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शिशु के समतल सर को कैसे ठीक करें? plagiocephaly के उपचार

कभी कभी कुछ शिशु के सर ज़रा समतल होते हैं। उन सर गोल नहीं होते हैं। उन्हें सुलाने में महिलाओं को थोड़ी सावधानियाँ बरतनी पड़ती है। जिन बच्चों के सर विकृत होते हैं, उनको थोड़ा समय देने की ज़रूरत होती है। जैसे जैसे उनकी उम्र बढ़ती है उनका सर गोल होने लगता है।

plagiocephaly के कारण

 

1. सोने के कारण बच्चे का सर टेढ़ा हो जाना

कुछ बच्चे निरंतर एक ही तरफ सर कर के सोने के कारण उनका सर टेढ़ा करवा बैठते हैं। चूँकि शिशु का सर कोमल होता है उसपर दबाव पड़ने के कारण वह थोड़ा टेढ़ा हो जाता है।

2. लगातार ऊपर की तरफ/पीठ के बल सोने के कारण सर का समतल हो जाना

जो बच्चे बचपने से ही मुख ऊपर की तरफ कर के सोते हैं, उनका सर समतल बन जाता है।

3. माँ के गर्भ में अनुवांशिक बपरिवर्तन आना

कुछ महिलाओं में अचानक कुछ ऐसे परिवर्तन आ जाते हैं, जिन कारण उसके शिशु का सर टेढ़ा हो जाता है। इसे ठीक करने के लिए ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है। दरअसल इसमें होता कुछ यूँ है की बच्चे के सर(स्कल बोन) का विकास स्थगित हो जाता है।

आप बच्चे का सर टेढ़ा है यह कैसे बता सकती हैं ?

सामान्य स्वस्थ्य शिशु के सर गोल होते हैं। वे दाईं और बाईं ओर भी बराबर विभाजित होते हैं। अगर आपको बच्चे के सर का आकार देखने में सही नहीं लग रहा तो बेशक डॉक्टर से मिलिए और उनके कहे मुताबिक शिशु का इलाज करवायें।

बच्चों के सर टेढ़े होने के मुख्य कारण

1. गर्भवती महिला के पेट पर धक्के या झटके लगना

जब बच्चा गर्भ में था तब माँ अक्सर घूमती-फिरती थी, उन सड़कों पर गड्डे होने के कारण उसके गर्भ को झटके लगते थे।

2. प्रीमैच्योर बेबी

बच्चे के जन्म समय से पहले होने से शिशु का विकास अल्पविकसित रह जाता है। इससे शिशु का मस्तिष्क व सर प्रभावित होते हैं। परिणाम स्वरुप शिशु का सर टेढ़ा हो सकता है।

3. माँ का कुपोषित भोजन

जब माँ संतुलित भोजन नहीं लेती, तो उसके बच्चे के विकास के लिए जो ज़रूरी तत्वों की ज़रूरत होती है उसकी पूर्ति नहीं हो पाती। इसलिए माँ को संतुलित आहार लेना बहुत ज़रूरी है।

4. गले का अटक जाना या मुड़ जाना

अगर माँ की कोख में बच्चे का सर गर्भनाल में फंस रहा है या बच्चा ठीक से नहीं बैठा है तो इससे उसके सर का अल्पविकसित या टेढ़ा होना मुमकिन हो सकता है।

बचाव के लिए सुझाव

1. माँ को अपने बच्चे को सारा दिन एक ही अवस्था में बैठने नहीं देना चाहिए।

2. बच्चे को हिलने-डुलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

3. माँ को संतुलित भोजन लेना चाहिए।

4. गर्भवती महिला को अधिक उछल-कूद में नहीं लगना चाहिए। माँ को अपने पोस्चर पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि यही उसके बच्चे पर प्रभाव डालेगा।

5. बच्चों के लिए आरामदायक पिलो का प्रयोग करें जिससे उनके सर को सहज महसूस हो।

इन दिशा निर्देशों का ध्यान रखें और इस पोस्ट को शेयर करें।

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