा चीरा लगता है, इसे गुदे से चीरा नहीं लगता है और यह मुश्किल से ठीक होता है और यह दर्दनाक भी होता है।

4. यह प्रक्रिया तकलीफदेह नहीं है

एनस्थीसिया कि वजह से आपको वास्तविक चीरे का एहसास नहीं होगा। योनि के आसपास का हिस्सा सुन्न पड़ जाता है। जन्म के बाद टांकों से इसे ठीक किया जा सकता है। लेकिन ठीक होने की प्रक्रिया के दौरान थोड़ा बहुत दर्द होना सामान्य है। आपके डाक्टर आपको यह बता देंगे की कैसे सुरक्षित रूप से आप दर्द से राहत पा लेंगी।

5. यह प्रसव के दौरान किया जाता है

ऐपिसियोटमी जन्म देने के कुछ ही क्षणों पहले की जाती है।जब डॉक्टर शिशु को बाहर आता देखते हैं, तो वह योनि पर चीरा लगाते है। शिशु और प्लेसेंटा के बाहर आने के बाद इसपर टांकें लगा दिए जाते हैं।

6. इसमें कुछ जोखिम होता है 

हर सर्जरी की तरह ऐपिसीयोटमी में भी कुछ जोखिम होते हैं। यह चीरा प्रसव के दौरान और खींचकर गुदे तक पहुंच सकता है। इसके दौरान खून बहुत बहता है और जख्म के संक्रमित होने का खतरा होता है लेकिन स्थिति पर निर्भर करता है। ऐपिसियोथमी इन जोखिमों को दूर भी कर सकती हैं।

7. इसे ठीक होने में महीना लगता है

इसे ठीक होने में एक महीने का वक्त लगता है,एक बार जब टांके ठीक हो जाएं, तो आपको उन्हें हटाने के लिए डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं होगी। बल्कि इस दौरान इसे आसानी से लें। गर्म पानी में नहाना आपको सहज महसूस कराएंगे। अगर आपका शिशु स्वस्थ हैं, तो स्तनपान के दौरान आप पेन किलर्स जैसे पैरासिटामोल और ब्रोफिन ले सकती है। एस्प्रीन लेने से बचे।

8. संक्रमण से बचाव आवश्यक है 

जख्मों के भरने तक, सावधानी बरतें। इससे संक्रमण और अन्य समस्याओं से निजात मिलेगी। जब भी आप बाथरूम जाएं तो उससे हिस्से को साफ करें,यह आप पानी डालके भी कर सकती हैं। इसके बाद अपने निचली हिस्से को साफ करें।

9. ऐपिसियोटमी होने की संभावना को कम करें 

इसकी संभावना को कम करने के लिए , प्रसव से पूर्व अपने शरीर को मजबूत बनाने का प्रयास करें। व्यायाम इसमें बहुत सहायक हो सकता है। आप अपने योनि के आसपास के हिस्से पेरिनियम में मालिश कर सकती हैं। बेहतर परिणाम के लिए सब्जियों वाले तेल का प्रयोग करें और पेरिनेटेल योग करना ना भूले।

अगर आपको इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, तो घबराएं नहीं। आपका डॉक्टर इस प्रक्रिया और प्रसव को सफल बनाने में मदद करेंगे। अगर आपके पास कोई सवाल हो, तो बेझिझक पूछें।


Click here for the best in baby advice
What do you think?
0%
Wow!
0%
Like
0%
Not bad
0%
What?
scroll up icon