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प्रेगनेंसी और उम्र का संबन्ध - फायदे और नुक्सान

महिला के शरीर में उम्र के हर दसवे दशक में कुछ न कुछ परिवर्तन आते रहते हैं। कौन सी उम्र में गर्भ धारण करना ठीक रहेगा यह भी निश्चित नहीं किया जा सकता। हम आपको 20, 30 और 40 वर्ष में गर्भ धारण के फायदे और नुक्सान के बारे में बताएँगे।

कम उम्र में आपके पास शिशु के आगे पीछे दौड़ने के शक्ति होती है परन्तु पैसे थोड़े कम होते हैं उसी जगह बढ़ती उम्र में आपके पास अच्छा-ख़ासा तजुर्बा,अनुभव और जमा-पूंजी पैदा हो जाती है। पर ढलती उम्र में आपके शरीर की बच्चे को पैदा करने की शक्ति कम हो जाती है व आप बच्चे के विकास में थोड़ी ढीली पड़ जाती हैं।

20 से 24 वर्ष में

आपकी काया

यह महिला के सर्वाधिक उर्वर वर्ष होते हैं। आपकी माहवारी भी नियमित होती है, और आपकी प्रजनन क्षमता भी अपने चरम पर होती है। इन वर्षों में महिला आसानी से गर्भवती हो जाती है। गर्भधारण के बाद उनका बी.पी चेक किया जाता है।

आपकी भावनायें

यह उम्र का वह पड़ाव होता है जहाँ महिलाओं को अपना करियर बनाने की कामना होती है। महत्वाकांक्षी महिलाएं इन वर्षो में शादी करने को टाल सकती हैं ताकि वे अपना भविष्य बना सके। कई बार उनकी शादी उनके पसंद के खिलाफ करवाने के कारण उनमें माँ बनने की उतनी ख़ुशी नहीं होती जितनी की होनी चाहिए। परन्तु समय बीतते बीतते वे अपनी ज़िन्दगी में आये इस परिवर्तन को भी स्वीकारने लगती हैं।

शिशु को किन बातों का खतरा हो सकता है?

20 से 24 वर्षों में महिलाओं में गर्भपात का खतरा 9.5% ही होता है। क्योंकि आपके अंडे अभी भी युवा हैं और उनमें बच्चे पैदा करने की क्षमता है। बच्चों में विकृति होने की सम्भवनायें भी कम होती हैं।

25 से 29 वर्ष में महिला का माँ बनना

आपकी काया

अगर आप अपनी पूरी गर्भावस्था में ढंग से व्यायाम करें और पोषक खाना खायें तो आपको गर्भावस्था में दिक्कत नहीं होगी। इसके साथ ही बच्चे की डिलीवरी के बाद आपकी बॉडी जल्दी अपने पुराने रूप में लौट आयेगी। इसके साथ ही 20s में गर्भ धारण करने से महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर से बचा जा सकता है। इस दौरान बच्चा पैदा करने में कोई खास दिक्कत नहीं आती।

आपकी भावनायें

लेट 20s में आप अपनी ज़िन्दगी में अच्छी नौकरी में होंगी, आपने खुद को साबित भी कर लिया होगा और अंदर अधिक परिपक्वता आने के कारण आप अपने पति और उनके घर के अन्य सदस्यों के साथ अच्छी तालमेल बना लेती हैं।

30 से 34 वर्ष के बीच

आपका शरीर

30 वर्ष की उम्र में कदम रखते ही आपकी प्रजनन और उपजाऊ क्षमता कम होने लगती है। अगर आपको फर्टिलिटी ट्रीटमेंट लेना भी पड़े तो इसमें 35 वर्षों की औरतों से अधिक सफल होने के मौके होते हैं। उम्र जैसे जैसे बढ़ती है वैसे वैसे महिला का इलाज के बाद सफल होने की सम्भावना भी कम होती जाती है।

आपकी भावनात्मक परिपक्वता

जिन महिलाओं ने अपने 20s में अपने प्रोफेशनल काम में पूरा योगदान दिया है वे घर सँभालने की ज़िम्मेदारी लेने के लिए पूरी तरह से तैयार हों जाती हैं। उनके पास समझ और सूझबूझ आ जाती है। उनकी सहनशीलता और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स भी काफी बेहतर हो जाती हैं। ये महिलायें समझदार और स्वतंत्र माँ की भूमिका निभाती हैं। परन्तु उन्हें काम करना पसंद है तो उन्हें काम पर वापस लौटने की जल्दी होती है।

35 से 39 वर्ष में माँ बनने का अनुभव

35 वर्ष पार करने के बाद महिलाओं की फर्टिलिटी घटने लगती हैं। उनकी माँ बनने की सम्भावना कम होती जाती है। इसका सरल कारण इतना है की महिला जिन अण्डों के साथ जन्म लेती है वे हर बीतते पीरियड के साथ खतम होते जाते हैं। जब तक महिला 38-39 वर्ष की उम्र तक पहुँचती है उसके काफी अंडे नष्ट हो चुके होते हैं। वे अंडे जो उसके बदन में पाये जाते हैं वे भी बूढ़े और कमज़ोर हो जाते हैं। उन्हें fertilise करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।

35 साल और उससे कम उम्र की महिलाओं को उनके पति के साथ 1 साल तक बिना किसी गर्भनिरोधक के सेक्स करने के लिए कहा जाता है। एक साल के बाद उनका इनफर्टिलिटी ट्रेटमेंट शुरू किया जाता है। इसके विपरीत 35 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को उनके पति के साथ केवल 6 महीने तक बिना गर्भनिरोधक के सेक्स करने को कहा जाता है क्योंकि उनका इलाज शुरू करने के लिए ज़्यादा समय नहीं लिया जा सकता है।

कुछ फर्टिलिटी क्लीनिक में तो 39 और 40 वर्ष की महिलाओं को दाखिल ही नहीं किया जाता क्योंकि उनके इलाज के बाद सफलता की उम्मीद में घटौती आ जाती है। और क्योंकि डॉक्टर उनके इलाज करके असफलता का दोष अपने सर नहीं लेना चाहते हैं इसलिए वे उनको इलाज में शामिल ही नहीं करते।

बड़ी उम्र की महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान हाई बी.पी का खतरा बहुत होता है। मधुमेह का खतरा भी तीनगुना हो जाता है। शिशु में जन्म विकृति की सम्भावना भी अधिक होती है। 35 से 39 वर्ष की महिलाओं में c-section की सम्भावना बहुत ऊँची हो जाती है।

होने वाले शिशु की देखभाल

चूँकि बड़ी उम्र तक आते आते आप दुनिया के कई अच्छे-बुरे अनुभव जी लिए होते है इसलिए आप शिशु की जन्म से पहले होने वाले चेकअप(prenatal screening) करवा लेती हैं। आप उनमें होने वाले किसी रोग के इलाज में जुट जाती हैं। आप खुद और अपने पति की मानसिक सहारा देती हैं।

अधेड़ उम्र की महिला के होने वाले बच्चे को जेनेटिक परेशनियाँ हो सकती हैं। जुड़वाँ और तीन बच्चे एक साथ होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है। इसके पीछे वैज्ञानिक यह कारण बताते हैं की जैसे जैसे महिला की उम्र बढ़ जाती है तो उसका ओवरी (डिंबग्रंथि) दो अंडे भी फैलोपियन ट्यूब में छोड़ सकता है। इसी वजह से पुरुष के sperms एक साथ दो अंडो को fertilise कर सकते हैं।

40 और उससे अधिक उम्र की महिलाएं

शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलाव

ख़ुशी की बात यह है की दवाइयों की मदद से महिला गर्भधारण कर सकती है। उसका होने वाला बच्चा उसके खुद के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। महिला ने खुद को मेंटेन किया है तो वह स्वस्थ्य शिशु को जन्म दे सकती है परन्तु अगर उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो उसके शिशु में बर्थ डिफेक्ट हो सकते है। अगर उन्होंने पहले एक बच्चे को जन्म दे चूका है तो इस बार उनकी प्रेगनेंसी भारी पड़ सकती है क्योंकि महिला को हेमोराइड, मूत्राशय पर दबाव, पेट की परेशानियाँ और गर्भाशय की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए मातृत्व का सुख भोगने के लिए 20s में घर बसा लें। ज़्यादा देर न करें। यह सुख दुनिया का सर्वाधिक सुख होता है जिसकी तुलना आप किसी अन्य सुख या चीज़ से नहीं कर सकतीं।

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