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शादी का पवित्र बंधन है परंपरा की सौगात—जाने इससे जुड़े रोचक तथ्य (This Is What Marriage Is All About In Hindi)

शादी को हिंदी में विवाह और अंग्रेजी में मैरिज कहा जाता है, यह एक सामाजिक और धार्मिक संस्कार है जिसमें पुरुष और महिला रीति-रिवाजों के अनुसार एक-दूसरे के पति-पत्नी बनते हैं। साथ ही उन्हें एक-दूसरे के लिए अधिकार और ज़िम्मेदारियां भी मिलती है, इसके अलावा वह शादी के बाद हुए धर्मज और दत्तक संतान और ससुराल की जिम्मेदारियां और जवाबदेही भी दंपत्ति को निभानी पड़ती है।

लेख की विषय सूची

शादी क्या है? (What Is Marriage in Hindi?)

शादी से संबंधी तथ्य (Facts About Marriage in Hindi)

शादी के बाद जिंदगी (Life After Marriage in Hindi)

शादी का इतिहास (History Of Marriage in Hindi)

निष्कर्ष (Conclusion)

शादी क्या है? (What Is Marriage in Hindi?)

शादी दो लोगों के बीच का बन्धन है। यह किसी समझौते की तरह है। कभी-कभार लोग इसे विवाह-बंधन कहते हैं। यह विश्वास, प्रेम और दायित्व का बंधन है। अक्सर लोग अपनी शादी का जश्न मनाते हैं। दुनिया के अधिकतर हिस्सों में यह पुरूष और महिला के बीच धार्मिक संस्कारों और सामाजिक व्यवस्था का बंधन है। कानूनी विवाह धर्मनिरपेक्ष होता है और सरकार द्वारा अधिकृत होता है। धार्मिक विवाह परिवार और रिति-रिवाजों के अनुसार समाज द्वारा कराया जाता है। विषमलैंगिक विवाह सबसे आम कानूनी विवाह है। ऐसे अनेकों कारण है, जिसकी वजह से लोग शादी करते हैं लेकिन सबसे आम कारण निम्न हैं:-

– वह ऐसा परिवार चाहते हैं, जिसे कानूनी मान्यता प्राप्त हो।

– वह अपनी संतान चाहते हैं और जिसे बिना किसी समस्या के कानूनी तौर पर अपनी संपत्ति और धन अपनी संतान को विरासत में दे सकें।

– वह कानूनी तौर पर अपने प्रेम को स्वीकृति दिलाना चाहते हैं।

– वह किसी राज्य या देश की नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं।

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शादी से संबंधी तथ्य (Facts About Marriage in Hindi)

मनोवैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययनों में पाया गया है कि लोग जिस प्रकार से अपना साथी चुनते हैं, उसमें एक निश्चित पैटर्न होता है। द मैचिंग हाइपोथिसिस, एक सामाजिक मनोवैज्ञानिक थ्योरम के अनुसार लोग उस रिश्ते को बनाने और निभाने में सफल होते हैं, जिसमें दोनों व्यक्तियों को अपना मनचाहा साथी मिलता है। इसमें शारीरिक पसंद उतनी महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि अन्य सामाजिक गुण जैसे कि बौद्धिकता और व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

कुछ लोगों के लिए शादी कैलेंडर का एक ऐसा मुख्य दिन है, जिस दिन उन्हें फूलों का गुलदस्ता मिलता है और वह बाहर डीनर करने जाते हैं। आइए जानते हैं शादी से जु़ड़े कुछ मजेदार तथ्यों के बारे में:-

– अध्ययन में पाया गया है कि जो पति-पत्नी एक जैसे होते हैं, उनका रिश्ता टिकना मुश्किल होता है। जबकि एक जैसा होना रिश्ते में सहायक हो सकता है साथ ही दंपति एक-दूसरे से बहुत कुछ सीख भी पाती है।

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– तुनकमिज़ाजी अमेरिकन्स को सवाल पूछने और स्वीकार करते समय अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है क्योंकि संयुक्त राज्य के लगभग आधे राज्यों में सगाई तोड़ने पर मुकदमा किया जा सकता है।

– वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक का मानना है कि लोग शादी धन, सेक्स और यहां तक की संतान से भी अधिक, जीवन की संतुष्टि पाने के लिए करते हैं।

– पति-पत्नी भरोसे का दूसरा नाम है, इस रिश्ते में दोस्ती, मुस्कुराहट, माफ़ी जरूरी है और सेक्स खुशहाल शादी का आवश्यक तत्व है।

– अध्ययन में पाया गया है कि जो दंपति विवाह पर अधिक खर्चा करती है, उनके तलाक़ लेने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।

– अध्ययन में पाया गया है कि विवाह के पहले चार के बाद वैवाहिक खुशियों में कमी आती है और इसके उपरांत अगले सात या आठ साल बाद इन खुशियों में कमी आती है।

– आधे से ज्यादा तलाक़ विवाह के सात साल के भीतर होते हैं।

– सबसे लम्बा वैवाहिक संबंध 90 साल 291 दिन तक चला था।

हावर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा 75 वर्ष तक किए गए अध्ययन में पाया गया है कि प्यार ही मायने रखता है। प्रतिभागियों में पाया गया है कि खुशियां और जीवन को सुख से बिताने की इच्छा प्यार और प्यार पाने के आसपास ही घूमती है।

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शादी के बाद जिंदगी (Life After Marriage in Hindi)

शादी स्त्री और पुरुष के बीच एक कानूनी और सामाजिक संबंध है, जो नियम, कानून, रिवाज़, परंपरा, विश्वास और नज़रिए से निभाया जाता है, इसमें अपने साथी की ज़िम्मेदारी के साथ-साथ यदि कोई संतान होती है तो उसकी भी जिम्मेदार और पालन-पोषण का दायित्व दंपति पर होता है। नीचे कुछ आवश्यक टिप्स दी गई है, जो आपको शादी के बाद खुशहाल और अच्छा वैवाहिक जीवन जीने में सहायता करेंगी।

बातचीत - हो सकता है कि वैवाहिक दंपति को लगे कि उनके बीच सब सही चल रहा है और उनके बीच आपसी बातचीत भी ठीक है लेकिन यह बात हमेशा याद रखें कि एक खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए आपसी समझ को बेहतर बनाने के लिए एक-दूसरे से खुलकर बात करना बहुत जरूरी है और यही सफल शादी का मूल हैं। जिंदगी में अचानक बदलाव और चुनौतियां आती है और पति-पत्नी को आपसी सहयोग से मिलजुलकर इन समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

हमेशा एक-दूसरे को कृपया और धन्यवाद कहें - यह सोचना ग़लत है कि बिना कहे आपके पति या पत्नी को आपके मन की बात पता चल जाएगी। इसके बजाए खुद उनसे बात करें और विनम्रता से पूछें व इसके बाद उन्हें धन्यवाद ज़रूर कहें।

करियर संबंधी योजनाओं पर विचार करें - हो सकता है कि कुछ शादीशुदा लोग एक ही कंपनी में काम करते हों। लेकिन हम में से अधिकतर अलग-अलग कंपनियों में काम करते हैं और हमारी नौकरियां व व्यवसाय भी अलग-अलग होते हैं। अपने पति-पत्नी से अपने कामकाजी जीवन के बारे में चर्चा अवश्य करें।

अपने ससुराल वालों से अच्छा संबंध बनाएं रखें - आपके ससुराल वाले आपके पति-पत्नी के माता-पिता है और इसलिए आप जीवन के कई महत्वपूर्ण दिन, त्योहार और छुट्टियां उनके साथ मनाएंगे ऐसे में उनके साथ अपना संबंध अच्छा रखें। कई बार उनके साथ सामंजस्य स्थापित कर पाना मुश्किल होता है लेकिन बेहतर होगा कि अच्छाई को तव्वजो देकर आप रिश्तों में मधुरता बनाए रखने की कोशिश करें।

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शादी का इतिहास (History Of Marriage in Hindi)

विवाह संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ है "वि" अर्थात् विशेष और "वाह" अर्थात् वहन करना, जिसका अर्थ हुआ विशेष रूप से वहन करना। सामाज द्वारा पुरुष और स्त्री के संबंध को विवाह का नाम देने की व्यवस्था बहुत पुरानी है और इसका इतिहास उतना ही पुराना है, जितना की हमारी सभ्यता का है। वेद शास्त्रों में भी विवाह का जिक्र है और यह सोलह संस्कारों में से एक है। विवाह के आठ प्रकार भी प्रचलित है और इसकेे अतिरिक्त विवाह योग्य युवक और कन्या के गुण के विषय में भी कई मुख्य बातों का जिक्र धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। ऋग्वेद में विवाह के विषय पर बहुत कुछ कहा गया है और इसकी समयावधि 1500 से 1000 ई पूर्व की है। समय के साथ धारणा बदली मनुष्य ने विकास किया परंतु आज भी विवाह संबंध पवित्रता का द्योतक है और समाज की उच्च व प्रचलित प्रथा है। हमारे पूजनीय देवी-देवता भी विवाह संबंध में जुड़े और इसलिए यह बहुत आवश्यक और पवित्र रिश्ता है।

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निष्कर्ष (Conclusion)

शादी मुख्य रूप से पुरुष और स्त्री के प्रेम व सौहार्द का बन्धन है। यह रिश्ता पवित्रता और मर्यादा का प्रतीक है। किसी भी युवक व युवती को विवाह करने से पहले इसके बारे में अच्छी तरह जान लेना चाहिए क्योंकि यह पवित्र बंधन ईश्वर की अनुकंपा से जुड़ता है और यह मनुष्य के उपयुक्त जीवन का प्रतीक है। 

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