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प्रेगनेंसी के दौरान मन में आने वाले डर और उनके समाधान


प्रेग्नेंसी हर महिला के लिए एक सुखद अहसास है। इस दौर से गुजर रही महिलाओं को भले ही दर्द और कई तरह की परेशानी से गुजरना पड़ता है लेकिन अपने बच्चे को कोख में महसूस करते हुए उन्हें सुख की अनुभति होती है। गर्भवास्था के दौरान महिलाओं को कुछ बातों की चिंता होने लगती हैं, जैसे कुछ सोचती हैं कि पता नहीं उनका बच्चा स्वस्थ पैदा होगा या नहीं, कुछ सोचती हैं कि क्या वह अच्छी मां बन पाएंगी या नहीं।

जब इस तरह की चिंताएं गर्भवती महिला को घेरने लगती है तो प्रेंग्नेसी सुखद अहसास की बजाए झुंझलाहट बन जाती है। महिला हमेशा चिड़चिड़ी हो जाती हैं। इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं उन 10 डर के बारे में जो महिलाओं को अक्सर चितिंत करते हैं और साथ ही बताएंगे कि इस डर से आप कैसे छुटकारा पा सकती हैं।

भय 1: गर्भपात होने का डर

संभवत: 20 प्रतिशत महिलाओं को मिसकैरेज यानी कि गर्भपात होने का खतरा रहता है। गर्भपात होने का सबसे ज्यादा खतरा एक से तीन महीने तक रहता है। वैसे डॉक्‍टरों का कहना है कि वास्तव में 70 फीसदी गर्भपात गुणसूत्रीय अनियमितताओं के कारण होते हैं और इनका बाहरी कारणों से कोई लेना-देना नहीं होता। ज्‍यादातर रूटीन जांच में इस तरह की अनियमिताओं के बारे में पता नहीं चलता। और इसलिए पति-पत्‍नी को इस बात का पता ही नहीं चलता कि आखिर तमाम सावधानियां बरतने के बावजूद गर्भपात क्‍यों हो गया।' इस तरह के गर्भपात को आप रोक तो नहीं सकते हैं लेकिन फिर भी महिलाओं को गर्भधारण करने के बाद शराब, सिगरेट और कैफीन युक्त चीजों के सेवन से बचना चाहिए।

भय 2 : मॉर्निंग सिकनेस और बच्चे को भरपूर पोषण ना मिलना

गर्भवास्था में मॉर्निंग सिकनेस होना आम बात है लेकिन कुछ महिलाएं इससे डर जाती हैं, उन्हें लगता है कि बच्चे को सही पोषण ना मिलने के कारण उन्हें ज्यादा तकलीफ हो रही हैं। लेकिन यह एक सामान्य प्रक्रिया है। हां अगर आपको बहुत ज्यादा दिक्कत हो रही हो तो आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही आपको इस दौरान थोड़ा – थोड़ा भोजन कई बार खाना चाहिए। अपने खाने में फल, जूस और विटामिन से भरपूर खाद्य पदार्थ बढ़ा देने चाहिए।

भय 3 : मैं ज्यादा तनाव ले रही हूं, जो मेरे बच्चे के लिए हानिकारक है

कई बार घर – परिवार में कई तरह की समस्याएं चल रही होती है, जिससे गर्भवती महिला का चिंता करना जाहिर सी बात है लेकिन कई बार महिलाएं इस बात की भी चिंता करने लगती हैं कि उनका ज्यादा तनाव में रहना उनके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है। लेकिन एक स्टडी में पाया गया है कि छोटी – मोटी टेंशन का बच्चे पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। हां अगर परिवार में किसी की मौत हो गई हो या जॉब छूटने की बहुत ज्यादा टेंशन हो तो बच्चे की प्री मेच्योर डिलीवरी होने की संभावना बढ़ जाती हैं। अपने आप को तनाव से दूर रखने के लिए संगीत सुनें, किताबें पढ़ें, रात को जल्दी सोने की कोशिश करें।

भय 4 : मेरे बच्चे को जन्मजात रोग होगा

एक मां को सबसे बड़ी चिंता यही होती हैं कि उसका बच्चा स्वस्थ पैदा हो। अगर फैमिली हिस्ट्री में कोई रोग आनुवंशिक रोग हो तो बच्चे में भी ये रोग आने की संभावना होती है लेकिन आप इसका पता अल्ट्रासाउंड के जरिए लगा सकती हैं। वर्तमान समय में ऐसी कई तकनीक उपलब्ध है, जहां गर्भ में पल रहे बच्चे के बारे में पता लगया जा सकता है कि बच्चा स्वस्थ है या नहीं। सारे टेस्ट और चेकअप कराने के बाद सिर्फ चार प्रतिशत संभावना है कि बच्चा जन्मजात से किसी रोग से पीड़ित हो। ऐसे में अपने डॉक्टर से सारे टेस्ट करवा देने चाहिए। गर्भावस्था के दौरान बच्चे के मानसिक विकास के लिए समय से विटाइमिन्स लेने चाहिए। धूम्रपान और शराब से दूर रहना चाहिए।

भय 5 : प्री – मेच्योर डिलीवरी

प्री – मेच्योर यानि समय से पहले प्रसव होने को लेकर भी महिलाएं डरी हुई होती है। प्री – मेच्योर डिलीवरी के केस अब लगातार बढ़ते ही जा रही हैं। लेकिन यदि महिलाएं अपना ख्याल रखें तो इसे रोका जा सकता है। एक स्टड़ी में पाया गया कि 40 हजार महिलाओं पर अध्ययन करने के बाद पता चला कि जिन महिलाओं ने एक साल से फोलिक एसिड़ की खुराक ली हैं, उनमें प्री- मेच्योर डिलीवरी का खतरा कम हुआ है, बजाय जिन महिलाओं ने फोलिक एसिड़ की खुराक नहीं ली है। इसलिए इस डर को दूर भागने के लिए नियमित रुप से डॉक्टर से चेकअप कराएं। फोलिक एसिड़ की खुरात लें। अपने डॉक्टर से सलाह लें।

डर 6: मैं डिलीवरी के बाद अपने बढ़े हुए वजन को कम नहीं कर पाऊंगी।

बच्चे के जन्म के बाद मां का वजन बढ़ना सामन्य प्रक्रिया है लेकिन इस बढ़े वजन को कम करने को लेकर चिंता करने की कोई बात नहीं है। अगर आप अपना खान – पान संतुलित रखेंगी और रोज योगा और एक्सरसाइज करेंगी तो जरूर आपका वजन कम हो जाएगा और आप पहले की तरह फिट नजर आएंगी।

भय 7 : मुझे डायबिटीज या हाई ब्ल्ड प्रेशर का सामना करना पड़ेगा

हाई ब्लड़ प्रेशर की समस्य अक्सर 18 साल से छोटी गर्भवती को या फिर 30 साल के बड़ी महिला को होती हैं। डिलीवरी या गर्भवास्था के दौरान हाई ब्लड़ प्रेशर की समस्या 5 से 8 प्रतिशत ही रहती है। इसलिए इसमें घबराने वाली बात नहीं है और अगर आपको इसकी समस्या होगी तो डॉक्टर आपके रुटीन चेकअप के दौरान आपको बता देगा।

डायबिटीज की शिकायत – कई बार महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज की शिकायत हो जाती हैं। ऐसे में उन्हें सामान्य भोजन करना होता है और हर 24 से 28 हफ्ते में ब्लड़ टेस्ट करवाने जरूरी हैं।

भय 8 : लेबर पेन बहुत भयानक होगा

हर महिला होने वाले लेबर पेन से डरती हैं। उन्हें लगता है कि यह उनके शरीर को उलट – पलट कर रख देगा लेकिन यह आपके जीवन का सबसे अर्थपूर्ण अनुभवों में से एक होगा। जो आपको मातृव्य का अहसास दिलाता है। प्रसव पीड़ा पीड़ादायक होता है लेकिन अगर आप धैर्य बनाएं रखें तो इस दर्द को सहन करने की क्षमता आपके पास हैं।

भय 9 : मैं एक अच्छी मां बना पाओगी या नहीं

जब कोई महिला पहली बार मां बनती हैं तो उसके मन में यह डर बना रहता है कि पता नहीं वह एक अच्छी मां बन पाएगी या नहीं लेकिन इसमें डरने की बात नहीं है। आप अच्छी मां बनाने का पूरा प्रयास करेंगी और आपके बच्चे के लिए क्या बेहतर हैं, ये आपसे ज्यादा कोई नहीं जान सकता।

भय 10 : अपने पार्टनर के साथ पहले जैसे संबंध नहीं

बच्चे के जन्म के बाद सेक्सलाइफ में बदलाव जरूर आता है लेकिन ये एक दौर होता है, जो गुजर जाता है। इसका मतलब ये कतई नहीं है कि आप पहले की तरह अपने पार्टनर के साथ संबंध नहीं बना सकते हैं। इसके लिए आपको अपने पार्टनर से खुलकर बात करनी होगी और दोनों को इस बात को समझाना होगा।

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