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आपकी ये छोटी-छोटी बीमारियां आपकी प्रेगनेंसी को बना सकती हैं जोखिम भरा, जानिए


जब भी कोई महिला प्रेगनेंट होती है तो उसे अपने साथ-साथ अपने होने वाले शिशु का भी खास ख्याल रखना पड़ता है। इस देखभाल में सबसे ज्यादा मायने रखता है गर्भवती महिला का खानपान। प्रेगनेंसी के दौरान आपका खानपान आपके और आपके शिशु पर काफी प्रभाव डालता है। यही कारण है कि आप अपने खानपान में हमेशा हेल्दी फूड ही शामिल करें।

और हाई रिस्क प्रेगनेंसी में तो गर्भवती की और भी खास देखभाल करने की ज़रूरत पड़ती है। खानपान से लेकर अपनी दैनिक क्रिया तक पूरा ख्याल रखना पड़ता है। हाई रिस्क प्रेगनेंसी के दौरान ज़रा सी लापरवाही मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। सबसे पहले तो ये जान लीजिए कि हाई रिस्क प्रेगनेंसी क्या है।

जानिए क्या है हाई रिस्क प्रेगनेंसी

आपको बता दें हाई रिस्क प्रेगनेंसी यानी कि गर्भवती महिला और शिशु की सेहत संबंधी परेशानियों का ज्यादा बढ़ जाना। यह कई तरह के रिस्क हो सकते हैं। इसमें बच्चे का विकास धीमा पड़ सकता है, समय से पहले प्रसव पीड़ा, शरीर में खून ना बनना, मधुमेह जैसे रिस्क इसमें हो सकते हैं। इस दौरान महिला को अपना खास ख्याल रखना पड़ता है।

अब सवाल ये उठता है कि हाई रिस्क प्रेगनेंसी का खतरा किन महिलाओं को होता है। तो आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से..

जिन्हें पहले से ही हो स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें

बहुत सी ऐसी महिलाएं होती हैं जिन्हें शुरुआत से ही सेहत संबंधी दिक्कतें होती हैं उनकी प्रेगनेंसी हाई रिस्क में आ सकती है। जैसे शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की समस्या, अस्थमा या मिर्गी की समस्या। जिन महिलाओं को ये समस्या पहले से ही होती हैं उन्हें हाई रिस्क प्रेगनेंसी का खतरा बना रहता है।

जिसे हो उच्च रक्तचाप की समस्या

जिन महिलाओं को पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर की समस्या रहती है वो कंसीव तो कर लेती हैं लेकिन उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपना खास ख्याल रखना होता है ताकि वो सामान्य रूप से एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे सके। महिला को रक्तचाप की समस्या से महिला के और शिशु के गुर्दों को नुकसान पहुंच सकता है।

पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम

पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (PCOS) एक ऐसी बीमारी है जो प्रेगनेंट होने के लिए महिला की क्षमता को कम कर सकता है। इसके अलावा यह मिसकैरेज की उच्च दर, गर्भावधि मधुमेह, प्रीक्लेम्पसिया, और प्रीमेच्योर डिलिवरी के खतरे को बढ़ा सकता है।

 

मधुमेह

मधुमेह के कारण प्रेगनेंसी के शुरुआती कुछ हफ्तों के दौरान बर्थ डिफेक्ट कर सकता है जिसके बारे में अधिकतर महिलाओं को प्रेगनेंसी से पहले पता ही नहीं होता। फिर प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले डायबिटीज़ से ब्लड शुगर बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। जो गर्भ में पल रहे शिशु के लिए अच्छा नहीं होती और यह हाई रिस्की प्रेगनेंसी का कारण बन जाती है।

किडनी प्रॉब्लम

जिन महिलाओं को पहले से ही किडनी प्रॉब्लम होती है उन्हें गर्भधारण करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और इसमें मिसकैरेज (गर्भपात) होने का भी खतरा बढ़ जाता है। जिन गर्भवती महिलाओं को किडनी की समस्या होती है उन्हें एक्सट्रा केयर, संतुलित खानपान और डॉक्टर से सही समय पर चेकअप करवाना काफी ज़रूरी होता है।

थायराइड

थायरॉयड की समस्या से भी गर्भधारण करने में काफी दिक्कतें आती हैं और अगर ऐसे में जो महिला गर्भवती हो भी जाती है तो उनकी प्रेगनेंसी हाई रिस्की में आती हैं।

ओवरवेट महिलाएं

जो महिलाएं ओवरवेट होती हैं उनकी प्रेगनेंसी में भी काफी सारी दिक्कतें आती हैं। इन महिलाओं को उच्च रक्तचाप, थायरॉयड, मधुमेह जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 

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