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प्रसूति(labour pain) पाने के प्राकृतिक उपाय


पिछले 40 हफ़्तों से आप प्रसूति का इंतज़ार कर रही होंगी। इसके लिए आपने सारी तैयारियां भी कर ली होंगी जैसे की होस्पिटल की बुकिंग, खाने पीने का सामान, ऑफिस से छुट्टी साथ ही हॉस्पिटल में पहनने के कपड़े और चादर। पर अचानक ही सब कुछ बदल जाता है अगर आपको डिलीवरी डेट करीब होने पर भी ज़रा सा भी दर्द या संकुचन नहीं होता। ऐसे में आप नीचे दिए गए कुछ उपाय कर सकती हैं जिनसे कई महिलाओं को प्रसूति करने में मदद मिली है।

1. अक्युपंचर

अक्युपंचर एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे शरीर के चुनिंदा हिस्सों में सुई से दबाव पैदा किया जाता है। माना जाता है की ऐसा करने से शरीर के उन हिस्सों में ऊर्जा पैदा होती है और वह हिस्से सक्रिय रूप से काम करते हैं।

2. मसालेदार करी /सब्ज़ी

तीखी मसाले दार सब्ज़ी आपके पेट के एसिड लेवल्स को बढ़ाती है और पाचन क्रिया को सक्रिय बनाती है। इस प्रकार पेट की मांसपेशियां जब संकुचन पैदा करती हैं तो इससे गर्भाशय कि मांसपेशियों पर भी असर पड़ता है। इस प्रकार प्रसूति संकुचन पैदा होने लगते हैं।

3. अनानास

अनानास में ब्रोमिलेन नामक इंजाईम पाया जाता है। यह गर्भाशय ग्रीवा(कर्विक्स) की मांसपेशियों को ढीला करता है और प्रसव पीड़ा को जागृत करता है। अनानास की अच्छी खुराक लेने से आपके पेट तथा गर्भाशय को सक्रिय बनाने में मदद मिलेगी।

4. निपल को उत्तेजित करना

महिलाओं के निपल को छूने या सहलाने से संकुचन में सहायता मिलती है। ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चे जैसे स्तन चूसते हैं दूध पीने के लिए वैसे ही निपल को उँगलियों से सहलाने से शरीर के ग्रंथियां ऑक्सीटोसिन नामक होरमोन पैदा करने लगती हैं। इस हॉर्मोन के कारण संकुचन पैदा होने लगते हैं।

5. यौन-क्रिया (सेक्स)

9 महीने की गर्भवती स्त्री के लिए सेक्स करना मुश्किल हो सकता है। परन्तु सेक्स आपके शरीर में ऑक्सीटॉनिन नामक असरदार हॉर्मोन पैदा करता है। इसी हॉर्मोन की सहायता से बच्चे का जन्म होता है क्योंकि यह हॉर्मन गर्भाशय की मांसपेशियों में संकुचन पैदा करता है जिससे शिशु का सर शरीर के बाहर आता है।

6. चलना

चलने से आपके बच्चे के सर का भार आपके गर्भाशय-ग्रीव पर पड़ेगा। इससे ऑक्सीटोसिन पेदा होगा जिससे संकुचन पैदा होने लगेंगे। इस अवस्था से बच्चे के बाहर आने में मदद मिलेगी।

7. सम्मोहन

वैसे अभी सम्मोहन के ऊपर वैज्ञानिक अनुसंधान कर ही रहे हैं। सम्मोहन को प्रसूति में कारगर इसलिए माना जाता है क्योंकि अक्सर कई महिलाएं चिंता और तनाव के कारण ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन पैदा नहीं कर पाती हैं। परन्तु संकुचन पैदा करने में इस हॉर्मोन की बहुत ज़रूरत होती है। इसलिए औरत को चिंतामुक्त करने के लिए उसे आरामदायक माहौल में रखा जाता है। इस प्रकार तनाव मुक्त महिला का शरीर सामान्य रूप से काम करने लग जाता है। इस प्रकार अंत में ज़रूरी हॉर्मोन भी शरीर में पैदा हो जाते हैं जिससे शिशु के जन्म में मदद मिलती है।

8. रेंडी का तेल/ कैस्टर ऑइल

रेंडी का तेल रेचक (लैक्सटिव) की तरह काम करता है। यह आपके पेट तथा गर्भाशय की मांसपेशियों को उत्तेजित करता है । इस प्रकार संकुचन पैदा होने लगते हैं। परिणामस्वरूप शिशु माँ के गर्भ से बाहर आता है। अगर आपको इससे अलेर्जी है तो आप इसका प्रयोग न करें। इसके अलावा अगर आपको डायरिया है तब भी आप इसके सेवन से बचें अन्यथा आपकी सेहत बिगड़ सकती है, उल्टियां आ सकती हैं।

9. होमियोपैथिक इलाज

होमियोपैथिक इलाज में कुछ ऐसी औषधियां हैं जिनके सेवन से आपको लेबर पेन होने लगेंगे और प्रसूति (डिलीवरी) कर पाएंगी। परन्तु इन दवाइयों को चिकित्सक की सलाह पर ही लें क्योंकि इनके साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।

10. हर्बल इलाज

अलोपैथी की तरह हरबल औषधियां भी प्रसूति में लाभदायक होती हैं। पर प्रसूति के नाज़ुक दौर में आप यूँही कुछ न लें। विशेषज्ञ से परामर्श करवाने के पश्चात उनका सेवन करें ताकि शिशु को क्षति न पहुंचे।

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