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शिशु की ये आम समस्याएं भी गंभीर साबित हो सकती हैं

 

 

  एक माता पिता होने के नाते, हम जब भी अपने बच्चे को किसी समस्या से जूझते हुए देखते हैं, तो हम बहुत परेशान हो जाते हैं। क्योंकि वह अभी बहुत छोटे हैं और यह भी नहीं बता सकते हैं की उन्हें क्या तकलीफ़ हो रही है। यह कोई सामान्य समस्या जैसे दाँत आना या (growth spurt) या कोई गंभीर समस्या है जैसे बुखार या पेट दर्द! तो ऐसी स्थिति में आप यह कैसे पता लगाएंगे की उन्हें कब अस्पताल ले जाना चाहिए और कब नहीं?

यह है उन समस्याओं कि सूची जो नवजात शिशुओं को होती है और यह बहुत डरावनी लगती है, लेकिन असल में बहुत ही सामान्य समस्याएं हैं।

1. थूक में खून आना (bloody spit up)

 

कोई भी मां अपने शिशु के थूक में खून देखकर, अवश्य ही डर जाएगी। वैसे भी यह चिंता का कारण है, लेकिन यह इसलिए भी हो सकता है क्योंकि शिशु ने स्तनपान के दौरान आपके दुखते और फटे हुए निप्पल से निकलते खून को निगल लिया हो या फिर इसका एक और कारण यह है की आपके बच्चे की (esophagus) यानी भोजन-नलिका में छोटा सा चीरा लगा हो। इसके लिए आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह सही देखभाल द्वारा आसानी से ठीक किया जा सकता है। आपको तब चिंता करनी चाहिए। जब फार्मूला फिडिंग के बाद थूक में बहुत ज्यादा खून निकले और वह बीमार दिखे।

  2. बंद नाक और सांस लेने में तकलीफ़

कुछ नवजात शिशुओं में बंद नाक और सांस लेने में तकलीफ़ की समस्या पाई जाती है। लेकिन यह शिशु के दो महीने के हो जाने के बाद अपने आप दूर हो जाती है। बंद नाक होने का कारण एस्ट्रोजन हार्मोन होता है, जो मां द्वारा गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान शिशु में आता है। एस्ट्रोजन नासिका द्वारा को बंद करता है। नाक का बंद होना कुछ ही महीनों में पूर्णता बंद हो जाता है क्योंकि तब तक शिशु का नासिका द्वारा विकसित हो चुका होता है। आपको डॉक्टर से सम्पर्क उस स्थिति में करना चाहिए अगर शिशु की नाक में तकलीफ़ हो या बच्चे की त्वचा नीली पड़ रही हो या सांस लेने के दौरान उनका पेट और छाती अंदर की ओर जा रहा हो।

3. लगातार रोना

बच्चों के लगातार रोते रहने पर माता-पिता को लगता है,की उनके पेट में दर्द हो रहा है। और यह सब आमतौर पर जन्म के तीन हफ्तों तक होता है। आपका बच्चा शुरूआत के दो महीनों तक लगातार रो सकता है और यह कोई चिंता की बात नहीं है। जिन शिशुओं के पेट में वास्तव में दर्द होता है वह बहुत ज़ोर से और तकलीफदेह आवाज़ में रोते हैं। उनका रोना पांच से आठ हफ्तों की आयु में और शोकाकुल होता है। लेकिन यह तीन महीने की उम्र तक कम हो जाना चाहिए।

4. मायोक्लोनस

माता-पिता बहुत डर जाते हैं,जब वह अपने शिशु को किसी व्यस्क व्यक्ति की तरह ऐंठा हुआ देखते हैं। आप मानें या ना माने यह पूरी तरह हानिरहित स्थिति है,जिसे (Myoclonus) कहा जाता है। यह झटके और ऐंठन के लिए जिम्मेदार होती है। जो शायद आपने सोने के दौरान अपने साथी में भी देखा हो। यह देखने में डरावना लगता है, जब शिशु को ऐसी ऐंठन/झटका लगे क्योंकि शिशु का नर्वस सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता है और ना ही उसमें सामंजस्य स्थापित करने की क्षमता होती है। अगर यह झटका रुकता नहीं है या लगातार पांच मिनट के बाद होता रहता है या आपके शिशु को इसके कारण सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

5. कब्ज़

नवजात शिशु दिन में कई बार मल त्याग करते हैं। लेकिन आप कुछ ही हफ्तों में इसमें अचानक कई बदलाव देखेंगी। आपके शिशु को मल त्याग करने में कुछ तकलीफ़ हो सकती है। इसका कारण यह होता है, की शिशु की आंतें पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती है और ना ही सामान्य और पर्याप्त पाचन के लिए तैयार होती है। समय के साथ छः से आठ हफ्तों के बाद शिशु का पाचन-तंत्र ज्यादा मजबूत हो जाता है और आसानी से पाचन-क्रिया करने और मल त्यागने में सक्षम होता है। इसलिए ज्यादा घबराएं नहीं। अगर शिशु को मल त्याग करने में बहुत तकलीफ़ हो या उनका मल बहुत सख़्त हो,तो यह जान लें की अवश्य ही उन्हें कब्ज़ है। इसलिए उन्हें डॉक्टर के पास ज़रुर लें जाए।

 

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