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जानिए प्रेगनेंसी के दौरान बुखार आने से शिशु पर क्या होता है असर


क्या आपको भी गर्भावस्था के दौरान बुखार आ रहें हैं? आपको डॉक्टर से मिलने की जरूरत है क्योंकि जिन बच्चों की मां गर्भावस्था के दौरान एंटी-फीवर दवाई नहीं लेती है उन बच्चों में विकास में देरी और ओटिजम का जोख़िम अधिक होता है। घबराएं नहीं, वक़्त रहते डॉक्टर से संपर्क करें और साथ ही दवाई लेने से परहेज न करें। लेकिन यह बुखार गर्भावस्था के दौरान क्यों होते हैं? क्या यह शिशु को प्रभावित करता है? ज्यादा जानकारी के लिए आगे पढ़िए।

गर्भावस्था के दौरान बुखार क्यों आता है?

शरीर का सामान्य तापमान 36°- 37° सेंटीग्रेड होता है। लेकिन जब तापमान 38.3° सेंटीग्रेड से अधिक बढ़ जाता है, तो इसे बुखार कहा जाता है। इसके कुछ लक्षण भी दिखाई देते हैं जैसे कि कांपना, पसीना आना, सर दर्द, डिहाइड्रेशन, मांसपेशियों में दर्द और चक्कर आना।

गर्भावस्था में बुखार आने के प्रमुख कारण:

गर्भावस्था के दौरान आपका प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो जाता है क्योंकि इसे आपको और आपके शिशु को संरक्षण देने के लिए अतिरिक्त काम करना पड़ता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान आपको संक्रमण, ठंड और बुखार आसानी से प्रभावित करता है। बुखार के यह निम्न कारण हो सकते हैं:

1: सर्दी होना 

सामान्य तौर पर सर्दी के साथ बुखार भी होता है। इसके लक्षण फ्लू के समान ही होते हैं और इसमें नाक बहना, खांसी, गले में दर्द और सांस लेने में तकलीफ आदि शामिल होता है। यह लक्षण 3-15 दिन में कम हो जाते हैं। अगर आपको इतना समय बीत जाने के बाद भी यह समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से परामर्श लें।

बचाव करें: घर और कार्यस्थल को साफ-सुथरा रखें, अपने हाथ नियमित रूप से धोएं और ऐसे लोगों से संपर्क न करें जिन्हें सर्दी हो।

2. इन्फ्लूएंजा

गर्भावस्था के दौरान इन्फ्लूएंजा और फ्लू बुखार का एक अन्य प्रमुख कारण है। इसके लक्षणों में बुखार, खांसी, उल्टी और जी-मिचलाना शामिल होता है। अगर अन्य लक्षण भी दिखाई देते हैं तो चिकित्सीय सहायता लें।

बचाव करें: पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं, अच्छी तरह से आराम करें और फ्लू के लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें।

3. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई)

गर्भावस्था के दौरान लगभग 10% महिलाओं यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होता है। यह तब होता है जब रेक्टम या वेजाइना से बैक्टीरिया यूरिथरा से ब्लेडर की ओर जाते हैं। इसके कारण पेशाब में खून, बुखार, ठंड लगना और पेशाब करने के दौरान जलन महसूस होती है।

अपना इलाज करें - बहुत अधिक पानी पीएं और बताए गए एंटी-बायोटिक लें। अगर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन को सही समय पर ठीक न किया जाए तो इससे किडनी में इन्फेक्शन का ख़तरा बढ़ता है और साथ ही गर्भावस्था में कई समस्याएं उत्पन्न होती है। नियमित रूप से पेशाब की जांच करने से स्थिति को जाँचने में मदद मिलती है।

4. गेस्ट्रोइन्टेस्टाइनल वाइरस

जब यह आपके शरीर में प्रवेश करता है तो इसके लक्षण कुछ इस प्रकार होते हैं जैसे कि बुखार, उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन। अगर सही समय पर देखभाल न की जाए तो इन सभी लक्षणों से समय पूर्व प्रसव हो सकता है।

अपना इलाज करें: थोड़ी राहत पाने के लिए पौष्टिक आहार लें जैसे एप्पल सौस, ब्रेड, चावल और गेहूं केले आदि गेस्ट्रोइन्टेस्टानल वाइरस के उपचार के लिए मददगार साबित हो सकते हैं। साथ ही बेहतर होगा कि आप पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। अगर तेज़ बुखार के साथ ( 101°F), आपको खून की उल्टी और डिहाइड्रेशन हो रहा है तो आपको फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

5. कोरियोएमनियोनिटिस

यह एक या दो प्रतिशत गर्भावस्थाओं में होता है। यह शिशु के आसपास मौजूद एमिनोटिक द्रव का संक्रमण है और इसके सामान्य लक्षण हैं दिल की धड़कन का तेज़ होना, पसीना आना, गर्भाशय का संवेदनशील होना, योनि से स्त्राव और ठंड लगना। अगर यह समस्या गर्भावस्था के एडवांसड स्तर पर होती है तो डॉक्टर शिशु को संक्रमण से बचाने के लिए फौरन सी-सेक्शन कराने का सुझाव देते हैं।

आपके डॉक्टर कुछ एंटीबायोटिक लेने का भी सुझाव दे सकते हैं, जो कि संक्रमण से बचाव करने के लिए डिलीवरी के बाद भी चलती है।

6. फिफ्थ डिजीज या पारवोवाइरस B19

संयुक्त राज्य के सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल और प्रिवेंशन के अनुसार केवल पांच प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को यह दुर्लभ संक्रमण होता है। रैशेज़, जोड़ों में सूजन, सर दर्द, गले में दर्द और बुखार इसके सामान्य लक्षण हैं। इससे गर्भपात, फैटल एनिमिया, स्टिल बर्थ और नवजात शिशु को हार्ट इन्फ्लेमेशन हो सकता है।

7. लिस्टेरिया

यह तब होता है जब आप संक्रमित पानी या खाद्य पदार्थ का सेवन करते हैं। तेज़ बुखार, जी-मिचलाना, मांसपेशियों में दर्द, दस्त, सर दर्द और गरदन में दर्द इसके आम लक्षण हैं। अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए तो गर्भपात, स्टिल बर्थ और प्रीमैच्योर डिलीवरी हो सकती है।

बचाव करें: अनपैश्चुराइजड मीट और दूध व स्मोकड सीफूड का सेवन न करें। अच्छी तरह पकाया गया भोजन खाएं।

क्या गर्भावस्था के दौरान आने वाले बुखार से शिशु को नुक्सान होता है?

पहले तिमाही के दौरान होने वाले हल्के बुखार से शिशु को कोई समस्या नहीं होती है, लेकिन ज्यादा तापमान आपके शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यह इसलिए होता है क्योंकि भ्रूण का विकास शुरुआत स्तर पर होता है और पूरी तरह प्रोटीन गतिविधियों पर निर्भर करता है, जो तापमान के प्रति संवेदनशील होती है। अगर तापमान (98.6 102° F) तक बढ़ता है तो यह प्रोटिन के कार्य को प्रभावित करता है और गर्भपात भी हो सकता है।

एक अध्ययन के अनुसार गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में बुखार से शिशुओं में ओरल क्लेफ्ट का जोख़िम बढ़ाता है। हालांकि बुखार को कम करने की दवाई इसके प्रभाव को कम करती है।

गर्भावस्था के तीसरे तिमाही के दौरान बुखार से आपके शिशु को नुक्सान नहीं पहुंचता है, जब-तक कि यह आपके यूट्राइन की लाइन से संबंधित न हों।

अगर आप यह पढ़कर घबरा गई है, तो यह स्वाभाविक है। लेकिन परेशान होने के बजाए आपको इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि इससे कैसे निपटा जाए।

गर्भावस्था के दौरान बुखार से कैसे बचें?

हालांकि गर्भावस्था के दौरान बुखार से बचना पूरी तरह संभव नहीं है। लेकिन आप इन निम्न बातों का ध्यान रख सकते हैं:-

मौसमी फ्लू और एच1एन1 इन्फ्लूएंजा से बचाव के लिए टीकाकरण करवाएं।

नियमित रूप से अपने हाथ एंटीसेप्टिक से धोएं।

बीमार लोगों से दूर रहें क्योंकि इसमें संक्रमण की संभावना होती है।

अनपैश्चुराइजड दूध, मीट से दूर रहें।

टैनिंग बैड, सौनाज और गर्म टब से दूर रहें।

अपने आप किसी भी दवाई का सेवन न करें।

गर्भावस्था के दौरान हल्का बुखार ख़तरनाक नहीं है और इसका उपचार करना संभव है। हालांकि, अगर तापमान ज्यादा हो तो कोई भी जोख़िम न उठाएं और फौरन डॉक्टर से परामर्श लें। गर्भावस्था जैसे नाज़ुक दौर में किसी भी चीज़ को हल्के में न लें और अपना ध्यान रखें। 

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