Link copied!
Sign in / Sign up
100
Shares

प्रेगनेंसी के दौरान पत्नी को समझे और इन बातों का रखें ख़्याल

एक बच्चा पति-पत्नी के रिश्ते को पूरा करता है, पत्नी से माँ बनने का अनोखा सफर किसी भी स्त्री के लिए कुछ अलग होता है। माँ बनना हर स्त्री के लिए बहुत ही स्पेशल फील होता है। सिर्फ माँ ही नहीं बल्कि एक पति से पिता बनने का सफर भी कुछ कम अलग नहीं है, अगर माँ अपने गर्भ में बच्चे को महसूस कर सकती है तो पिता भी अपने बच्चे का बेसब्री से इंतज़ार करता है और उसे अपने बाहों में लेने के सपने संजोता है। परन्तु, ये सफर इतना आसान भी नहीं होता, ये वक़्त बहुत ही महत्वपूर्ण होता है और इस वक़्त पति-पत्नी दोनों को धैर्य और धीरज से काम लेना चाहिए, क्यूंकि इस वक़्त बहुत से बदलाव होते हैं खासकर एक स्त्री के अंदर। यही वक़्त होता है जब पति को अपने पत्नी का पूरा साथ देना होता है क्यूंकि इस वक़्त एक पत्नी को सबसे ज़्यादा अपने पति की ज़रूरत होती है।

खासकर जो महिलायें पहली बार माँ बन रहीं होती है तो उनके लिए ये वक़्त थोड़ा ज़्यादा कठिनाई वाला होता है क्यूंकि कभी-कभी वो अपने अंदर होने वाले बदलावों को समझ नहीं पाती और इस कारण छोटी-छोटी चीज़ों से वो घबरा जाती हैं या तनाव का शिकार हो जाती हैं। यही वो वक़्त होता है जब आपकी पत्नी को आपकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है । इसलिए तैयार हो जाईये अपने पत्नी का साथ देने के लिए, और उनके इस मुश्किल घड़ी को आसान बनाने के लिए।

इन बातों का रखें ख्याल...

एडजस्ट करें कम्फर्ट फील कराएं

जब एक महिला माँ बनती है तो उसके शरीर में काफी बदलाव आते हैं, जिस कारण महिला को बहुत से काम करने में देरी या परेशानी होती है। इसलिए उन्हें कुछ कहने के बजाय आप खुद एडजस्ट करें। कभी-कभी महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान डिप्रेस भी महसूस करती हैं, इसलिए एक पति होने के नाते यह आपकी ज़िम्मेदारी है की आप अपने पत्नी को ज़्यादा से ज़्यादा खुश रखें और उनके ऊपर कोई दबाव न डालें।

काम में हाथ बटायें

कोशिश करें अपने पत्नी के कामों में ज़्यादा से ज़्यादा हाथ बटायें। यह वक़्त बहुत ही रिस्की होता है, खासकर प्रेगनेंसी के शुरुआत के तीन महीने इसलिए कोशिश करें की आपकी पत्नी कुछ भारी काम या भारी चीज़ें न उठाएं। उनके छोटे-बड़े कामों को बांटकर उनको एहसास दिलाएं की वो अकेली नहीं हैं हैं और आप उनके ज़िम्मेदारियों को बाँटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

मूड स्विंग को समझे

प्रेगनेंसी के दौरान सिर्फ शारीरिक ही नहीं मानसिक बदलाव भी होतें हैं। अचानक से ज़िम्मेदारियों का एहसास आपकी पत्नी को तनाव में भी डाल सकता है, जिस कारण मूड स्विंग होना सामान्य है। इस मूड स्विंग को कभी-कभी आपकी पत्नी भी नहीं समझ पाती। अचानक गुस्सा होना, चिड़चिड़ा जाना, अचानक दुखी हो जाना मूड स्विंग के ही लक्षण है। ऐसे में आप धैर्य से काम लें और माहौल को खुशनुमा बनाएं और अपने पत्नी का साथ दें।

खाने का खास ख़याल रखें

प्रेगनेंसी के वक़्त खाना माँ और बच्चे दोनों पर एक ख़ास प्रभाव डालता है। इस दौरान महिला के टेस्ट में भी काफी बदलाव आता है, अचानक उन्हें खट्टा या आइस-क्रीम आदि खाने की क्रेविंग्स होती है और इसी चक्कर में वो अपने खाने का पूरा-पूरी ख़याल नहीं रख पाती। इसलिए आप उनके खाने का खास ख़याल रखें, उन्हे हेल्थी खाने के साथ-साथ टेस्टी खाना भी दें। या कुछ ऐसा दें जो हेल्थी भी हो और टेस्टी भी हो। इसके आलावा अगर वो कुछ और खाने की इच्छा करें तो उसे भी आप पूरा करने की कोशिश करें।

उन्हें टेंशन से दूर रखें और खुश रखें

प्रेगनेंसी के वक़्त एक महिला ऐसे ही कई शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुज़रती हैं, इसलिए उनके सामने आप कोई तनाव वाली बात न करें इसके आलावा आप घरवालों को भी बोलें की उनके सामने किसी भी तरह की टेंशन वाली माहौल न बनायें और न टेंशन वाली बात करें। ज़्यादा से ज़्यादा माहौल को खुशनुमा बनाएं, और हो सके तो पत्नी को बाहर घुमाने, मूवी दिखाने या उनके पसंद के जगहों पर भी ले जाएँ। 

पत्नी को प्यार दें और उनकी तारीफ़ करें

गर्भावस्था के दौरान एक महिला के शरीर में काफी बदलाव आते हैं, सिर्फ अंदरूनी ही नहीं बल्कि बाहरी बदलाव भी होते हैं। उन्हे लगता है की वो मोटी हो रहीं हैं और वो अच्छी नहीं लग रही हैं, इसलिए अपनी पत्नी को ज़्यादा से ज़्यादा प्यार दें, उन्हें पैंपर करें और उनकी तारीफ करें। उनके भ्रम को दूर करें, उन्हें एहसास दिलाएं की वो अब भी पहले जैसी ही सुन्दर हैं और आप अब भी उन्हें पहले जैसा ही प्यार करते हैं।

रेगुलर चेक अप

इन सब के अलावा आप ध्यान रखें की आपकी पत्नी को कब-कब डॉक्टर के यहां जाना है। आप उनके हर रेगुलर चेक अप के लिए हमेशा उनके साथ जाएं, कौन सा इंजेक्शन कब लगवाना है, कौन सी दवाई कब लेनी है, इसके अलावा अगर आपकी पत्नी को किसी चीज़ से एलर्जी है तो इसका भी पूरा ध्यान रखें।

सुबह-शाम वॉक पर ले जाएं

प्रेगनेंसी के दौरान हलकी-फुल्की एक्सरसाइज ज़रूरी होती है, इसलिए अपने पत्नी को सुबह-शाम वॉक पर ज़रूर ले जाएं। कभी-कभी महिला को खुली हवा में घूमने का मन होता है परन्तु, वो असहजता महसूस करतीं है इसलिए वो नहीं निकलती। इसलिए आप उन्हें प्रेरित करें और उनको बाहर ले जाएं, उन्हें यकीन दिलाएं की आप उनके साथ है और अच्छी-अच्छी बातें करें।

इन सब के अलावा अन्य कई छोटी-छोटी बातें जैसे - पत्नी के साथ बात करें, उनके परेशानियों को समझें, आगे की प्लानिंग करें, नए सदस्य के आने की ख़ुशी में घर सजाएं, शॉपिंग के लिए जाएं और उनकी बातों को सुने। उन्हें यह ज़रूर अहसास दिलाएं की आप यह ज़िमेदारी उनके साथ बराबर-बराबर बाँटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

बी रेडी फॉर हैप्पी पैरेंटिंग 

Click here for the best in baby advice
What do you think?
0%
Wow!
0%
Like
0%
Not bad
0%
What?
scroll up icon