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शिशु की त्वचा में किस तरह के रैशेस होते हैं और उनके उपचार

शिशु की कोमल त्वचा पर जल्द ही कीटाणुओं या केमिकल्स का असर हो जाता है।  शिशुओं में होने वाली आम समस्या होती है रैश की। इस ब्लॉग के माध्यम से हम महिलाओं में रैश के बारे में उपयोगी जानकारी देना चाहेंगे।

रैश क्या होता है ?

रैश त्वचा में होने वाला रोग है।इसमें त्वचा पर लाल दाग पड़ जाते हैं जिनमें खुजली भी हो सकती है ।

रैश कितने प्रकार के होते हैं ?

डायपर रैश

बच्चों को डायपर पहनाया जाता है। अगर शिशु इसे ज़्यादा देर तक पहने रहे तो इससे शिशु के नितम्ब लाल धब्बे आ जाते हैं। ऐसे रैशेस को डायपर रैश कहते हैं।

डायपर रैश के उपाय:

1. दायपर बदलने के पहले और बाद में अपने हाथ धोयें।

2. शिशु का डायपर अधिक गिला या मल से भरा होने से पहले उसे बदल दें।

3. शिशु की त्वचा संवेदनशील होती है इस कारण उसे साफ पानी से सौम्य साबुन से धुलें।

4. डायपर वाले स्थान पर हल्के से तौलिये से सुखाएं

5. अगर आप वाइप का इस्तेमाल करती हैं तो कोमल वाइप का इस्तेमाल करें।

शिशु के बदन और मुख पर दाने क्यों निकलते हैं ?

शिशु के 2-3 हफ्ते के होने पर उसके चेहरे पर दाने निकल आते हैं। इसका कारण अभी भी स्पष्ट नहीं हो सका है।

पर ऐसा माना जाता है की ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जन्म के वक्त शिशु का बदन माँ के शरीर के कुछ हॉर्मोन्स के संपर्क में आने के कारण असंतुलित होने के कारण दानों से प्रभावित होता है।

इसमें चिंता की बात नहीं है। यह कोई गम्भीर रोग नहीं है। समय बीतते बीतते यह ठीक हो जाता है।

गर्मी के कारण होने वाले रैश को ठीक कैसे करें?

गर्मी के रैश शिशु के शरीर में अधिक गर्मी बढ़ने से होते हैं। इसलिए इनका सीधा इलाज होता है बदन को ठण्ड पहुँचाना। इस प्रकार के रैश से राहत पाने के लिए आप निम्नलिखित उपाय करें :

1. शिशु के कपडे उतारें

2. उसे पंखें के निचे लिटाएं

3. जिस कमरे में शिशु सोता है वहां पे ventilation अच्छा होना चाहिए। इसके लिए आप खिड़की खोल दें।

4. शिशु को लोशन/ऑइंटमेंट न लगाएं क्योंकि इससे उसकी त्वचा में दुष्प्रभाव हो सकता है।

5. आप उसपर प्रिक्ली हीट पाउडर डाल सकती हैं। यह यकीनन बहुत फायदेमंद होता है।

धूप से होने वाले फोड़े

शिशु की त्वचा अगर अधिक धूप पड़ने से जल जाये तो प्रभावित स्थान पर गहरी लाली और पानी से भरे फोड़े हो सकते हैं।

धूप से होने वाले फोड़े या रैशेस और फोड़े का उपचार :

धूप से दूर रहे।

1. शिशु को हलके ठन्डे पानी से नहलाएं।

2. शिशु को अधिक पानी/फलों का जूस पिलाएं।

3. अलोवेरा/घृतकुमारी का लेप या जेल लगाएं।

4. जले हुआ स्थान पर तौलिये या अन्य हलके कपड़े से ढंक दें।

5. शिशु के लिए खास मॉइशचराइजर आते हैं। उन्हें हलके हाथ से शिशु पर लगाएं।

वायरस रैश को कैसे ठीक करें ?

नवजात और छोटे शिशु वायरस संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। ऐसे में उनके बदन पर अप्रत्याशित, अनोखे रैशेस आ सकते हैं। उदाहरण के लिए चिकनपॉक्स के लाल, सूखे त्वचा वाले खुजलीदार दाग-धब्बे। इन्हें ठीक करने के लिए डॉक्टर की बताई दवाइयन और सिरप लें। क्रीम लगाने से भी लाभ होगा।

मीसल्स(measles) क्या होता है ?

मीसल्स(measles) में शरीर में साँस लेने की दिकक्त हो जाती है और पूरे बदन में दर्द और बुखार हो जाता है। इससे बचाव के लिए आप शिशु को इंजेक्शन ज़रूर लगवाएं।

अपने आस पास बदलते मौसम के प्रति सचेत रहें और इस ब्लॉग को अधिक लोगों तक शेयर करें।

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