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प्रेगनेंसी के दौरान अस्थमा से कैसे करें बचाव


अस्थमा सांस से संबंधी बीमारी हैं, जिसमें श्वासनली के आस – पास सूजन आ जाती है और कई बार फेफड़ों तक हवा सही ढंग से नहीं पहुंच पाती है, नतीजा सांस का फूलना, खांसी होना आदि। भारत में करीब आठ से दस प्रतिशत गर्भवती महिलाएं अस्थमा से पीडित होती है। यह गर्भावस्था में होने वाली फेफड़ों की सबसे आम समस्या है। ऐसा जरूरी नहीं है कि महिला को गर्भधारण से पहले ही अस्थमा रहा हो, यह बीमारी गर्भावस्था में भी हो सकती हैं लेकिन यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो यह शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है।

 

अस्थमा का भ्रुण और प्रसव पर असर

यदि किसी गर्भवती महिला को अस्थमा है तो इसका पेट में पल रहे शिशु पर ये असर होगा।

- समय से पहले जन्म लेने की संभावना बढ़ जाती है।

- शिशु का विकास धीमा हो जाता है।

- जन्म के समय वजन कम हो जाता है, यहां तक कि, कई मामलों में शिशु की पैदा होते ही मौत हो जाती है।

- ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।

- सिजेरियन डिलीवरी करवाने की संभावना बढ़ जाती है।

गर्भावस्था में अस्थमा को नियंत्रण करने के उपाय

गर्भावस्था में अस्थमा होने पर शिशु और मां दोनों को खतरा हो सकता है। इसलिए अस्थमा का पता चलते ही डॉक्टर से मिलें और जल्दी से जल्दी इलाज शुरू करें। इसके लिए डॉक्टर आपको हर दो हफ्ते में जांच के लिए बुला सकता है, साथ ही अस्थमा को नियंत्रित करने के लिए दवाई भी देगा, जिसको नियमित रुप से खाना होता है। अगर अस्थमा को नियंत्रित किया जाए तो अस्थमा पीड़ित गर्भवती महिला भी सामान्य तरीके से स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं।

 

धूल – मिट्टी से दूर- अस्थमा होने का सबसे पहला और प्रमुख कारण धूल - मिट्टी है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान आप धूल – मिट्टी से दूर रहें। घर की साफ – सफाई खुद ना करें। घर के किसी अन्य सदस्य से कराएं। साथ ही सफाई के दौरान आप वहां से दूर रहें।

 

नमी वाली जगह और फूंफदी से दूर- इस दौरान नमी वाली जगहें और फूंफदी से दूर रहें। घर के आस – पास फूंफदी ना लगने दें।

 

जानवरों से दूर- इस दौरान फर वाले पालतू जानवरों से दूर रहें। इससे इंफेक्शन का खतरा हो सकता है और आपकी बीमारी बढ़ सकती है। 

 

कॉकरोच- घर में कॉकरोच ना होने दें। इनकी लार, मल से दमा का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है इसलिए कॉकरोच को घर में पनपने ना दें।

 

फूलों से बनाएं रखें दूरी- अगर आपका अस्थमा फूलों के पास जाने से बढ़ जाता है तो इस दौरान फूलों को और उनकी खुशबू से दूर ही रहें।

 

डॉक्टर के परामर्श से करें व्यायाम- अगर एक्सरसाइज करने से आपका अस्थमा बढ़ जाता है तो अपने डॉक्टर के परामर्श पर ही एक्सरसाइज करें।

 

खानपान का रखें विशेष ख्याल- अगर आपको फूड़ एलर्जी है तो डॉक्टर के परामर्श से अपना भोजन करें।कुछ संवेदनशील व्यक्तियों में भोजन में मिलाए जाने वाले एडिटिव्स, खासकर कि सल्फाइट्स नामक फूड एडिटिव से दमा के दौरे की शुरुआत हो सकती है। सल्फाइट्स संकेंद्रित फलों के रस, जैम, झींगा और बहुत से खाद्य वस्तु या पहले से तैयार भोजनों में पाया जाता है। जो भी उत्पाद या भोजन आप खरीदें, विशेषकर कि रेडी-टू-ईट (रेडिमेड) भोजन, तो पहले उनकी सामग्रियों के बारे में ध्यान से पढ़ लें। सल्फाइट अक्सर सोडियम और पोटाशियम सल्फाइट, मेटाबाइसल्फाइट, बाइसल्फाइट्स और सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) के तौर पर दिया गया होता है।

 

धुएं और प्रदुषण भरे जगहों से रहें दूर - धुंआ धुम्रपान का हो या कुछ जलने का, दोनों प्रकार के धुएं से दूर रहें। आपके आस-पास दूसरे व्यक्ति द्वारा ध्रुमपान करने पर भी अस्थमा का अटैक आ सकता है। इसके अलावा बाहर निकलने से पहले प्रदुषण से बचने के लिए अपने मुँह पर कपड़ा बांध लें, ताकि आप धूल-मिट्टी से बची रहें । 

 

भावनाओं पर रखें काबू- कभी – कभी तनाव, चिंता, यहां तक की खुलकर हंसने से भी अस्थमा बढ़ जाता है। इसलिए अपनी भावनाओं को काबू में करने के लिए योगा करें।

 

गर्भावस्था में अस्थमा का अटैक पड़ने पर आपनाएं ये उपाय

यदि गर्भावस्था के दौरान अस्थमा का अटैक आ जाए तो इन तरीकों से नियंत्रित करें।

- अगर आपको अस्थमा का अटैक पड़े तो, सीधे बैठ जाएं - लेटे नहीं। शांत रहने का प्रयास करें। हर 30 से 60 सैकंड में अपने रिलीवर इन्हेलर से एक पफ लें, अधिकतम 10 पफ तक। अगर इन्हेलर इस्तेमाल के दौरान किसी भी समय आपकी स्थिति बिगड़ती हुई लगे या फिर 10 पफ के बाद भी आप बेहतर महसूस न करें या फिर आप चिंतित हों, तो तुरंत अपनी डॉक्टर से बात करें।

- घर के किसी सदस्य को हमेशा अपने आस-पास रखें।

- तुरंत अस्पताल जाएं और अपनी मेडिकल फाइल साथ में ले जाएं।

 गर्भावस्था में अस्थमा को नियंत्रित कर एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया जा सकता है। इसलिए गर्भवती होने के साथ ही अपनी सभी जांचे कराएं और डॉक्टर के परामर्श के साथ अपना सही इलाज कराएं।

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