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क्या शादी करना ज़रूरी होता है? क्यों?


शादी का एक सार्वभौमिक और सही मतलब खोजना आसान नहीं है क्योंकि इसपर सभी का अलग नज़रिया और समझ है।यह अंतर संस्कृति से संस्कृत और व्यक्ति से व्यक्ति में भिन्न है। सदियों और दशकों में विवाह की परिभाषा बहुत बदल गई है। लेकिन आमतौर पर हर कोई समझता है कि विवाह का मतलब है,जब दो लोग कानूनी, सामाजिक और कभी-कभार धार्मिक मान्यता से एक दूसरे के साथ जीवन जीने की कसम खाते है या वादा करते हैं। इन दो जिंदगियों के साझा होने में शरीर और आत्मा के मिलन के पहलुओं के साथ शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक समझ भी शामिल होती है। यहां शादी के सही मतलब को जानने के लिए पांच पहलू बताएं गए हैं –

1. विवाह का मतलब होता सहमति

जब दो लोग साथ चलने का फैसला लेते हैं तो उनके बीच कुछ स्तर तक सहमति होती है। पुराने समय में यह सहमति अरेंज मैरिज में यह सहमति उनके माता-पिता द्वारा की जाती थी लेकिन आजकल दंपत्तियां खुद तय करती है और सारी उम्र साथ रहने का फैसला लेती है। एक मूल सवाल पूछने के बाद की क्या तुम मुझसे शादी करोगी? एक सकारात्मक जबाव के साथ ही बहुत से सवाल और सहमति तक पहुँचा जाता है। दंपत्तियों को इस बात पर सहमत होना पड़ता है की वह किस प्रकार के विवाह अनुबंध का प्रयोग करेंगे।

2. शादी का मतलब है अपने स्वार्थ को दूर करना

एक बार जब आप विवाह करेंगे तो आपको पता चलेगा की यह अब सिर्फ आपके बारे में नहीं है।जब आप अकेले थे तो आपके सभी फैसले आपकी इच्छा अनुसार होते थे। लेकिन अब आप शादीशुदा हैं और आपको अपने पति-पत्नी से सलाह लेनी होगी। चाहे वह खाना बनाने या बाहर से मंगवाने की बात हो या छुट्टियों में घूमने जाने की आपके दोनों ही विकल्प अब जरूरी होने। वहीं शादी सबसे बेहतर और संतुष्टि दायक होती है जहां दोनों साथी एक-दूसरे के लिए दिल से समर्पित हो और एक-दूसरे के लिए अच्छे हों। आधा-आधा का हिसाब विवाह में नहीं चलता है।जब बात विवाह के सही मतलब को ढूंढने की आती है तो या तो वह पूरा होता है या वह नहीं होता है। और अगर दो में से कोई एक अपना सबकुछ दे रहा है और दूसरा थोडा या कुछ नहीं देता,तो आपको संतुलन बिठाने की जरूरत है।

3. शादी का मतलब है एक होना 

शादी का एक अन्य पहलू है एक और एक बराबर होना। इसका मतलब है सभी स्तरों पर सामान्य होना, इसमें सबसे जरूरी है शारीरिक संबंध, इससे आपके रिश्ते में मजबूती आती है। यह संबंध शारीरिक से बढ़कर भावनात्मक और मानसिक संबंधों को भी जोड़ता है। हालांकि ऐसा बनना भी ठीक नहीं है जहां आप अपनी पहचान ही भूला दो। इसका मतलब है की आप एक-दूसरे को पूरा करें और एक-दूसरे की सराहना करें, अकेले रहने की बजाए आप एक-दूसरे के साथ रहकर बेहतर बनें। यह एकदम शुरू होने वाली प्रक्रिया नहीं है इसके लिए आपको दृढ़ विश्वास और एक साथ समय बिताने की जरूरत है, एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जानने की जरूरत है। जैसे ही आप समझने लगेंगे की सही तरीके से बातचीत किस प्रकार करनी है और संघर्ष को कैसे कम करना है, तो आप थोड़े समय बाद देखेंगी की आपकी नजदिकियां बढ़ रही है। अपनी उम्मीदों को बता साफ तरीके से बयां करना जरूरी है और निर्णय लेने में बीच का रास्ता अपनाए।

4. शादी का मतलब है नई पीढ़ी को आकार देना

एक विवाहिता दंपति को मिलने वाला सबसे बड़ा सौभाग्य है एक शिशु को अपने जीवन में लाना। सुरक्षित और खुशहाल विवाह एक शिशु को पालने पोसने के लिए सबसे बेहतर होता है। जो दंपति एक होकर अपने शिशु को सही तरह पालती पोसती है उनका शिशु एक परिपक्व व्यस्क बनने समाज में अमूल्य योगदान देता है। पीढ़ी को आकार देने का यह पहलू, शादी का सही मतलब बनाता है। हालांकि की यह पहलू इतना आसान नहीं होता है। परवरिश में कई चुनौतियां होती है। इसलिए शिशु के आने के बाद प्राथमिकता बदलती है लेकिन याद रखे आपके पति पहले आते हैं। इससे आपकी शादी बेहतर रुप से चलती है।

5. शादी का मतलब है बदलना, सीखना और बढना 

बदलाव एक निश्चित चीज़ है। बदलाव यह भी जताता है की कोई चीज जीवित है।तो विवाह के सभी बदलावों का आनंद लें, हनीमून से लेकर शिशु का जन्म, उसकी किशोरावस्था से कालेज जाने का सफर उसके बाद रिटायरमेंट के बाद बुढ़ापे के दिन साथ बिताने के पल।

तो सामान्य शब्दों में विवाह का अर्थ है एक-दूसरे को कबूल करना और विभिन्न परिस्थितियों का सामना एकसाथ करना।

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