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शिशु को अनुशासित करने के 6 तरीके


जैसे-जैसे शिशु का विकास होता है, आपको उनके व्यवहार पर नियंत्रण रखना पड़ता है। सबसे ज़रूरी बात ये है कि आप उन्हें सही-गलत में फर्क करना सिखाएँ और बुरी आदतों से दूर रखें। जितनी जल्द आप उन्हें अच्छी आदतों का पालन करना सिखायेंगी, उतना ही बेहतर होगा।शरारतों और छेड़खानियों से पूरी तरह तो नहीं बचा जा सकता पर उसे कम ज़रूर किया जा सकता ह।

निम्नलिखित टिप्स आपको बेशक मदद करेंगें -

1. शिशु पर हाँथ ना उठाएँ 

परिस्थिति कैसी भी हो, परन्तु आप अपना संयम बनाएँ रखें। आप बच्चे पर हाथ न उठाने की पूरी कोशिश करें।बच्चों को मारने-पीटने से आप उन्हें गलत तरह से शिक्षित कर रहीं है। कुछ समय बाद वो इसके आदि भी हो सकते हैं। वे आपके खिलाफ भी हो सकते हैं जो एक सुखी परिवार में नहीं होना चाहिए। प्यार और तर्क से उन्हें अपनी बात समझाएँ। ऐसा करने पर माहौल भी नहीं बिगड़ेगा और वो बहेतर तरह से समझेंगे। कुछ देर में आप और शिशु फिर से सामान्य रूप से बात-चीत कर सकते हैं।

2. अपना आपा न खोएँ 

अगर आपका बच्चा आपसे बुरा व्यवहार कर रहा है तो निश्चित रूप से आपको गुस्सा आएगा लेकिन उस स्थिति में धीरज से अपने बच्चे को पास बुलाकर उससे उसके व्यवहार का कारण पूछें। आपके शांत रहने से बच्चा भी अपने आप काबू में आ जाएगा। ये आदत आगे के लिए भी अच्छी है।

3. अच्छा व्यवहार रखिए 

बच्चे की पहली पाठशाला होता है उसका घर। उसकी पहली शिक्षक होती है उसकी माँ! आप ये बात गाँठ बाँध लें कि बच्चा आपकी नकल करेगा। अगर आप अच्छे से पेश आयेंगी तो बच्चा भी वैसे ही पेश आएगा। अगर आप उसे अच्छा इंसान बनते देखना चाहती हैं तो खुद में भी बदलाव लाइए। सदैव एक इज़्ज़तदार इंसान बनने का प्रयास करें जिसे बच्चे अपना आदर्श गुरु मानें। 

4. बच्चे को अच्छे कामों के लिए इनाम दें 

जिस प्रकार आपको आपकी प्रशंसा और तारीफ सुनना अच्छा लगता है उसी प्रकार बच्चों को भी सराहना अच्छी लगती है। ये स्वभाविक है। क्यों न आप बच्चे को डांटने-डपटने के अलावा कभी प्यार की थपकी भी दें। उनकी पसंद का खाना बना दें या उन्हें आइस-क्रीम खिलायें। आप उन्हें उनका पसंदीदा खिलौना दिला सकती हैं। उनके प्रति कुछ करने से उनके मन में आपके लिए इज्ज़त और प्यार और बढ़ जायेगा। वे खुद से गलतियाँ करने से बचेंगे और आपसे पुरस्कार पाने की चाह रखेंगे।

5. सम्पूर्ण ध्यान दें 

कुछ बच्चे उधम इसलिए मचाते हैं क्योंकि माँ-बाप उनपर ध्यान नहीं देते।अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए वे शोर मचाते या बुरा व्यवहार करते हैं। इसलिए आप अपने बच्चे पर ध्यान दें। उनकी बातें गौर से सुनें।
शिशु के शुरुआती दिनों में उनपर ध्यान न देने से आप उनके बड़े होने पर इस बात का बड़ा अफ़सोस करेंगी। सो हमेशा ध्यान दें और उनकी कही बातों को भूलें नहीं। अगर उन्हें किसी बात से परेशानी है तो आप उसका समाधान करें।

6. कुछ देर उनसे दूर रहें 

बच्चे अगर ज़्यादा तंग करें और प्यार-दुलार का उनपर कोई असर नहीं पढ़ रहा तो आप उन्हें काबू में करने के लिए कुछ दिन के लिए खुद से अलग कर दें। आप उन्हें अलग कमरे में भी रख सकती हैं। शायद ये काम आ जाए। जब बच्चे को आपके स्नेह की कमी खलने लगेगी तो वो खुद ही शांत हो जायेगा।

वैसे हर बच्चा अलग तरह का होता है। उन्हें हैंडल करने का तरीका भी अलग होता है। आपके शिशु के लिए जो सही लगे वो आप अपना सकती हैं। हम आशा करते हैं कि आपके और शिशु के सम्बन्ध मधुर बने रहें।

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