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(Recipe)अपने शिशु के आहार में मछली शामिल करें- इन तरीकों से


शिशु के आहार को तय करना एक मुश्किल काम है। जो खाद्य पदार्थ चुने जाएं वह शिशु के आहार में अधिकतम पोषण और स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने वाले होने चाहिए। अधिकतर बाल रोग विशेषज्ञ सुझाते हैं की छह महीने की उम्र तक वह ठोस आहार लें सकते हैं,इसमें बिना किसी समस्या के मछली भी शामिल है। मछली स्वस्थ आहार है जो आपके शिशु के लिए उत्कृष्ट रूप से फायदेमंद है।

 

मछली, विशेषकर सालमन,टूना,सार्डिनेस,मेकेरेल यह कुछ मछलियां ओमेगा थ्री फैटी एसिड, (docosahexaenoic acid), ( eicosapentaenoic acid) से भरपूर होते हैं। यह शिशु के मस्तिष्क के विकास के लिए आवश्यक होते हैं और उनके प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाते हैं। मछली उचित वसा के साथ ही प्रोटिन से भरपूर होती है,जो शिशु के समस्त विकास के लिए आवश्यक है।

हालांकि शिशु को मछली खिलाते वक्त माता-पिता को अधिक सावधान और सचेत रहने की आवश्यकता होती है। खासतौर पर उन्हें जिनमें फूड एलर्जी अनुवांशिक रूप से चली आ रही हो।

शैलफिश और बौनी फिश शिशुओं में एलर्जी की प्रतिक्रिया को बढ़ा सकते हैं जैसे पेट में दिक्कत, रैशेस,नाक बंद और बुखार। इसके सेवन से शिशु की आयु के लगभग एक वर्ष तक दूर रहना चाहिए।

उच्च पारा/ मरकरी तत्व से युक्त मछली जैसे किंग मेकरेल,टाइलफिश,सोवर्डफिश,शार्क आदि को देने से बचना चाहिए या सीमित मात्रा में दिया जाना चाहिए। शरीर में उच्च मात्रा के मरकरी से परेशानियां उत्पन्न हो सकती है जिसमें नर्व और मस्तिष्क को बहुत नुक्सान होने की संभावना शामिल हैं। इसके बजाए आप कम स्तर के मरकरी वाली मछली टूना, सालमन शामिल कर सकते हैं।

इस बात को सुनिश्चित करें की शिशु को परोसे जाने वाली मछली ताजा और सही से पकी हो। जब बात शिशुओं की आती है तो अधिक परीक्षण करने से बचें। शुरुआत करने वाले लोगों के लिए वाइट फ्लिश फिश जैसे कोड,फ्लाउंडर,हेडडोक आदि परोसना उचित रहेगा,यह हल्की और पेट के लिए भी अच्छी होती है और आसानी से पच सकती है।

आदर्श रुप से आप मछली हफ्ते में तीन दिन दो बार दे सकते हैं,चाहे उसे बेक कर के दें, मसलकर या पका कर। पहली बार मछली कम मात्रा में परोसे और किसी भी एलर्जीक रिएक्शन के लिए एक दिन का इंतजार करें।

शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए मछली तैयार करने में निम्न बातें शामिल हैं :-

कैरोटी फिश / गाजर वाली मछली का व्यंजन

इसमें निम्न साम्रगी शामिल हैं:

छोटा व अच्छी तरह काटा हुआ गाजर।

हड्डी रहित मछली,छोटे टुकड़ों में कटी हुई।

कैसे बनाएं:

एक पैन में पानी डालें और कटे हुए गाजर और मछली को उसमें डालकर 12-15 मिनट तक पकने के लिए छोड़ दें।

उबले हुए मिश्रण को मिश्रित करने के उपकरण अथवा मिक्सी में डालें और महीन होने तक पिसे।

इसके गाढ़ेपन को आप पानी से ठीक कर सकते हैं।

आखिर में आप भुने हुए जीरे का थोड़ा सा पाउडर इसमें डाल सकते हैं।

इसी तरह से आप अन्य पोष्टिक और स्वस्थ आहार का इस्तेमाल कर के यह व्यंजन बना सकते हैं जैसे शकरकंदी,आलू, मटर,अवेकेडो, फलियां, समय स्केवैश आदि। यह विधि नौ महीने से ऊपर के शिशु के लिए उपयुक्त है। इसके अलावा आप चावल और सिरियल्स के साथ शिशु को मछली परोस सकते हैं।

हड्डी रहित मछली लें और उसे अच्छी तरह उबाल लें।

इसके बाद चावल, फलियां और कुछ सब्जियां एक कूकर में उबाल लें और दो से तीन सीटी तक उबलने दें।

यह मिश्रण मिक्सी में डालें, मछली के उबले हुए टुकड़े डालें और इसे अच्छी तरह पिस लें। इसी के साथ आप थोड़ा मक्खन या घी,‌काली मिर्च का पाउडर व थोड़ा जीरा पाउडर डाल सकते हैं।

और इसी के साथ पोष्टिक व्यंजन तैयार है।

ऐसे बहुत से तरीके के जिनके द्वारा आप शिशु को मछली परोस सकते हैं। अपने अंदर के शैफ को जगाए और अपने शिशु के लिए स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करें।

 

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