Link copied!
Sign in / Sign up
7
Shares

प्लासेंटल ऐबरप्शन क्या है? जानें इस गंभीर समस्या के कारण लक्षण और उपचार (Placental Abruption: Everything You Need To Know In Hindi)

गर्भावस्था किसी भी महिला की जिंदगी का नाज़ुक दौर होता है। इस दौरान न सिर्फ आपको अपने आसपास के लोगों के सहयोग और देखभाल की जरूरत होती है बल्कि आपको भी अपनी देखभाल करने की आवश्यकता होती है। गर्भावस्था में एक तिमाही से दूसरे तिमाही में प्रवेश करने पर आप अपने शरीर में अनेकों परिवर्तन महसूस कर सकती है। कुछ बदलाव सामान्य होते हैं और कुछ बदलावों में आपको विशेष ध्यान और देखभाल की जरूरत होती है।

प्लेसेंटा प्रीविया, प्रीएक्लेमप्सिया और प्लासेंटल ऐबरप्शन उसी प्रकार के बदलाव या यूं कहा जाए कि उन समस्याओं में से एक है जिसके लिए चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता पड़ती है। अगर आप अपने आप को इनमें से किसी भी समस्या से ग्रस्त पाती है, तो परेशान न हों। आप फौरन चिकित्सकीय सहायता ले सकती है क्योंकि गर्भावस्था में होने वाली समस्याओं का उपचार सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

आज इस लेख में हम गर्भावस्था में होने वाली समस्या प्लासेंटल ऐबरप्शन के विषय पर बात करेंगे। हालांकि यह गर्भावस्था में होनी वाली एक असामान्य समस्या है और अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह गंभीर समस्या साबित हो सकती है। तो आइए जानते हैं कि प्लासेंटल ऐबरप्शन क्या है, इसके कारण, लक्षण और उपचार।

लेख की विषय सूची

प्लेसेंटा क्या है और प्लासेंटल ऐबरप्शन क्या है? (What is Placenta And What Is Placental Abruption in Hindi?)

प्लासेंटल ऐबरप्शन के लक्षण (Placental Abruption Symptoms in Hindi)

प्लासेंटल ऐबरप्शन के कारण (Causes Of Placental Abruption [abruptio placentae] in Hindi)

खतरे के कारक (Risk Factors in Hindi)

प्लासेंटल सैप्रेप्शन का निदान (Diagnosis Of Placental Separation in Hindi)

बचाव (Prevention in Hindi)

प्लासेंटल ऐबरप्शन का उपचार (Placental Abruption Treatment in Hindi)

निष्कर्ष (Conclusion)

प्लेसेंटा क्या है और प्लासेंटल ऐबरप्शन क्या है? (What is Placenta And What Is Placental Abruption in Hindi?)

प्लेसेंटा एक अंग है जो आपकी गर्भावस्था के दौरान विकसित होता है। यह गर्भाशय की लाइनिंग से जुड़ा होता है। इसका कार्य बढ़ते शिशु को ऑक्सीजन और महत्वपूर्ण पौष्टिक तत्वों की पूर्ति करना होता है। प्लेसेंटा अम्बिकल कोर्ड के माध्यम से शिशु से जुड़ता है। सामान्यता शिशु को जन्म देने के बाद प्लेसेंटा यूट्राइन वौल से अलग हो जाता है।

जब प्लेसेंटा यूट्राइन वौल से समय से पहले अलग हो जाता है, तो इसे प्लासेंटल ऐबरप्शन कहा जाता है। प्लासेंटल ऐबरप्शन के दौरान प्लेसेंटा आधा या पूरी तरह अलग हो सकता है। इससे गंभीर रक्तस्राव भी हो सकता है। साथ ही गर्भावस्था के दौरान इससे गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है क्योंकि शिशु को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और आवश्यक पोषण प्राप्त नहीं होते हैं।

[Back To Top]

प्लासेंटल ऐबरप्शन के लक्षण (Placental Abruption Symptoms in Hindi)

गर्भावस्था के दौरान प्लासेंटल ऐबरप्शन के लक्षण और संकेत अन्य समस्याओं की भांति ही दिखाई पड़ते हैं। यह प्लेसेंटा प्रीविया या प्रीएक्लेमप्सिया की तरह ही लग सकतें हैं। प्रीएक्लेमप्सिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आपका रक्तचाप बढ़ जाता है और आपके यूरिन में प्रोटीन भी हो सकता है।

यह आवश्यक है कि अपने तीसरे तिमाही में प्रवेश करने के बाद आप अधिक सावधानी बरतें। प्लासेंटल ऐबरप्शन तीसरे तिमाही या तीसरे तिमाही के कुछ हफ्ते पहले होता है। अगर नीचे सूचीबद्ध किए गए कोई भी लक्षण आपको दिखाई देते हैं या महसूस होते हैं, तो आप फौरन डॉक्टर से संपर्क करें। हालांकि आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इसका इलाज सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

कृप्या नीचे सूचीबद्ध किए गए प्लेसेंटल ऐबरप्शन के लक्षणों पर ध्यान दें।

योनि से रक्तस्राव - योनि से रक्तस्राव बहुत अधिक या बहुत कम भी हो सकता है। लगभग 20% मामलों में योनि से रक्तस्राव नहीं होता है। अगर तीसरे तिमाही में योनि से रक्तस्राव होता है, तो फौरन अपने डॉक्टर से परामर्श लें। इसके अन्य लक्षण यह है:-

– अचानक कमर में तेज़ दर्द

– एब्डोमिनल पेन

– असहज महसूस होना

– यूट्राइन कोनट्रैक्शन

– यूट्राइन टेंडरनेस

[Back To Top]

प्लासेंटल ऐबरप्शन के कारण (Causes Of Placental Abruption [abruptio placentae] in Hindi)

अधिकतर मामलों में प्लासेंटल ऐबरप्शन का वास्तविक कारण पता नहीं चलता है। चिकित्सकों ने पता लगाया है कि प्लेसेंटा और यूट्रस में रक्त की पूर्ति में कमी के कारण प्लासेंटल ऐबरप्शन हो सकता है।

प्लासेंटल ऐबरप्शन के कुछ मुख्य कारण इस प्रकार है:-

गर्भवती महिला के एब्डोमन में चोट लगने के कारण - इस कारण प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से अलग हो सकता है। यह तकलीफ़ और चोट दुर्घटना, शारीरिक प्रताड़ना और दुर्घटनावश गिरने के कारण हो सकती है।

अचानक एमिनोटिक द्रव का छुट जाना या निकल जाना - इस कारण प्लेसेंटा यूट्राइन वौल से अलग हो सकता है। अत्याधिक एमिनोटिक द्रव होने के कारण एमिनोटिक मैम्बरेन के फटने से यह समस्या हो सकती है।

खतरे के कारक (Risk Factors in Hindi)

प्लासेंटल ऐबरप्शन का ख़तरा निम्न स्थितियों में हो सकता है:-

– अगर उम्र 35 से ज्यादा हो

– एक से अधिक शिशु गर्भ में हो

– अगर पहले भी प्लासेंटल ऐबरप्शन की समस्या हुई हो

– अगर हमेशा उच्च रक्तचाप रहता हो

– अल्कोहल और शराब का सेवन करने के कारण

– गर्भावस्था की अन्य समस्या जैसे कि यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) और एमिनोटिक द्रव व अम्बिकल कोर्ड में समस्या के कारण

[Back To Top]

प्लासेंटल सैप्रेप्शन का निदान (Diagnosis Of Placental Separation in Hindi)

आपके चिकित्सक शारीरिक परीक्षण कर के माध्यम से प्लासेंटल ऐबरप्शन का पता लगा सकते हैं। इसके बाद वह अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और फीटल मोनिटरिंग करेंगे। प्लासेंटल ऐबरप्शन का वास्तविक निदान प्रसव के बाद ही संभव है। प्लेसेंटा को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है और वहां परीक्षण के उपरांत डॉक्टर कोई निश्चित कारण देने में सक्षम होते हैं। निदान के लिए निम्न बातों पर गौर किया जाता है:-

– गर्भाशय की टेंडरनेस और टोन का परीक्षण

– रक्त परीक्षण

– भ्रूण के दिल की धडकनों को जांचना

– योनि और सर्विक्स का आंतरिक परीक्षण

– प्लेसेंटा की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड

बचाव (Prevention in Hindi)

प्लासेंटल ऐबरप्शन से बचाव कर पाना आपके बस के बाहर हैं। हालांकि इसकेे जोख़िम के कारकों पर ध्यान देकर और उचित देखभाल से आप इसका खतरा कम कर सकते हैं। इसमें निम्न शामिल हैं:-

– अगर आपका रक्तचाप अधिक रहता है तो समय समय पर डॉक्टर से जांच करवाएं

– ड्रग, अल्कोहल और धूम्रपान न करें

– सफ़र करने के दौरान सीटबेल्ट पहने

– समस्या या तकलीफ़ होने पर डॉक्टर से परामर्श लें

– अगर आपको पहले भी प्लासेंटल ऐबरप्शन हुआ है, तो अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें।

[Back To Top]

प्लासेंटल ऐबरप्शन का उपचार (Placental Abruption Treatment in Hindi)

प्लासेंटल ऐबरप्शन आधा हो या पूरा इसमें नज़दीक से व उचित प्रकार की जांच की आवश्यकता पड़ती है। यह जांच अमूमन अस्पताल में की जाती है। आपके चिकित्सक आपके और आपके शिशु के आवश्यक संकेत और क्रियाओं का विशेष ध्यान रखेंगे। प्लासेंटल ऐबरप्शन का उपचार उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है।

गर्भावस्था की शुरुआत में कुछ कम गंभीर श्रेणी के मामले:

अगर आपके भ्रूण को कोई समस्या नहीं हो रही है और आपकी योनि से रक्तस्राव बंद हो गया है, तो आपको अस्पताल से जाने की इजाज़त मिल जाएगी। लेकिन आपको प्रसव होने तक अपने डॉक्टर से लगातार संपर्क में रहना होगा। अन्य समस्याओं से बचने के लिए आपको अपना विशेष ध्यान रखना होगा।

गर्भावस्था की शुरुआत में मध्यम श्रेणी के मामले:

ऐसी स्थिति में आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। डॉक्टर अपनी देखरेख में शिशु के पर्याप्त विकसित होने का इंतजार करते हैं, ताकि वह लेबर इंड्यूस कर सकें। डॉक्टर शिशु के पल्मोनरी सिस्टम को तेजी से विकसित करने के लिए कुछ विशेष दवाइयाँ लेने की सलाह दे सकते हैं।

गर्भावस्था के आखिरी हफ्ते में कम और मध्यम श्रेणी के गंभीर मामले:

अगर ऐबरप्शन गर्भावस्था के 36वें हफ्ते में होता है तो डॉक्टर डिलीवरी की सलाह देते हैं। इस मामले में योनि से जन्म देने की संभावना होती है। हालांकि अगर मामला गंभीर होता है, तो डॉक्टर सी-सेक्शन करतें हैं।

गंभीर मामले:

गंभीर मामलों में चिकित्सक आपको डिलीवरी के लिए तैयार करेंगे। अगर रक्तस्राव अधिक हुआ, तो ब्लड ट्रांसफ्यूजन या इमरजेंसी हिस्टरेक्टमी दोनों की मदद ली जा सकती हैं।

[Back To Top]

निष्कर्ष (Conclusion)

एनसीबीआई ने कहा कि प्लेसेंनटल ऐबरप्शन गर्भावस्था के दौरान एक दुर्लभ लेकिन गंभीर समस्या है। यह समस्या गर्भावस्था के ढाई महीने या तीसरे तिमाही में होती है। इस समस्या में गर्भावस्था के दौरान भारी रक्तस्राव होता है। साथ ही इससे ग्रस्त महिला को कमर में तेज़ दर्द एब्डोमिनल पेन होता है। अगर आपको कोई भी लक्षण और संकेत दिखाई देते हैं तो फौरन अपने डॉक्टर से संपर्क करें और अपना ख्याल रखें।

Related Articles

पसंदीदा कॉफी प्रेग्नेंसी में भारी पड़ सकती हैं—जानें इसके फ़ायदे और गंभीर नुक़सान (Benefits And Side Effects Of Coffee That You Need To Know In Hindi)

एप्पल साइडर विनेगर से हो सकता है यह नुकसान—बरतें ये सावधानियां (Side Effects Of Apple Cider Vinegar You Need To Know About In Hindi)

जानें बादाम तेल के ये अनोखे फ़ायदे (Uses of Almond Oil In Hindi)

रागी का सेवन करना होता है फ़ायदेमंद—जानें रागी से होने वाले स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits Of Eating Ragi You Did Not Know About In Hindi)

त्वचा और बालों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए चमत्कारी है ब्लैक टी (Amazing Uses Of Black Tea For Skin And Hair Care In Hindi)

आलू से बढ़ाएं चेहरे की रौनक—जानें आलू से फेस पैक तैयार करने की विधि (How To Use Potatoes For Glowing Skin In Hindi)

Click here for the best in baby advice
What do you think?
0%
Wow!
0%
Like
0%
Not bad
0%
What?
scroll up icon