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प्रेग्नेंसी में मछली और सी-फूड—क्या यह सुरक्षित है? (Fish And Seafood During Pregnancy: Is It Safe? In Hindi)

गर्भावस्था में मछली खाना मां और शिशु दोनों के लिए सुरक्षित है, बशर्ते कि यह अच्छी तरह से पकाया गया हो‌। वास्तव में अच्छी तरह से पकाई गई मछली से आपको कई पौष्टिक तत्व मिलते हैं और इसलिए यह सुझाया जाता है कि अच्छी तरह से पकी हुई मछली आहार में ज़रूर शामिल की जाए। मछली खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें कि उससे दुर्गंध न आती हो व मछली रंगहीन न हो।

गर्भावस्था के दौरान मछली में मर्करी के उच्च स्तर के कारण इसका सेवन करने को लेकर विवाद होता है। लेकिन अब एफडीए ने सुझाव दिया है कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अधिक मछली का सेवन करना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि मछली में प्रोटीन, ओमेगा-थ्री फैटी एसिड, विटामिन और मिनरल्स होते हैं। गर्भ में भ्रूण के उचित विकास और वृद्धि के लिए यह पौष्टिक तत्व बहुत आवश्यक है।

लेख की विषय सूची

गर्भावस्था के दौरान कितनी मात्रा में मछली का सेवन करना चाहिए? (How Much Fish To Consume During Pregnancy in Hindi?)

गर्भास्था के दौरान किन मछलियों का सेवन करने से बचें (Fish To Avoid During Pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था के दौरान आहार में शामिल करने के लिए मछली का चयन (Choosing The Fish To Eat During Pregnancy in Hindi)

घर पर समुद्री खाद्य पदार्थ पकाने के लिए टिप्स (Tips When You Cook Seafood At Home in Hindi)

गर्भावस्था के दौरान कितनी मात्रा में मछली का सेवन करना चाहिए? (How Much Fish To Consume During Pregnancy in Hindi?)

अधिकतर गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त मात्रा में मछली का सेवन नहीं करती है। हालांकि इसकी सुझाई गई मात्र 8-12 आउंस (कम मर्करी वाली मछली) है। अगर आप साप्ताहिक रुप में देखते हैं तो हफ्ते में 2-3 बार आपको मछली खानी चाहिए। कम मर्करी वाली मछली में टूना, कैटफिश, साल्मन, कौड और तिलापिया आदि आते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि आप हफ्ते में 6 आउंस से अधिक सफेद टूना मछली का सेवन न करें।

गर्भास्था के दौरान किन मछलियों का सेवन करने से बचें (Fish To Avoid During Pregnancy in Hindi)

महासगार, नदियों और अन्य स्त्रोतों में मर्करी नामक तत्व होता है और इन जल निकायों में यह मिथाइलमर्करी में परिवर्तित हो जाता है और जो कि मछली में मौजूद होता है। अगर यह तत्व उच्च मात्रा में मौजूद होता है, तो यह नर्वस सिस्टम के लिए टोक्सिक होता है।‌ स्वोर्डफिश, ग्ल्फ ओफ मैक्सिको, किंग मैक्रेल, टाइलफिश, मर्लिन, औरेंज रफी और शार्क आदि मछलियों में उच्च मात्रा में मर्करी होता है और इसलिए इसका सेवन करने से बचें। अगर आप स्थानीय तालाब या नदी से पकड़ी हुई मछलियाँ ले रहें हैं, तो उस स्रोत की पूरी जानकारी प्राप्त करे। अगर आपको इसकी जानकारी नहीं मिलती है,‌ तो इसके मात्रा प्रत्येक हफ्ते 6 आउंस तक सीमित करें।

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गर्भावस्था के दौरान आहार में शामिल करने के लिए मछली का चयन (Choosing The Fish To Eat During Pregnancy in Hindi)

अगर आप गर्भावस्था के दौरान ओयली मछली का सेवन कर रहे हैं, तो हफ्ते में इसका सेवन आधा कर दे क्योंकि इसमें पर्यावरण के प्रदूषित तत्व हो सकते हैं। गर्भावस्था में आप ट्राउट, मैक्रेल, पिल्चर्ड, सार्डिन, ईल, किपर, ताज़ी टूना, ऐन्चोवी, हेरिंग और साल्मन जैसी ओयली मछलियों का सेवन कर सकते हैं।

अलग प्रकार की मछलियों और शेलफिश में ओयली मछलियों की तुलना में उतनी ही मात्रा में डाइओकसिन और पीसीबीएस होता है। सी ब्रीम फिश, हलिबेट, टर्बट फिश, क्रैब, डौगफिश और सी बास आदि इस प्रकार की मछलियाँ हैं। इन मछलियों के सेवन की मात्रा को प्रत्येक हफ्ते में आधा कर दे।

गर्भावस्था के दौरान जितना संभव हो आपको टूना मछली के सेवन को भी प्रत्येक हफ्ते चार मीडियम साइज़ जार और दो स्टिकस तक सीमित करना चाहिए। मछली में मर्करी होता है, जिससे आपको नुकसान नहीं होगा लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से आपके शिशु के सेंसेरी सिस्टम नुक़सान हो सकता है।

शार्क, मर्लिन और सोवर्डफिश में बहुत अधिक मात्रा में मर्करी होता है और इसलिए गर्भावस्था के दौरान आपको इन मछलियों के सेवन से बचना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान नीचे सूचीबद्ध की गई मछलियों का सेवन करना सुरक्षित है:

– हैडेक

– कौड

– प्लाइस फिश

– स्केट

– फ्लाउंडर

– हेक

– गर्नड

गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार का कच्चा या ठीक से न पकाया गया समुद्री खाद्य पदार्थ हानिकारक हो सकता है क्योंकि इसमें टेपवर्म जैसे पैरासाइट होते हैं। टेपवर्म आपको बीमार कर सकता है और आपके शरीर से आवश्यक सप्लीमेंट सोख सकता है, जिसकी आवश्यकता आपको और आपके शिशु को होती है।

अगर आप गर्भावस्था के दौरान मसल्स, ओयसटर और शैलफिश का सेवन करना चाहतीं हैं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि यह अच्छी तरह से पकाया गया हो। क्रूड शैलफिश में माइक्रोस्कोपिक ओर्गेनाइजम और इंफेक्शन होता है, जिससे फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान फूड प्वाइजनिंग होने की संभावना अधिक होती है।

कच्ची मछली के सेवन से होने वाली फूड प्वाइजनिंग से आपके शिशु को कोई नुक्सान नहीं होता है लेकिन इससे आप बहुत अधिक अस्वस्थ महसूस कर सकती हैं। अगर आप अच्छी तरह से शैलफिश पकाती है, तो इससे कोई भी माइक्रोस्कोपिक ओर्गेनाइजम और इंफेक्शन समाप्त हो जाता है, जिससे यह खाने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हो जाती है।

अगर आप बाहर खाना खा रही है, तो उनसे आपके लिए मछली अच्छी तरह पकाने की बात कहें। मुख्यता जापानी खाने के साथ इस बात का ध्यान रखें क्योंकि मछली को सुसज्जित करने के लिए वह सिर्फ उसे बाहर से पकाते हैं और ऐसे ही परोसते हैं।

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ग्रोसरी स्टोर पर बेची जाने वाली सुशी खाने के लिए सुरक्षित होती है। इसमें कच्ची मछली होने के बावजूद सुशी को इतने अधिक तापमान पर ठंडा किया जाता है कि इससे सभी पैरासाइट जैसे कि टेपवर्म नष्ट हो जाते हैं। अगर आप दुकान या स्टोर में बनी ताज़ी सुशी का सेवन कर रही है तो दुकानदार से या कर्मचारियों से यह अवश्य पता करें कि उन्होंने अच्छी तरह से ठंडी की गई मछली का प्रयोग किया है या नहीं।

क्रूड फिश जो अच्छी तरह से स्मोकड हों जैसे कि साल्मन और मैर्केल का सेवन करने से पहले यह अवश्य जांचें कि वह खाने के लिए सुरक्षित हो। मछली को स्मोक करने से किसी भी तरह का पैरासाइट या लिस्टिरिया माइक्रोओर्गेनाइजम नष्ट हो जाते हैं। हालांकि अगर साल्मन को खाने से पहले अच्छी तरह से न पकाया या ठंडा किया जाए, तो इसमें कुछ लिस्टिरया माइक्रोस्कोपिक ओर्गेनाइजम मौजूद हो सकते हैं।

अगर आप गर्भावस्था के दौरान स्मोकड साल्मन का सेवन करना चाहतीं हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि यह भरोसेमंद स्त्रोत सुपर मार्किट या किसी विश्वसनीय ब्रांड का बना हुआ हो। जो मछली साल्टिड और पिक्लड हो, उसका सेवन करना पूरी तरह से सुरक्षित है।

कुछ महिलाओं को शैलफिश खासतौर पर प्रौन/ झींगा और क्रैब/केकड़े से एलर्जी होती है। उन्हें इसका सेवन करने से सांस लेने में तकलीफ़ और त्वचा में जलन होती है। अगर आपको भी इनसे एलर्जी है, तो बेहतर होगा कि आप गर्भावस्था में विशेषकर इनके सेवन से दूर रहें। गर्भावस्था में अधिकतर महिलाओं को झींगा खाने की लालसा होती है। लेकिन गर्भावस्था में ऐसा कुछ भी खाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

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घर पर समुद्री खाद्य पदार्थ पकाने के लिए टिप्स (Tips When You Cook Seafood At Home in Hindi)

– फिलेट्स या पूरी मछली पकाने से पहले एक बार धारदार चाकू के इस्तेमाल से इसे बाहर की ओर काटकर अवश्य जांचें कि माँस अच्छी तरह से पक गया हो और इसके फ्लेक अलग-अलग हों।

– मछली को ओवन से बाहर निकालने के बाद इसे 4-5 मिनट अच्छी तरह से पकने के लिए छोड़ दें।

– लौबस्टर और प्रौन पकने के बाद लाल हो जाते हैं। स्कैलपस मिल्रिटी वाइट और मुलायम बना रहता है।

– मसल्स, क्लेम और ओयसटर को तब-तक पकाएं जब तक कि उनके शैल न खुल जाए।

– गर्भावस्था में मछली का सेवन करने से पहले थर्मामीटर से उसका तापमान जांचें कि यह 65 डिग्री सेल्सियस तक हो।

कुल मिलाकर गर्भावस्था के दौरान मछली का सेवन करना आपके और आपके शिशु के लिए फायदेमंद है क्योंकि इससे कई पौष्टिक तत्व प्राप्त होते हैं। गर्भावस्था के दौरान समुद्री खाद्य पदार्थों का सेवन करना बेहतर विकल्प है क्योंकि इसमें ओमेगा-थ्री डीएचए होता है, जो शिशु की आंखों और मस्तिष्क के विकास के लिए आवश्यक है। लेकिन इसका सेवन करने से पहले सावधानी बरतें क्योंकि इसमें पैरासाइट हो सकता है। लेकिन परेशान होने वाली बात नहीं है, सिर्फ यह ध्यान रखें कि मछली अच्छी तरह से पकी हुई हो। अगर आपको किसी मछली से एलर्जी हो तो गर्भावस्था के दौरान उसका सेवन बिलकुल भी न करें। 

 

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