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गर्भावस्था के दौरान इन संक्रमणों (infections) को ना करें अनदेखा


प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को बहुत ही संभलकर रहना चाहिए क्योंकि यह वो वक़्त होता है, जब एक महिला अकेली नहीं बल्कि उसके साथ उसका आने वाला शिशु भी रहता है, जिसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी ना सिर्फ होने वाली माँ पर बल्कि घर के अन्य सदस्यों पर भी होती है। महिला को ना सिर्फ आने वाले नन्हें मेहमान की खुशी होती है, बल्कि उसे कैसे सुरक्षित रखें इसका डर भी होता है। यह वो वक़्त होता है जब महिला की रोग प्रतिरोधक शक्ति यानी इम्युनिटी पावर भी कम होती है, और ऐसे में उन्हें जल्द ही कोई भी बीमारी घेर सकती है, इसलिए यह ज़रूरी है कि आपको गर्भावस्था के दौरान होने वाले कुछ इन्फेक्शन यानी संक्रमण का पहले से पता हो । आज इस ब्लॉग के ज़रिए हम ऐसी ही कुछ विषयों के बारे में आपको बता रहे हैं।

1. चिकन पॉक्स

हम कभी ना कभी चिकन पॉक्स के बारे में ज़रूर सुने हुए होते हैं और गर्भावस्था के वक़्त चिकन पॉक्स होने से ना सिर्फ माँ को बल्कि शिशु को भी खतरा रहता है। हालांकि यह हर किसी को एक बार ना एक बार हुआ होता है और दूसरी बार इसके होने की संभावना थोड़ी कम होती है, लेकिन जिस गर्भवती महिला को यह ज़िन्दगी में एक बार भी नहीं हुआ होता है तो गर्भावस्था के दौरान इसके होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसा होने से आपके होने वाले शिशु के शारीरिक विकास में भी बाधा हो सकती है।

2. हेपेटाइटिस बी

प्रेगनेंसी के दौरान हेपेटाइटिस बी होना एक बहुत ही आम इन्फेक्शन होता है जो लिवर पर असर डालता है। अगर गर्भावस्था के दौरान आप अपने पति के साथ शरीरिक संबंध बना रहीं हैं और वो अगर हेपेटाइटिस बी से संक्रमित है तो यह आपको भी हो सकता है। गर्भावस्था के वक़्त हेपेटाइटिस बी होने से आप पीलिया यानी जॉन्डिस के भी शिकार हो सकते हैं, जिस कारण आपको प्रीमैच्योर डिलीवरी हो सकती या आपके शिशु के वज़न पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

3. हेपेटाइटिस सी

हेपेटाइटिस बी की तरह गर्भवती महिला हेपेटाइटिस सी का भी शिकार हो सकती हैं। हेपेटाइटिस सी मेडिकल या डेंटल ट्रीटमेंट से आपको संक्रमित कर सकता है, अगर आप किसी डॉक्टर के यहां गई जहां कोई हेपेटाइटिस सी से पीड़ित मरीज़ लगातार आता है तो आप भी इस वायरस का शिकार हो सकती हैं और आपसे आपका शिशु भी इसका शिकार हो सकता है। मितली या उल्टी होना हेपेटाइटिस सी के लक्षण है, लेकिन कभी-कभी महिलाएं इस चीज़ को समझ नहीं पाती और इसको अनदेखा कर देती है क्योंकि ये गर्भावस्था के शुरूआती लक्षण भी होते हैं इसलिए इसमें फर्क करना मुश्किल हो जाता है।

4. यूरिन इन्फेक्शन

गर्भावस्था के दौरान यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की भी संभावना होती है। इसमें यूरिनरी सिस्टम (मूत्र प्रणाली) में बैक्टीरिया पनप जाने से संक्रमण हो जाता है और अगर इसका वक़्त रहते इलाज नहीं किया गया तो यह बढ़कर किडनी और ब्लैडर को भी प्रभावित कर देता है।इस दौरान आपको यूरिन पास करते वक़्त जलन, दर्द और कभी-कभी खून आने के लक्षण भी दिखेंगे, अगर आपको ऐसा कुछ महसूस हो तो बिना देर करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

5. पेट का इंफेक्शन

गर्भावस्था के दौरान बार-बार पेट दर्द होना, पेट के इंफेक्शन की तरफ इशारा करता है और अगर आपको दर्द पेट के निचले हिस्से में हो तो यह एक्टोपिक प्रेगनेंसी के भी लक्षण हो सकते हैं। इसके दौरान भ्रूण का विकास गर्भाशय में ना होकर फैलोपियन ट्यूब में विकसित होना शुरु हो जाता है और आगे चलकर यह माँ और शिशु दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। इसके लक्षण गर्भावस्था के लक्षण की तरह ही आम होते हैं जैसे - पेट में तेज़ दर्द होना, ब्लीडिंग होना या चक्कर आना जिस कारण शुरुआत में इसका पता लगाना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए गर्भवस्था के दौरान अगर आपको लगातार ये असहजताएं महसूस हो तो बिना देर करते हुए तुरंत अपने डॉक्टर से बात करें।

कैसे करें इनसे बचाव ?

- गर्भावस्था के दौरान आपकी इम्यून पावर कम होती है, इसलिए आपको खाने-पीने का ख़ास ध्यान रखना ज़रूरी है। जितना हो सके बाहर के खाने को खाने से परहेज़ करें, आप सब्ज़ियों को अच्छे से धोकर बनाएं, खाने से पहले या कहीं बाहर से आने के बाद हाथ-मुँह अच्छे से धोएं।

- कहीं आप किसी क्लिनिक में अपने चेकअप के लिए जा रहीं हैं तो डॉक्टर को या नर्स को नए सीरिंज या इंस्ट्रूमेंट का ही इस्तेमाल करने बोलें।

- अगर आपको थोड़ी भी कुछ शरीरिक असहजता हो रही है तो उन लक्षणों को नज़रअंदाज़ ना करें और वक़्त रहते डॉक्टर के पास जाएं।

- अपना रेगुलर रूटीन चेकअप करवाएं।

- खूब पानी पिएं और अच्छा और स्वस्थ भोजन खाएं, ज़्यादा तेल-मसाले वाली चीज़ें या बाहर की चीज़ों का सेवन ना करते हुए सादा खाना खाएं।

गर्भावस्था महिला के जीवन का एक ऐसा वक़्त होता है जब वो खुश भी होती है और चिंतित भी। एक तरफ अपने अंश के जन्म लेने की खुशी उन्हें हर वक़्त उत्साहित करती है, तो वहीं दूसरे तरफ उसे सुरक्षित रखने की चुनौती भी उनके सामने होती है। ऐसे में सोच समझकर काम करें, स्वस्थ भोजन खाएं, तनाव और चिंताओं से दूर रहें और जितना हो सके खुश रहें। इससे ना सिर्फ आप की सेहत सही रहेगी, बल्कि आपका शिशु भी हेल्दी होगा। 

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