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प्रसव के बाद नई माँ के लिए पर्याप्त नींद क्यों है ज़रूरी? इसके फायदे

बच्चे के जन्म से पहले और उसके बाद भी माँ को अपने लिए सम्पूर्ण नींद ले पाना ज़रा मुश्किल होता है। पहले अपने बढ़ते पेट के कारण और बाद में नवजात शिशु की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए, माँ को हरदम चौकन्ना रहना पड़ता है। प्रत्येक महिला को शिशु के जन्म के बाद पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी जाती है।

परन्तु दिक्कत यह है की माँ को सलाह तो मिल जाती है परन्तु शिशु की देख रेख में ही इतनी व्यस्त हो जाती है की खुद पर ध्यान देना उसके ज़हन से उतर जाता है।

अगर आप ढंग से सो नहीं पा रही है तो नींद पूरी करने के लिए क्या किया जाए, इसके लिए यह कुछ नुस्खें बताए गए हैं ताकि शिशु के उचित लालन-पालन के साथ-साथ आपको भी अच्छी नींद मिल सके-

1. शिशु के जन्म के पहले पति के साथ ज़िम्मेदारी बाँटें

गर्भ धारण के समय ही आप अपने साथी से बच्चे के काम के विभाजन के बारे में चर्चा कर लें। इस बारे में आपके नजदीकी रिश्तेदार भी मदद कर सकते हैं। बच्चे के जन्म के बाद दिन में या रात में अपनी सुविधा के अनुसार आपके सोते वक्त वे बच्चे को कुछ समय के लिए संभाल सकते हैं। यदि रिश्तेदार न हो तो मदद के लिए आप किसी दाई की नियुक्ति के बारे में भी विचार कर सकती हैं।

2. नींद आने के समय व्यर्थ काम में ना पड़ें

 चाहे आपका कितना भी मन करे लेकिन जब शिशु सो रहा हो, तब कामकाज में ज्यादा रुचि न लें। बिस्तर पर तकियों का पर्याप्त सहारा लेकर और कमरे का उचित तापमान निर्धारित करके अपने और बच्चे के लिए एक आरामदायक वातावरण तैयार करें और शिशु के साथ रात वाली एक अच्छी नांद लेने का प्रयास करें।

3. प्राकृतिक नींद आने पर जगें नहीं

 झपकी लेने की कोशिश करते समय इच्छा होने पर भी घड़ी की ओर न झांकिं। नींद के विशेषज्ञ मानते हैं कि इस पर ध्यान देना कि अब सोने के लिए कितना समय बचा है या फिर पिछली रात आप कितनी बार जागे और कितनी देर तक जागे सकती है।

4. कैफीन वाले तरल का अत्यधिक सेवन न करें

इन दिनों चाय कॉफी के रूप में कैफीन एल्कोहल और निकोटीन के सेवन को टालें। निकोटीन और कैफीन उत्तेजक होते हैं जिनसे रात के दौरान जागरण को बढ़ावा मिलता है।

5. शिशु के साथ सोएं

 माताओं को हमेशा अपने शिशु के साथ सोना चाहिए। बच्चे के जन्म के शुरू के कुछ माह तक मां और शिशु के बीच बंधन यानी जुड़ाव होना अत्यंत आवश्यक है। साथ-साथ सोने से भविष्य में आपसी संबंधों में मधुर लय बनती है और माता व शिशु के बीच समन्वय भी स्थापित होता है।

हम आशा करते हैं की इन छोटी-मोटी बातों पर आप ध्यान दें और अपने स्वास्थ्य को न बिगाड़ें। पढ़ने के बाद शेयर करना न भूलें।

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