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पति-पत्नी की उम्र का फासला उनके विवाहिक जीवन को कैसे प्रभावित करता है


 भारत में विवाह के लिए कुछ नियम कानून बनाये गए हैं और उनका दंपत्ति के वैवाहिक जीवन पर कैसे फर्क पड़ सकता है इसके पीछे के कारण भी बताये गए हैं। इस ब्लॉग में पति-पत्नी के बीच में उम्र के अंतर के बारे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बताया जायेगा।

हमने सभी जोड़ों में पति की अधिक उम्र को ही दर्जा दिया है। इस लेख को इस बात को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

पति पत्नी के बीच एक साल का अंतर

अगर ऐसे जोड़े होते हैं तो महिला थोड़ी उम्रदार नज़र आती है। पति उनका तुलना अधिक युवा नज़र आता है। इसलिए दोनों की मानसिक मच्योरिटी भी एक समान होती है। उनमें बहस हो सकती है और दोनों की ज़िद के कारण उनमें सुलह होने में समय लग जाता है। दोनों में बचकानापन ज़्यादा होने के कारण मनमुटाव आ जाते हैं। इसलिए शादी को संभालना ध्यान से चाहिए।

पति पत्नी के बीच दो साल का अंतर

ये जोड़े पहली श्रेणी की भांति ही अल्हड़ होते हैं। इनमें साझेदारी लाना उतना ही ज़रूरी होता है जितना की पहले श्रेणी के जोड़े में। दो साल का उम्र में अंतर वैवाहिक जोड़े में खास मायने नहीं रखता।

पति पत्नी के बीच तीन साल का अंतर

इस तरह के जोड़े में मानसिक तालमेल होता है। क्योंकि पति पत्नी से अधिक समझदार होता है और पत्नी की ग़ल्तियों को सुधार लेता है और घर के महत्वपूर्ण फैसले लेने के काबिल होता है।

पति पत्नी के बीच चार-पांच साल का अंतर

इस तरह के जोड़े में पति-पत्नी साथ में अच्छे दिखते हैं और चूँकि महिलायें पुरुषों से जल्दी उम्रदार दिखने लगती हैं, इसलिए पति पत्नी के बीच में इतना फासला अधिक मायने नहीं रखता है और ठीक दिखता है।

पति पत्नी के बीच पांच साल से अधिक का अंतर

इस तरह के जोड़े थोड़े अटपटे दिख सकते हैं। उनमें मानसिकता और सोच में भी अंतर हो जाता है। क्योंकि एक खुद को अधिक समझदार समझता है और दूसरा अपने बचपने से बाहर नहीं आ पाता। दोनों को अपनी बातें और नजरिया सही लगता है इसलिए आप अपने बेटर हाफ का नजरिया समझें।

साइंस क्या कहती है युवा स्त्री को पत्नी बनने के बारे में?

दरअसल महिलाओं को जल्दी शादी इसलिए कर लेनी चाहिए क्योंकि 20 से 30 वर्ष में उनमें अधिक फर्टिलिटी होती है। वह स्वस्थ्य बच्चों को जन्म दे सकती हैं और उनमें गर्भ धारण करने में ज़्यादा दिक्कत नहीं आती।

बढ़ती उम्र में उनके अण्डों की स्वास्थ्य घटने लगती हैं और जब वे स्पर्म के साथ जुड़ते हैं तो जो गर्भ धारण होता है, वह शिशु के रूप में अल्पविकसित या बर्थ डिफेक्ट का शिकार हो सकता है।

महिलाओं में माहवारी जल्दी शुरू होती है और आजकल तो उनमें मेनोपॉज़ भी 45 वर्ष से पहले ही आने लगता है। इसलिए उन्हें जल्दी उम्र में हदी कर लेनी चाहिए ताकि वे नार्मल डिलीवरी के द्वारा शिशु को जन्म दे सकें वरना बड़ी उम्र में उन्हें सिजेरियन सेक्शन से बच्चा पैदा करना पड़ता है।

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