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प्राकृतिक प्रसव (vaginal birth) के बाद महिला की रिकवरी


ईश्वर की सबसे खूबसूरत देन है संतान प्राप्ति। हर महिला नैचुरल डिलीवरी की कामना करती है। नैचुरल डिलीवरी का मतलब है शिशु को प्राकृतिक रूप से जन्म देना। इसमें शिशु योनि के जरिये बाहर निकलता है। डिलीवरी के बाद आपके शरीर को सामान्य स्थिति में आने के लिए थोड़ा समय चाहिए। इस पोस्ट में नैचुरल डिलीवरी के बाद महिला कैसा महसूस करेगी, शरीर में क्या परिवर्तन आते हैं और ठीक होने में कितना वक्त लगेगा के बारे में बतायेंगे।

1. सामान्य प्रसव के बाद महिला को बार-बार पेशाब आती है क्योंकि आपका शरीर के अनचाहे तत्वों को शरीर बाहर निकाल रहा है। उसके लिए किडनी द्वारा फ़िल्टर होकर वह मूत्र के रूप में बाहर आता है। इसमें मृत रक्त, प्रोटीन और चर्बी का मिश्रण होता है।

2. महिला को अधिक पसीना भी आता है क्योंकि यह भी शरीर की गन्दगी को बाहर निकालने का एक जरिया होता है। इसलिए महिला को स्नान करना चाहिए।

3. आपके बदन के कुछ हिस्सों जैसे की पैरों और टखनों में सूजन रह सकती है क्योंकि शरीर में मौजूद अतिरिक्त तरल इधर-उधर घूम रहा है। यह गर्भावस्था के दौरान होने वाली सूजन से भी अधिक हो सकती है। समय बीतते ठीक होने लगेगा।

4. अगर आप स्तनपान करा रही हैं, तो आपको ज्यादा प्यास लगेगी। इसलिए सुनिश्चित कीजिए कि शिशु को स्तनपान कराते समय आप अपने पास पानी रखें। इससे आपके बदन में पानी की कमी नहीं होगी।

5. कुछ दिनों तक आपके स्तनों में सूजन और दर्द हो सकता है क्योंकि आपके स्तनों में दूध आना शुरु हो गया है। स्तनपान के शुरुआती दिनों में आपके निप्पल में भी दर्द हो सकता है। मगर, ये सब आमतौर पर अस्थाई समस्याएं हैं, जब आप और शिशु स्तनपान की दिनचर्या के आदि हो जाएंगे, तो सब ठीक हो जाएगा।

6. खांसने, छींकने, हंसने या व्यायाम करते समय थोड़ा पेशाब निकल जाता है क्योंकि आपके मूत्राशय पर गर्भावस्था में दबाव पड़ने के कारण वहाँ की मांसपेशियां ज़रा ढीली और कमज़ोर हो गई हैं। नियमित व्यायाम करने से कुछ ही हफ्तों में इस समस्या का समाधान हो जाएगा।

7. प्राकृतिक प्रसव के बाद पेट में मरोड़ का दर्द होना सामान्य है क्योंकि आपका गर्भाशय सिकुड़कर गर्भावस्था से पहले वाले आकार में आ रहा है। यह दर्द आपको माहवारी के दर्द जैसा महूसूस हो सकता है। गर्भाशय को अपनी सामान्य स्थिति में आने में हफ्तों का समय लग जाता है।

8. आपके गर्भाशय की आंतरिक कोशिकाओं की परत भी अब निकलना शुरु हो जाती है। ये आपके शरीर से माहवारी जैसा महसूस होता है और योनि से बाहर निकल जाता है। ऐसा 6 सप्ताह तक जारी रह सकता है। शुरुआत में यह स्त्राव चटक लाल होता है, धीरे-धीरे इसका रंग हल्का होता जाता है। यह पहले गुलाबी और फिर पूरी तरह समाप्त होने से पहले सफेद-पीली रंगत ले लेता है।

9. प्राकृतिक प्रसव के दौरान योनि और गुदा के बीच के क्षेत्र का थोड़ा फट जाना सामान्य है। यह आमतौर पर जल्दी ठीक हो जाता है, मगर ज्यादा फट जाने या चीरा (एपिसियोटमी) लगने पर ठीक होने में कुछ और अधिक समय लगता है। आपको टांकों में कुछ दिनों या हफ्तों तक दर्द रह सकता है।

अगर आप दर्द या फिर टांकों के ठीक होने को लेकर चिंतित हैं, तो अपनी डॉक्टर से बात करें। श्रोणि मांसपेशियों के व्यायाम करने से सूजन कम होने और टांकों के जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है।

10. शिशु के जन्म के बाद भावनाओं में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। ऐसा होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि:

i) शिशु के जन्म के बाद शारीरिक असहजता

ii) नवजात की देखभाल की जिम्मेदारी

iii) अच्छी माँ बन पाने की चिंता

iv) नींद पूरी न होना

v) हॉर्मोनल बदलाव

कारण चाहे कुछ भी हो, शिशु के जन्म के बाद कुछ दिनों तक भाव-विभोर और रुआंसा महसूस होना एकदम सामान्य है। इसे बेबी ब्ल्यूज कहा जाता है।

उदासी दूर करने के लिये हर दिन एक या दो घंटे अपने लिए निकालें। किताब पढ़ें या संगीत सुनकर आराम करने का प्रयास करें। अपने पति के साथ कुछ समय अकेले मे बिताएं या शिशु के सोने के समय आप भी झपकी ले लें।

शिशु के जन्म के बाद शुरुआती कुछ महीनें शारीरिक और मानसिक तौर पर काफी थका देने वाले हो सकते हैं। थोड़े-थोड़े अंतराल के लिए आराम करके ऊर्जा प्राप्त करें। ऐसा करने से आप जल्दी ठीक हो जाएंगी।

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