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शनिवार के दिन का गर्भवती महिला और शिशु पर प्रभाव

 

शनिवार के दिन का सबको बड़ी बेसब्री से इन्तेज़ार रहता है। इस दिन के बाद लोगों का प्रिय संडे(sunday) यानि funday आता है। रविवार की बेताबी लोगों को शनिवार से शुरू हो जाती है। आज के मॉडर्न लाइफस्टाइल में लोग शनिवार और रविवार को वीकेंड मनाते हैं जहाँ वर्किंग वुमेन को ज़रा फुर्सत मिल जाती है। चलिए इस दिन के देवता और गर्भवती महिला के बीच का रिशता समझते हैं।

शनिवार के देवता

 

 

शनिवार का दिन शनि देवता को समर्पित होता है। इस दिन कई महिलाएं व्रत रखती हैं जिन्हे हिन्दू देवता और मान्यता का पालन करना होता है। परन्तु जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की प्रेगनेंसी में भूखे रहने से भ्रूण पर बुरा असर पड़ता है इसलिए व्रत करने के दौरान आप बीच बीच में फल और उबले आलू का सेवन करती रहें।

शनिवार का रंग

 

 

शनिवार के दिन का प्रतीक है काला रंग। इस रंग को धारण करने से महिलाओं को शनि देवता का आशीर्वाद मिलता है। काला रंग शनि देवता को प्रसन करने के लिए पहना जाता है ताकि देवता महिला और अपने अन्य भक्तों की मनोकामना पूरी कर दें।

शनिवार को गर्भवती महिलाएं क्या ख़ास कर सकती हैं ?

 

 

गर्भवती महिला सुबह उठ कर स्नान कर, साफ़ कपडे पहन कर अपने घर की बड़ी बुज़ुर्ग महिला या फिर अकेले घर के पास के मंदिर जा सकती हैं। महिलाएं चाहें तो अपने घर से साफ़ थाली ले कर जा सकती हैं जिसमें वह मिठाई, ताज़े फल और फूल, टीका/सिंदूर, अगरबत्ती तथा धूपबत्ती ले जा सकती हैं। महिला चाहें तो मंदिर के पास से पूजा थाली और माला खरीद सकती हैं। महिलाएं शनि देव के मंदिर या नवग्रह मंदिर जा सकती हैं।

शनि देव का महत्व

 

 

बहुत सी महिलाएं शनि देव के नाम से डर जाती हैं। हिन्दू भक्त शनि देव के प्रकोप से डरते हैं और उन्हें सदैव प्रसन्न रखने का प्रयास करते हैं। दरअसल व्रत शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए ही रखा जाता है। शनि देव की तपस्या से आप विपदाओं से सुखी रहेंगे। दरअसल व्रत शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए ही रखा जाता है। शनि देव की तपस्या से आप विपदाओं से सुखी रहेंगे।

हनुमान जी और शनिवार

 

 

कुछ महिलाएं शनिवार को हनुमान जी के लिए भी व्रत रखती हैं। ऐसी मान्यता है की हनुमान जी को प्रसन्न रखने से शनि जी के प्रकोप से महिलाएं बची रहेंगी। इसलिए अगर गर्भवती महिला शनि देव के मंदिर नहीं जा पाती है तो वह हनुमान जी के दर्शन और आशीर्वाद ले सकती है।

शनिवार के लिए गर्भवर्ती क्या खाद्य पदार्थ तैयार कर सकती है?

 

 

शनि देव को प्रसन्न करने के लिए गर्भवती काली साड़ी, काले तिल के लड्डू, काली दाल बना सकती है। एक आदर्श भक्त को दिन में एक बार खाना, शाम को, लेना चाहिए। इसके साथ ही उसे शाम में पूजा के बाद भोजन लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त नमक का प्रयोग करने से बचना चाहिए। परन्तु गर्भवती अपनी सेहत के अनुसार बीच बीच में भोजन ग्रहण कर सकती है। श्रद्धा दिल और दिमाग में होनी चाहिए। देवता अपने आप प्रसन्न हो जायेंगे।

शनि देव के प्रतीक

 

 

शनि देव बाण धारण किये गिद्ध की सवारी करते दिखाई देते हैं। कुछ गर्भवती महिलायें काली मूरत की पूजा करती नज़र आती हैं। इसके अलावा कुछ महिलाएं पीपल के पेड़ की पूजा-अर्चना करती हैं तथा उसे धागा बांधती हैं। काली चीज़ें जैसे काले कपड़े और काले टिल के लड्डू दान किये जाते हैं।

शनिवार से जुड़े मिथ (myth)

 

 

कुछ लोग शनिवार को बाहर यात्रा करने से घबराते हैं क्योंकि वे मानते हैं की इससे शनिदेव नाराज़ हो जायेंगे। इसलिए लोग शनिवार को यात्रा करना अगले दिन को टालते हैं।

 

 

परन्तु हनुमान भक्त को यात्रा करने से हानि नहीं होती। इसके पीछे एक दिलचस्प किस्सा छिपा है। कहा जाता है की हनुमान जी ने शनि देव को रावण से बचाया था। यह रामायण के प्रसिद्ध आग वाले हादसे के दौरान हुआ था। इसलिए शनिदेव ने वादा हनुमान भक्त को क्षति से दूर रखेंगे।

 

हम अंत में अपनी सभी पाठिकाओं को यही कहना चाहेंगे की व्रत प्रत्येक व्यक्ति और जगह जगह के ऊपर निर्भर करता है। इंसान अच्छे कर्म करता है तो उसे खुद-ब-खुद पुण्य की प्राप्ति हो जाती है। यह सभी रीतियां हमारे बड़े-बूढ़ों ने हमारे भले के लिए बनायीं थीं और इनके पालन से यकीनन हम पर देवता का आशीर्वाद रहता है।

अगर आप शनि या हनुमान जी की भक्त तो इस पोस्ट को सबमें शेयर करें ताकि ईश्वर की कृपादृष्टि आपके परिवार और आपके आने वाले शिशु के ऊपर बनी रहे।

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