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शिशु के दाँत - शिशु के दांत आने का क्रम और उसकी गाइड


 

  शिशु के मुंह में दो मोती जैसे दांतों का निकलना सबसे प्यारी चीजों में से एक है। इससे शिशु के दांत निकलने के सफर का आरंभ होता है। शिशुओं के दांतों को दूध के दांतों के नाम से भी जाना जाता है। यह पहले प्राथमिक दांत होते हैं, जो हमेशा के लिए स्थायी रहने वाले दांतों के स्थान पर आते हैं,जो खोपड़ी से जुड़े होते हैं। यह प्राथमिक दांत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ठोस भोजन को ग्रहण करने में मदद करते हैं। मुंह एलिमेंट्री कैनाल का पहला हिस्सा है, जहां भोजन भोजन ग्रहण किया जाता है। दाँत भोजन को चबाने और छोटे टुकड़ों में काटने में मदद करते हैं, जिससे भोजन पचाना आसान होता है।

दाँत मुंह में आने वाले हवा के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं, इसलिए शब्दों का उच्चारण प्रभावित होता है और भाषण विकास में मदद मिलती है।

दांत जबड़े को पूर्ण रूप देते हैं और उचित आकार भी प्रदान करते हैं जिससे चेहरा सामान्य लगता है।

मुस्कुराना सबसे आम सामाजिक अभिव्यक्ति है, यहां तक की शिशुओं में भी और दूध के दाँत उसे पूर्ण करने में बहुत तरीके से सहयोग देते हैं।

दूध के दाँतों के प्रकार:

तीन वर्ष की उम्र तक एक बच्चे के मुंह में बीस दाँत होते हैं और प्रत्येक जबड़े में दस दाँत होते हैं। एक प्रकार के दाँत के चार दाँत होते हैं, ऊपर और नीचे के जबड़े का जोड़ा। दाँत आने का समय प्रत्येक दाँतों के समूह का भिन्न होता है। शिशु के पहले दाँत छह से दस महीने के बीच आते हैं। दाँत जोड़ों में आते हैं इसका मतलब यह है की या तो पहले दो दांत ऊपर के जबड़े में आएंगे या निचले जबड़े में। नीचे दाँतों के आने और जाने का अनुमानित समय बताया गया है। साथ ही हमने औसतन आयु बताई है जब दाँत आते हैं और गिरते हैं।

केंद्रीय निचले कृन्तक दाँत – यह निचले जबड़े के दो दाँत होते हैं,जो आप अक्सर मुस्कुराते हुए शिशुओं में देख सकते हैं। यह दाँत भोजन को काटने में मदद करते हैं। इसके आने की आयु - 6 -10 महीने। इसके गिरने की आयु - 6 - 7 वर्ष।

केंद्रीय ऊपरी कृन्तक दाँत – ऊपरी जबड़े के यह दो दाँत निचले जबड़ों के दो दाँतों के साथ शिशु को भोजन सही प्रकार से काटने की क्षमता प्रदान करते हैं। इसके आने की आयु - 8-12 महीने। इसके गिरने की आयु - 6-7 वर्ष।

निचली पक्तिं के पार्श्व दाँत – इन दाँतों के आने से काटने के दबाव में बढ़ोतरी होती है। इसके आने की आयु – 10 -‌16 महीने। इसके गिरने की आयु - 7-8 वर्ष।

ऊपरी पक्तिं के पार्श्व दाँत – इनके आने से कृन्तक दाँतों का समूह पूर्ण हो जाता है। इसके आने की आयु - 9 -13 महीने। इनके गिरने का समय - 7- 8 वर्ष।

प्रथम निचले चबाने के दाँत – दाढ़ के दाँत मुंह के पहले बड़े दाँत होते हैं। यह भोजन चबाने और खाने में सहयोग करते हैं। इनके निकलने की आयु - 14-18 महीने। इनके गिरने की आयु - 9-11 वर्ष।

प्रथम ऊपरी चबाने के दाँत – प्रथम ऊपरी दाड़ के दाँत निचले जबड़े के विपरित होते हैं। जबड़ा बन्द करते समय ऊपरी और निचले जबड़े को यह साथ जुड़ने से रोकता है। इनके आने की आयु - 13-19 महीने। इनके गिरने की आयु - 9-11 वर्ष।

निचले श्वदन्त – यह दाँत दाड़ के दांतों के बीच में उगते हैं। यह दांत मांसाहार भोजन करने में सहायता के लिए प्रसिद्ध माने जाते हैं क्योंकि इन्हें मांस या हड्डी काटने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह मुंह के सबसे लम्बे और नुकिले दाँत होते हैं। इनके निकलने की आयु - 17-23 महीने। इनके गिरने की आयु - 9-12 वर्ष।

ऊपरी श्वदन्त – यह दाँत निचले दाँत के साथ मिलकर भोजन को ठीक प्रकार से चीरने और काटने में मदद करता है। इनके निकलने की आयु - 16-22 महीने। इनके गिरने की आयु - 10-12 वर्ष।

दूसरे निचले दाड़ के दाँत – यह दिखने में पहले दाड़ के दाँत के समान ही होता है लेकिन यह थोड़ा बड़ा और ऊपर से चौड़ा होता है। इस बड़े आकार की सहायता से यह भोजन को अच्छी तरह पीसते है। यह भोजन को उचित दबाव के साथ चबाने में उच्च कोटि के होते हैं। इनके निकलने की आयु - 23 -31 महीने। इनके गिरने की आयु - 10 - 12 वर्ष।

दूसरे ऊपरी दाड़ के दाँत – यह आखरी दाँत का समूह होता है जो बच्चे के मुंह में निकलता है। इसके निकालने की आयु - 25-33 महीने। इसके गिरने की आयु - 10-12 वर्ष। स्थायी दाँत बच्चों के अस्थाई दाँतों के स्थान पर निकलते हैं। तीसरे दाड़ के दाँत को अक्ल दाड़ कहा जाता है और यह विकसित होने वाले आखिरी दाँत होते हैं। यह दाँत समय पर निकलते हैं और गिरते हैं। साथ ही सभी शिशुओं में इसके निकलने का समय अलग अलग हो सकता है, इसलिए अगर इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लगे,तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। इस समयावधि के अलावा 36 महीने से तीन साल तक शिशु के दांत आ सकते हैं। ऐसे भी उदाहरण हैं जब शिशुओं को दाँत निकलने के दौरान समस्या उत्पन्न होती है। ध्यान दें की शिशु क्या खा रहा है और उनके स्वस्थ दाँतों को सुनिश्चित करें। ध्यान से दांतों को ब्रश करें और ओरल साफ सफाई का ध्यान रखें साथ ही समय समय पर डेंटिस्ट से मिले और इन सभी बातों का पालन कर के आप अपने नन्हे मुन्ने को मुस्कुराता हुआ देख सकते हैं।

 

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