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जानिये बजरंगबली से क्यों नाराज़ रहते हैं यहां के लोग

संकटमोचन बजरंगबली हर किसी के दुःख दूर करते हैं और हर कोई उन्हें अपने अच्छे-बुरे दिनों में याद करता है, लेकिन क्या हो जब संकटमोचन से कोई गलती हो जाए तो। अक्सर फिल्मों में दिखाया जाता था कि जब भगवान् कुछ गलत करते थे तो लोग उनसे नाराज़ हो जाते थे, लेकिन अब यह असलियत में भी हुआ है। उत्तराखंड में एक ऐसा गाँव है जहां एक भी बजरंगबली का मंदिर नहीं है क्यूंकि इस गाँव में संकटमोचन हनुमान की पूजा नहीं की जाती

मान्यता है कि, जब श्री राम के भाई लक्ष्मण को युद्ध में मेघनाद कि बाण लगी थी तब संकटमोचन संजीवनी को तलाशते हुए उत्तराखंड के द्रोणागिरि गांव पहुंचे थे, जो कि लगभग 14000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। हालांकि जब भगवान हनुमान वहां पहुंचे तो उन्हें चारो तरफ पहाड़ ही पहाड़ दिखे और वो समझ नहीं पा रहे थे की उन्हें संजीवनी कहाँ मिलेगी और तब एक बूढी महिला ने एक पर्वत की तरफ इशारा करके उन्हें बताया की वहां उन्हें संजीवनी बूटी मिल जाएगी। उस पर्वत पर जाने के बाद भी संकटमोचन संजीवनी नहीं पहचान सके और इसलिए वो पूरा पर्वत ही उठाकर श्री राम के पास ले गए। फिर संजीवनी से लक्ष्मण की जान तो बच गई लेकिन द्रोणागिरी के लोग भगवान् हनुमान से नाराज़ हो गए क्योंकि यह मानना है की उस गाँव में इस पर्वत की पूजा की जाती थी और संकटमोचन के ऐसा करने से लोग उनसे नाराज़ होकर उनकी पूजा करना छोड़ दिए।

इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि संकटमोचन की मदद करने वाली उस वृद्ध महिला को भी गाँव से निकाल दिया गया। यहां के लोग बजरंबली से इतने नाराज़ हैं कि यहां बजरंगबली का प्रतीक माने जाने वाले लाल ध्वज को भी नहीं लगाने दिया जाता।

लोग गलती करें तो उनसे नाराज़ होना, उनपर गुस्सा दिखाना आम बात है लेकिन भगवान् के गलती करने पर उनसे नाराज़ होना वाकई में एक हैरानी की बात है। 

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