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गर्भावस्था(pregnancy) के दौरान यह छह योग आसनों से होता है खतरा


गर्भावस्था का समय नए योग आसनों का प्रयास करने का समय नहीं है और ना ही ऐसे कामों पर जोर देने का है, जो आप गर्भावस्था से पहले करने में सक्षम थी। गर्भावस्था के दौरान योग करने का मकसद लचीलापन बनाए रखना,कमर दर्द को कम करना, तनाव और चिड़चिड़ापन को दूर करना और श्वास पर नियंत्रण को बनाना और अपने शिशु के साथ संबंध मजबूत करना है। यह ना भूलें कि आपका शरीर शिशु को पोषित करने और उसकी वृद्धि के लिए बहुत मेहनत कर रहा है। जितना आप कर सकती हैं, उतना कीजिए और अगर आप थोड़ी झपकी लेती है, तो बुरा महसूस ना करें।

गर्भावस्था के दौरान इन आसनों को ना करें–
1. तेजी से स्थिति बदलना या कूद कर एक आसन से दूसरे में आना

 

 

गर्भधारण एक शरीर के अंगों और संरचना के निर्माण की अद्वितीय घटना है।। प्रथम तिमाही में ऊपर की ओर बढ़ती ऊर्जा में बाधा आती है, जिससे कई महिलाओं को जी मिचलाने का अनुभव होता है। इस समय के दौरान, योग आसन करने से बचे। ग्राउंडिग या स्थिर रहकर किए जाने वाले पोज़, आपके बढ़ते भ्रूण को सहारा देते हैं और इस दौरान आने वाली समस्याओं में मदद कर सकते हैं। केंद्रीय पोज़ संतुलन बनाए रखने और शरीर को सही दिशा में ऊर्जा प्रदान करने में मदद करता है।

 

इन आसनों को ना करें – जिन आसानो में तेजी से स्थिति बदलने या कूदकर एक स्थिति से दूसरी स्थिति में आना हो।

2. ट्विस्टिंग पोज़ 

 

एक बार जब भ्रूण गर्भावस्था के चार हफ्तों में स्वयं को गर्भाशय में स्थापित कर लेता है, तब प्लेसेंटा बढ़ने लगता है और अंतत गर्भाशय की दीवार से जुड जाता है। गर्भावस्था के दौरान पेट की दीवार के ट्विस्टिंग और काम्प्रेशन पर ध्यान दें। जैसे ही गर्भावस्था में प्रगति होगी वैसे ही कई आसनों को करने में आपको असुविधा महसूस होगी। ऐसे आसनों को करने से बचें,जो पेट को पिचकाते हों, क्योंकि इससे रक्त प्रवाह घट जाता है और ब्लड वेसल्स और गर्भाशय तक जाने वाली नसें सिकुड़ जाती है।

इन आसनों को ना करें – नौका आसन, मत्स्यासन, सूपता मत्स्येंद्रासन, चन्द्र आसन।

3. झुकने वाले आसन 

 

 

 

जैसे-जैसे आप अपने नौ महीने के सफर में प्रगति करते हैं, तो अपने बढ़ते हुए पेट पर ध्यान देना मुश्किल नहीं होता है। जैसे ही शिशु बढ़ता है यह आपके आसपास के अंगों पर दबाव डालता है और उन्हें दबाता है। इस दौरान झुकने वाले आसन ना करें और ना ही पेट के बल लेटे क्योंकि इससे आपके पेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

 

इन आसनों को ना करें – भुजंगासन, शलभासन, धनुरासन, हंस आसन,मयूर आसन।

4. जोर का खिंचाव

 

 

जब आप दूसरे तिमाही के अंत से तीसरे तिमाही में प्रवेश करते हैं,तब जोर से पड़ने वाले खिंचाव पर ध्यान देना जरूरी होता है। आराम बढ़ने के साथ लिगामेंट्स नर्म पड़ते हैं।प्रसव की तैयारी के लिए शरीर अधिक लचीलापन महसूस करता है क्योंकि जोड अधिक नर्म और लचीले हो जाते हैं, इससे पेट और जोड़ में अस्थिरता आती है या लिगामेंट्स में खिंचाव होता है।

 

हर आसन में अपने शरीर को स्थिर करने का प्रयास करें। अपने घुटनों पर अधिक ध्यान दें।

 

इन आसनों को ना करें– मत्स्यासन, उष्ट्रासन, चक्रासन।

5. व्युत्क्रम (inversion)

तीसरे तिमाही के अंत तक आपका शिशु आपके पेल्विस में स्थापित हो गया होता है। बढ़ते शिशु के साथ आपके गुरूत्वाकर्षण का केंद्र भी अपने आप बदलने लगता है। अत्यधिक व्युत्क्रम करने से मां को चक्कर आ सकतें हैं इसलिए यह करने के दौरान सावधानी बरतें। कई बार यह आपकी मदद कर सकता है और यह आपको सुझाया जा सकता है लेकिन इसे अनुभवी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें।

इन आसनों को ना करें – नीचे की ओर झुकने वाला कुकुरासन, कंधे या हैडस्टैड।

 

6. अपनी पीठ के बल लेटना 

 

 

कई योग अध्यापक आपको पीठ के बल लेटने से मना करेंगे। यह तक की कुछ देर के लिए भी नहीं। यह आरामदायक लग सकता है लेकिन लम्बे समय तक पीठ के बल लेटना वेना कावा को संकुचित करता है। यह महत्वपूर्ण वेन है, जो डीओक्सिजनेटिड रक्त को निचले हिस्से से हृदय में वापस देता है। यह नीचले हिस्से में दर्द, हार्टबर्न और रक्तचाप को बढ़ाता है। थोडे समय के लिए पीठ के बल लेटना ठीक है। लेकिन अगर आप असहज,जी मिचलाना या चक्कर आना महसूस करें, तो फौरन स्थिति बदल दें।

इन आसनों को ना करें – शवासन

 

गर्भावस्था के दौरान प्रत्येक व्यक्ति की अपनी-अपनी चुनौतियाँ होती है। यह आसन आपकी गर्भावस्था पर निर्भर करते हैं। परन्तु हमेशा प्रामाणिक योग अध्यापक और आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।

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